सीएम साहब ! ईमानदार सरकार को बदनाम कर रहा है ये भाजपा नेता, पार्टी से निकालो
आंध्र प्रदेश की स्टेट द्रविडियन यूनिवर्सिटी से विभिन्न विषयों में पीएचडी कर रहे शोधार्थियों ने जडे़ गंभीर आरोप
500 शोधार्थियों से लाखों रुपये एंठने के बावजूद 10 साल से नहीं दी पीएचडी की डिग्री
खुद को भाजपा एससी सैल मोर्चा हिसार का जिला प्रधान बताता है यह नेता
संदीप कम्बोज।मीडिया जंक्शन
हिसार। आंध्र प्रदेश की स्टेट द्रविडियन यूनिवर्सिटी से विभिन्न विषयों में पीएचडी कर रहे शोधार्थियों ने 10 वर्षो से डिग्री न मिलने के पीछे भाजपा एससी सैल मोर्चा हिसार के जिला प्रधान एवं जेबीएचपी कॉलेज नाम से सैन्टर चला रहे सुल्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप जड़े हैं। पीएचडी शोधार्थियों ने भविष्य को ग्रहण लगाने वाले भाजपा नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से गुहार लगाने के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुल्तान पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं देश की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने डिग्री न मिलने की सूरत में परिवार सहित आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है। रविवार को यहां एक होटल में आयोजित पीएचडी शोधार्थी संघ के उपप्रधान पृथ्वीराज,महासचिव यशवीर दहिया,गीता रानी,मनीष कुमार और संजय बंसल ने 10 साल से लटकी पीएचडी डिग्री का दर्द निकालते हुए देश के कर्ता-धर्ताओं से समाधान मांगा। संघ के महासचिव यशवीर दहिया ने कहा कि हिसार में जेबीएचपी कॉलेज नाम से सैन्टर चला रहे सुल्तान नामक व्यक्ति जो एक तरह से लूट की दुकान चला रहा है, उसके कारण हरियाणा के 500 से ज्यादा शोधार्थियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। सुल्तान खुद को भाजपा का हिसार में एससी सैल का जिला प्रधान बताकर प्रशासन पर तो दबाव बनाने के चक्कर में रहता ही है साथ में ईमानदार मुख्यमंत्री मनोहरलाल की सोच को बड़ी चोट पहुंचा रहा है। इस ठग सुलतान ने हिसार में रैड स्केयर मार्किट के नजदीक द्रविडियन विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश का स्टडी सैंटर चलाया हुआ है। वर्ष 2008-09 में जेबीएचपी कॉलेज, हिसार ने इस बात का प्रचार किया था कि वह द्रविडियन से एमफिल और पीएचडी करवा रहा हैं। उस समय हरियाणा के सैंकड़ों छात्रों ने जेबीएचपी में पहुंचकर इसके संचालक एवं डायरेक्टर सुल्तान सिंह से पीएचडी के संदर्भ में बात की। सुल्तान ने बताया कि यह द्रविडियन विश्वविद्यालय का स्टडी सैंटर है। यदि आप पीएचडी करते है तो पेपर, प्रैक्टिकल, सेमीनार व वायवा सब हिसार में होंगे। सुल्तान पर विश्वास करके प्रदेश के सैकड़ों छात्रों ने पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करवाया। इस रजिस्टे्रशन के लिए बकायदा जो फीस प्रोस्पैक्टस में 15 हजार रूपये दी गई है, वह 24-24 हजार, कुल 48-50 दो इन्स्टॉलमेंट में दी गई। डायरेक्टर सुल्तान ने रजिस्ट्रेशन करवाने के साथ-साथ आई कार्ड, टॉपिक अप्रूवल लैटर जारी किये। उस समय छात्रों ने अपने ओरिजनल दस्तावेज भी दिये थे। जो बाद में सुल्तान ने यूनिवर्सिटी से चैकिंग के बाद वापिस लौटा दिये। सभी छात्रों ने समय पर फीस देने के साथ-साथ अपनी थिसिस भी जमा करवा दी। थिसिस जमा करवाने का पत्र सभी शोधार्थियों के पास हैं। लेकिन ज्यों-ज्यों वायवा में देरी होती गई, त्यों-त्यों शोधार्थियों की परेशानी बढ़ती गई। सुल्तान से वायवा करवाने के लिए कहा गया तो उसने सीधे तौर पर कहा कि वायवा यूनिवर्सिटी में होगा और यदि किसी को कराना है तो उसके लिए कम से कम 50 हजार रूपये देने होंगे। सुल्तान की बात सुनकर उनके पांव के तले की जमीन खिसक गई। क्योंकि वे पहले ही दो इन्स्टाल में भारी भरकम राशि सुल्तान को दे चुके थे। सुल्तान के व्यवहार से परेशान होकर जब उन्होंने जैसे-तैसे विश्वविद्यालय से संपर्क किया तो वहां उनको ओर भी बड़ा झटका लगा। क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि उनकी पूरी फीस ही जमा नहीं हुई हैं। इसलिए अधिकतर शोधार्थियों ने यूनिवर्सिटी में जाकर अपनी फीस जमा करवानी पड़ी। सुल्तान ने उनके साथ सरासर धोखाधड़ी की हैं। जो रूपये विश्वविद्यालय में जमा करवाने थे, उसने उनको हड़प लिया हैं। इस राशि को लेकर तथा वायवा की बात जब सुल्तान से करते है तो वह अपने लोगों से जान से मारने की धमकी दिलवाता हैं। वह सीधे तौर पर कहता है कि अगर किसी को वायवा करवाना है या फिर वायवा के बाद डिग्री लेनी है तो उसके लिए 50 हजार से ज्यादा की राशि देनी होगी। सुल्तान ने द्रविडियन विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ सांठगांठ की हुई है। इसलिए विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उनकी पीएचडी प्रक्रिया को सिरे चढ़ाना तो दूर की बात, फोन पर बात भी नहीं करते।
बेरोजगार व फोर्थ क्लास कर्मचारियों को कागजों में बना दिया अस्सिटेंट प्रोफेसर
पीएचडी शोधार्थी संघ के महासचिव यशवीर दहिया ने कहा कि सुल्तान ने शोधार्थियों से बिना पूछे ही आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट में केस डाल दिया। इस केस में उसने बेरोजगार शोधार्थियों और जो फोर्थ क्लास कर्मचारी लगे हुए है उनको को भी अस्सिटेंट प्रोफेसर दर्शाया है। कोर्ट में बिना पूछे केस डालना और झूठे दस्तावेज पेश करना बड़ा जुर्म हैं। इसलिए जो व्यक्ति कॉलेज स्टडी संैटर की आड़ में ब्लैकमेलिंग का खेल रचकर के दूसरों के भविष्य को बर्बाद करने पर तुला हुआ है, उसके खिलाफ हिसार के पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग करेंगे। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
भाजपा का पद लेकर बना रहा दबाव
दहिया ने कहा कि यदि सुल्तान को अभी नहीं रोका गया तो वह दूसरे छात्रों के भविष्य को भी उजाडऩे का काम करेगा। हम सब प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री से भी आग्रह करते हैं कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत पार्टी से निकलवाकर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दें। क्योंकि सुल्तान भाजपा पदाधिकारी का पद केवल अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए लिये हुए हैं। वह एससी सैल मोर्चा जिला प्रधान की आड़ में दबाव और प्रभाव का खेल रच कर अपनी औच्छी सोच को अंजाम दे रहा हैं। इस मामले में संघ जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजेगा। इस मामले में शोधार्थी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले ही ज्ञापन भेज चुके हैं।
क्या मुख्यमंत्री हमारी रूकी हुई डिग्री नहीं दिला सकतेपीएचडी शोधार्थी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल हमारी पैरवी करे। क्योंकि वे प्रदेश के राजा है और उनकी प्रजा के लगभग 500 शोधार्थियों का भविष्य परेशानी के भंवर में लटका हुआ है। इनके साथ उनके परिजन भी परेशान है। मनोहर लाल आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री से इस मामले में बातचीत करके उनकी डिग्री दिलवाये। जब विदेशों में फंसे लोगों को देश की विदेश मंत्री रही सुषमा स्वराज वापस अपने वतन में ला सकती है तो क्या मुख्यमंत्री अपने ही देश में अव्यवस्था के कारण रूकी हुई पीएचडी की डिग्री नहीं दिलवा सकते।
अब दो ही रास्ते, आत्मदाह या डिग्री
यशवीर दहिया ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के संज्ञान में अब उनके सामने दो ही रास्ते हैं। यदि डिग्री नहीं मिली तो फिर परिवार सहित आत्मदाह करना पड़ेगा। क्योंकि उनमें अधिकतरों की उम्र 42 साल पार हो गई है। अधिकतर का रजिस्ट्रेशन 30-32 की उम्र में हुआ था। इसलिए भविष्य अंधकार में है और शासन-प्रशासन से न्याय पाने के लिए आज संघर्ष करना पड़ रहा हैं। अब या तो डिग्री आएगी या मौत को गले लगाएंगे।
आंध्र प्रदेश की स्टेट द्रविडियन यूनिवर्सिटी से विभिन्न विषयों में पीएचडी कर रहे शोधार्थियों ने जडे़ गंभीर आरोप
500 शोधार्थियों से लाखों रुपये एंठने के बावजूद 10 साल से नहीं दी पीएचडी की डिग्री
खुद को भाजपा एससी सैल मोर्चा हिसार का जिला प्रधान बताता है यह नेता
संदीप कम्बोज।मीडिया जंक्शन
हिसार। आंध्र प्रदेश की स्टेट द्रविडियन यूनिवर्सिटी से विभिन्न विषयों में पीएचडी कर रहे शोधार्थियों ने 10 वर्षो से डिग्री न मिलने के पीछे भाजपा एससी सैल मोर्चा हिसार के जिला प्रधान एवं जेबीएचपी कॉलेज नाम से सैन्टर चला रहे सुल्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप जड़े हैं। पीएचडी शोधार्थियों ने भविष्य को ग्रहण लगाने वाले भाजपा नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से गुहार लगाने के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन से सुल्तान पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं देश की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने डिग्री न मिलने की सूरत में परिवार सहित आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है। रविवार को यहां एक होटल में आयोजित पीएचडी शोधार्थी संघ के उपप्रधान पृथ्वीराज,महासचिव यशवीर दहिया,गीता रानी,मनीष कुमार और संजय बंसल ने 10 साल से लटकी पीएचडी डिग्री का दर्द निकालते हुए देश के कर्ता-धर्ताओं से समाधान मांगा। संघ के महासचिव यशवीर दहिया ने कहा कि हिसार में जेबीएचपी कॉलेज नाम से सैन्टर चला रहे सुल्तान नामक व्यक्ति जो एक तरह से लूट की दुकान चला रहा है, उसके कारण हरियाणा के 500 से ज्यादा शोधार्थियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। सुल्तान खुद को भाजपा का हिसार में एससी सैल का जिला प्रधान बताकर प्रशासन पर तो दबाव बनाने के चक्कर में रहता ही है साथ में ईमानदार मुख्यमंत्री मनोहरलाल की सोच को बड़ी चोट पहुंचा रहा है। इस ठग सुलतान ने हिसार में रैड स्केयर मार्किट के नजदीक द्रविडियन विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश का स्टडी सैंटर चलाया हुआ है। वर्ष 2008-09 में जेबीएचपी कॉलेज, हिसार ने इस बात का प्रचार किया था कि वह द्रविडियन से एमफिल और पीएचडी करवा रहा हैं। उस समय हरियाणा के सैंकड़ों छात्रों ने जेबीएचपी में पहुंचकर इसके संचालक एवं डायरेक्टर सुल्तान सिंह से पीएचडी के संदर्भ में बात की। सुल्तान ने बताया कि यह द्रविडियन विश्वविद्यालय का स्टडी सैंटर है। यदि आप पीएचडी करते है तो पेपर, प्रैक्टिकल, सेमीनार व वायवा सब हिसार में होंगे। सुल्तान पर विश्वास करके प्रदेश के सैकड़ों छात्रों ने पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करवाया। इस रजिस्टे्रशन के लिए बकायदा जो फीस प्रोस्पैक्टस में 15 हजार रूपये दी गई है, वह 24-24 हजार, कुल 48-50 दो इन्स्टॉलमेंट में दी गई। डायरेक्टर सुल्तान ने रजिस्ट्रेशन करवाने के साथ-साथ आई कार्ड, टॉपिक अप्रूवल लैटर जारी किये। उस समय छात्रों ने अपने ओरिजनल दस्तावेज भी दिये थे। जो बाद में सुल्तान ने यूनिवर्सिटी से चैकिंग के बाद वापिस लौटा दिये। सभी छात्रों ने समय पर फीस देने के साथ-साथ अपनी थिसिस भी जमा करवा दी। थिसिस जमा करवाने का पत्र सभी शोधार्थियों के पास हैं। लेकिन ज्यों-ज्यों वायवा में देरी होती गई, त्यों-त्यों शोधार्थियों की परेशानी बढ़ती गई। सुल्तान से वायवा करवाने के लिए कहा गया तो उसने सीधे तौर पर कहा कि वायवा यूनिवर्सिटी में होगा और यदि किसी को कराना है तो उसके लिए कम से कम 50 हजार रूपये देने होंगे। सुल्तान की बात सुनकर उनके पांव के तले की जमीन खिसक गई। क्योंकि वे पहले ही दो इन्स्टाल में भारी भरकम राशि सुल्तान को दे चुके थे। सुल्तान के व्यवहार से परेशान होकर जब उन्होंने जैसे-तैसे विश्वविद्यालय से संपर्क किया तो वहां उनको ओर भी बड़ा झटका लगा। क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि उनकी पूरी फीस ही जमा नहीं हुई हैं। इसलिए अधिकतर शोधार्थियों ने यूनिवर्सिटी में जाकर अपनी फीस जमा करवानी पड़ी। सुल्तान ने उनके साथ सरासर धोखाधड़ी की हैं। जो रूपये विश्वविद्यालय में जमा करवाने थे, उसने उनको हड़प लिया हैं। इस राशि को लेकर तथा वायवा की बात जब सुल्तान से करते है तो वह अपने लोगों से जान से मारने की धमकी दिलवाता हैं। वह सीधे तौर पर कहता है कि अगर किसी को वायवा करवाना है या फिर वायवा के बाद डिग्री लेनी है तो उसके लिए 50 हजार से ज्यादा की राशि देनी होगी। सुल्तान ने द्रविडियन विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ सांठगांठ की हुई है। इसलिए विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उनकी पीएचडी प्रक्रिया को सिरे चढ़ाना तो दूर की बात, फोन पर बात भी नहीं करते।
बेरोजगार व फोर्थ क्लास कर्मचारियों को कागजों में बना दिया अस्सिटेंट प्रोफेसर
पीएचडी शोधार्थी संघ के महासचिव यशवीर दहिया ने कहा कि सुल्तान ने शोधार्थियों से बिना पूछे ही आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट में केस डाल दिया। इस केस में उसने बेरोजगार शोधार्थियों और जो फोर्थ क्लास कर्मचारी लगे हुए है उनको को भी अस्सिटेंट प्रोफेसर दर्शाया है। कोर्ट में बिना पूछे केस डालना और झूठे दस्तावेज पेश करना बड़ा जुर्म हैं। इसलिए जो व्यक्ति कॉलेज स्टडी संैटर की आड़ में ब्लैकमेलिंग का खेल रचकर के दूसरों के भविष्य को बर्बाद करने पर तुला हुआ है, उसके खिलाफ हिसार के पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग करेंगे। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
भाजपा का पद लेकर बना रहा दबाव
दहिया ने कहा कि यदि सुल्तान को अभी नहीं रोका गया तो वह दूसरे छात्रों के भविष्य को भी उजाडऩे का काम करेगा। हम सब प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री से भी आग्रह करते हैं कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत पार्टी से निकलवाकर उसके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दें। क्योंकि सुल्तान भाजपा पदाधिकारी का पद केवल अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए लिये हुए हैं। वह एससी सैल मोर्चा जिला प्रधान की आड़ में दबाव और प्रभाव का खेल रच कर अपनी औच्छी सोच को अंजाम दे रहा हैं। इस मामले में संघ जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजेगा। इस मामले में शोधार्थी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले ही ज्ञापन भेज चुके हैं।
क्या मुख्यमंत्री हमारी रूकी हुई डिग्री नहीं दिला सकतेपीएचडी शोधार्थी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल हमारी पैरवी करे। क्योंकि वे प्रदेश के राजा है और उनकी प्रजा के लगभग 500 शोधार्थियों का भविष्य परेशानी के भंवर में लटका हुआ है। इनके साथ उनके परिजन भी परेशान है। मनोहर लाल आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री से इस मामले में बातचीत करके उनकी डिग्री दिलवाये। जब विदेशों में फंसे लोगों को देश की विदेश मंत्री रही सुषमा स्वराज वापस अपने वतन में ला सकती है तो क्या मुख्यमंत्री अपने ही देश में अव्यवस्था के कारण रूकी हुई पीएचडी की डिग्री नहीं दिलवा सकते।
अब दो ही रास्ते, आत्मदाह या डिग्री
यशवीर दहिया ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल के संज्ञान में अब उनके सामने दो ही रास्ते हैं। यदि डिग्री नहीं मिली तो फिर परिवार सहित आत्मदाह करना पड़ेगा। क्योंकि उनमें अधिकतरों की उम्र 42 साल पार हो गई है। अधिकतर का रजिस्ट्रेशन 30-32 की उम्र में हुआ था। इसलिए भविष्य अंधकार में है और शासन-प्रशासन से न्याय पाने के लिए आज संघर्ष करना पड़ रहा हैं। अब या तो डिग्री आएगी या मौत को गले लगाएंगे।


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