राष्ट्र सदैव याद रखेगा कारगिल शहीदों की शहादत : कैप्टन अभिमन्यु
वित्त मंत्री बोले, भुलाया नहीं जा सकता शहीदों का अनुपम बलिदान




July 26, 2019, 8:36AM
मीडिया जंक्शन न्यूज
चंडीगढ़। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने जीवन का अनुपम बलिदान देने वाले वीर जवानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनकी शहादत को राष्ट्र सदैव याद रखेगा। भारत में बने युद्ध स्मारकों में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में बने युद्ध स्मारकों में भी भारतीय जवानों के नाम अंकित हैं।  वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु कारगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ पर कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के साथ जितने भी युद्ध हुए हैं, चाहे वह 1947,1962,1965 तथा 1971 का युद्ध हो, कारगिल युद्ध विषम भौगोलिक परिस्थितियों का युद्ध था। कारगिल युद्ध में दुश्मन देश ने द्विपक्षीय मामलों का उल्लंघन कर फरवरी, 1999 की सर्दियों में ही अपने सैनिकों को दुर्गम चोटियों पर तैनात कर दिया था। आमतौर पर सर्दियों में दोनों देशों के सैनिक एलओसी से छोड़कर पीछे हट जाते हैं और दुर्गम चोटियों का स्थान छोड़ देते हैं। मेजर मोंगचूंग की कमांड में अस्थायी कम्पनी की पैट्रोलिंग पार्टी ने पाकिस्तान की इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने समझौते का उल्लंघन किया है। कारगिल युद्ध 5 मई, 1999 से लेकर 21 जुलाई, 1999 तक लगभग 50 दिन चला और भारतीय सैनिकों ने सीमित हथियारों के साथ दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया और पूरा भारत सेना के साथ एकजुट खड़ा हुआ और पाकिस्तान को अपनी राष्ट्रभक्ति की मिसाल दिखाई। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि उनका सौभाग्य है कि वे एक ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं, जिनके छ: बेटों में से तीन बेटों ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि गत दिनों उन्हें कारगिल शहीदों की याद में लेह-लद्दाख में बनाए गए युद्ध स्मारक व संग्रहालय में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में कारगिल युद्ध से भारत सैनिकों से जुड़ी सामग्री रखी गई है। उन्होंने संग्रहालय में कैप्टन विजयंत थापर द्वारा अपने पिता को लिखे उस पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता से कहा है कि जब तक यह पत्र आपको प्राप्त होगा शायद मैं तब तक स्वर्ग में अप्सराओं के बीच होऊंगा। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि युवाओं को ऐसे युद्ध स्मारकों का दौरा अवश्य करना चाहिए ताकि उन्हें इस बात का आभास हो कि किन विपरीत परिस्थितियों में भारतीय सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सीना तानकर खड़े रहते हैं। क्योंकि जून माह में, जब उन्होंने इस संग्रहालय का दौरा किया तो वहां का तापमान माइनस 7 डिग्री सेल्सियस था।