डिजिटल खेती। कृषि विभाग की योजनाओं संबंधी हर जानकारी ले सकेंगे किसान
खेती-किसानी भी होगी डिजिटल, किसान सुविधा कृषि क्योसक की शुरुआतमीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। हरियाणा में डिजिटल किसान सुविधा कृषि क्योसक की शुरुआत हो गई है। इस क्योसक के माध्यम से किसान न केवल कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे बल्कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम संबंधित औपचारिकताएं भी इसी के माध्यम से पूरी करवाई जा सकती है। इस क्योसक को प्रदेश के सभी 22 जिलों के उपायुक्त कार्यालयों के साथ जोड़ा गया है और इस क्योसक में हॉट लाईन दूरभाष सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है ताकि किसान टेलीफोन के माध्यम से राज्य मुख्यालय तक अपनी बात पंहुचा सके। कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने डिजिटल योजना के तहत किसानों को लाभांवित करने के लिए किसान हरियाणा ऐप बनाया है। किसान इस ऐप के माध्यम से सभी स्कीमों की जानकारी प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सबसे प्रभावी संदेशवाहक की भूमिका अदा कर सकते है इसलिये इस प्रचार अभियान में विद्यार्थियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विद्यार्थी लेवल पर कक्षा 5 से 8 तक पेंटिंग तथा 8 से 12 तक पेंटिंग, स्लोगन, कविता लेखन व भाषण प्रतियोगिता आदि करवाई जायेगी। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को 500 रुपये तथा अन्य बच्चों को प्रोत्साहित एवं पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए सीड पेंसिल पुरस्कार के रूप में दी जायेंगी। इस पेंसिल का प्रयोग करने के बाद विद्यार्थी, पेंसिल के साथ लगे इस बीज को जहां भी लगाएंगे, वहां पौधे पनपेगें व पर्यावरण बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा इस सीड पेंसिल के पीछे तुलसी का बीज लगाया गया है।
सभी जिलों में किसानों को जागरूक करेंगे 22 प्रचार वाहन
कृषि मंत्री ने बताया कि जुलाई मास में प्रदेश के सभी जिलों में प्रचार प्रसार हेतु 22 गाड़ियां चलाई जाएंगी। इसके इलावा सिरसा, गुड़गांव व पंचकूला में क्लस्टर स्तर पर एक-एक सूचना रथ चलाया गया है, जिसके माध्यम से किसानों को योजनाओं के बारे में जागरूक किया जायेगा। ये गाडिय़ां वर्षभर पूरे प्रदेश का भ्रमण करेंगी और फसल अवशेष प्रबंधन के साथ साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावांतर भरपाई योजना, जल ही जीवन योजना व विभाग की अन्य योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाई जायेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण से हमें दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहरीली गैस से अधिकांश वन्य जीव खत्म हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कसान खेतों में पराली जलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति को भी कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया भी प्रचार का एक प्रभावी माध्यम है और फेसबुक व इंस्टाग्राम के माध्यम से प्रदेशवासियों तक इस विभाग की योजनाओं और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों की जानकारी पंहुचाई जायेगी।
फसली अवशेष जलाने की बजाए कृषि उपकरण प्रयोग में लाएं किसान
कृषि मंत्री ने पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए किसानों का आह््वान किया कि वे माचिस के स्थान पर कृषि उपकरणों का उपयोग कर सरकार की ओर से मुहैया करवाये जा रहे कृषि उपकरणों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त करें।


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