हड़प्पा-मोहनजोदड़ो से भी 900 साल पुराना है हिसार के राखी गढ़ी का इतिहास
विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता का केंद्र बिंदु है हरियाणा
2 अगस्त 2019, 10:24 AM
मीडिया जंक्शन न्यूज
पंचकूला। यह पूरी तरह से साबित हो चुका है कि हरियाणा विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता का केंद्र बिंदु है। अब तक हड़प्पा-मोहनजोदड़ो की सभ्यता को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता माना जाता रहा है लेकिन हिसार की राखीगढ़ी में की गई खुदाई से ऐसे अवशेष मिले हंै जो सिंधु सभ्यता से भी 900 वर्ष पुराने हंै। यह कहना है हरियाणा के शिक्षा, पर्यटन एवं पुरात्तव मंत्री रामबिलास शर्मा का। उन्होंने बताया कि पुरात्तव विभाग छोटा होने के बावजूद इसका कार्य क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। वे यहां पुरात्तव विभाग हरियाणा द्वारा पंचकूला में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खंडहर कहे जाने वाले भवनों और स्थानों में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की अमूल्य धरोहर छिपी है और इस पर शोध करके इसे सार्वजनिक किया जाना जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि द्वारा सरस्वती नामक ऐतिहासिक और पवित्र नदी की खोज के लिये गंभीरतापूर्वक प्रयास किये जा रहे है और इसरो द्वारा इन तथ्यों को प्रामाणित किया जा चुका है कि यमुनानगर के आदबद्री से लेकर सिरसा तक, हनुमानगढ़ से लेकर जेसलमेर, गुजरात में कच्छ से लेकर प्रयाग संगम तक इस नदी के बहने का भौगोलिक इतिहास मौजूद है। हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में 20 नलकूपों के माध्यम से और राजस्थान में भाजपा सरकार के कार्यकाल में 40 नलकूलों के माध्यम से निकाले गये जल से सरस्वती नदी का भू तल में होना प्रमाणित हो चुका है। उन्होनें कहा कि भारत के प्राचीन इतिहास से प्रमाणित है कि भारत विश्वगुरु रहा हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से पुन: विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि इग्लैंड और कनाड़ा जैसे देशों में भारतीय मूल के नागरिकों ने अपना राजनैतिक बर्चस्व बनाया है और पूरा विश्व भारत की हैसियत को स्वीकार करने लगा है। पुरात्तव, कला एवं सांस्कृतिक विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती धीरा खंडेलवाल ने बताया कि पंचकूला में आयोजित इस पांच दिवसीय कार्यशाला में हरियाणाा के साथ साथ आसाम, तमिलनाडू, उतर प्रदेश, उतराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों के विद्यार्थी और प्रतिनिधि भाग ले रहे है। इस कार्यशाला में देश के विख्यात संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने पुरात्तव से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

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