हांसी में फैली गंदगी पर सीएम ने भी नहीं ली सुध तो इस नेता ने नगर परिषद अफसरों के खिलाफ कोर्ट में दायर कर दिया केस

7 अगस्त 2019, 4:28 PM
मीडिया जंक्शन न्यूज
हांसी। स्थानीय अधिकारियों, नेताओं और सीएम कार्यालय तक गुहार लगाने के बाद भी हांसी शहर की सफाई व्यवस्था व आवारा पशुओं की समस्या में सुधार नहीं आया तो हरियाणा टैक्स ट्रिब्यूनल के पूर्व न्यायिक सदस्य व कांग्रेस नेता हरपाल  बूरा हांसी नगर परिषद के अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए। हांसी एसडीएम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 133 के तहत नगर परिषद अफसरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। बुधवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरपाल बूरा ने बताया कि एसडीएम की अदालत ने परिषद के कार्यकारी अधिकारी कम सचिव तथा मुख्य सफाई निरीक्षक को 22 अगस्त के लिए सम्मन जारी किए हैं। सीआरपीसी व सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख फैसलों के प्रावधान के अनुसार एसडीएम की अदालत इन अधिकारियों को सशर्त आदेश (कंडीशनल ऑर्डर) जारी कर सकती है और तय समय में सफाई नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत मामला दर्ज हो सकता है जिसमें छह माह तक की सजा का प्रावधान है।
एसडीएम की अदालत में दायर किए गए केस में कांग्रेसी नेता हरपाल बूरा ने कहा है कि यह है कि देशभर में हर नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम का मुख्य दायित्व शहर की सफाई व्यवस्था होती है जिसके लिए इन बॉडी का हर कर्मचारी और अधिकारी जिम्मेदार है।

सांसद बृजेंद्र सिंह के समक्ष भी उठा चुके मांग
हरपाल बूरा ने अदालत से कहा कि हांसी नगर परिषद एक ऐतिहासिक बॉडी है जिसका गठन करीब 135 साल पहले 1884 में हुआ था और इसकी पूरे प्रदेश में एक अलग पहचान है लेकिन परिषद के उपरोक्त अधिकारी ने इन दिनों अपनी अकर्मण्यता की वजह से अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे हैं जिसके कारण हांसी शहरवासियों को पिछले काफी माह से गंदगी और आवारा पशुओं की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।  इन दो प्रमुख समस्याओं को आए दिन शहरवासी, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल प्रतिवादीगणों के सक्षम विभिन्न माध्यमों से उजागर करते रहे हैं। हाल ही में हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह के समक्ष भी यह मामला उठाया गया और उन्होंने भी इसके लिए इन्हीं प्रतिवादीगणों को जिम्मेदार ठहराया था।

हांसी की इन कालोनियों में है सर्वाधिक गंदगी
हरपाल बूरा ने बताया कि उनके द्वारा किए गए सर्वे में कृष्णा कॉलोनी, हनुमान कॉलोनी, प्रोफेसर कॉलोनी, प्रेम नगर, बड़सी गेट, उमरां गेट, जगदीश कॉलोनी, काठमंडी, दयाल सिंह कॉलोनी, बोगाराम कॉलोनी, हुडा सेक्टर, काली रोड, तिकोना पार्क, लाल सड़क, वकील कॉलोनी, उत्तम कॉलोनी, चार कुतुब रोड व अन्य काफी हिस्सों में यह समस्याएं सबसे ज्यादा मिली हैं। इसके अलावा अदालत अपने स्तर पर भी इसकी जांच करवा सकती है। उन्होंने न्यायालय से गुजारिश की है कि सीआरपीसी की धारा 133 के तहत उपरोक्त् अधिकारियों को कंडिशनल ऑर्डर जारी करें ताकि शहरवासी स्वच्छ हवा व वातावरण में जी सकें।

धारा 188 के तहत दर्ज हो सकता है मामला 
सीआरपीसी 133 के मामले में करीब 38 साल पुराने एक लैंडमार्क जजमेंट म्यूनिसिपल काउंसिल रतलाम खिलाफ वरधिचंद और अन्य में सर्वोच्च न्यायालय ने यह प्रावधान दिया है कि सकारात्मक कार्रवाई के लिए नगर पालिका के अधिकारियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 188 की सजा का डर दिखाते हुए समयबद्ध आदेश जारी कर सकती है। हरपाल बूरा ने कहा कि 22 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान वे अदालत से यही गुजारिश करेंगे कि नगर पालिका के अधिकारियों को समयबद्ध आदेश जारी कर शहर को साफ करवाएं और ऐसा न करने पर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत मामला दर्ज करवाएं।

 जानें क्या है धारा 188 में प्रावधान
भारतीय दंड संहिता की धारा 188 में उन सरकारी अधिकारियों के लिए सजा का प्रावधान है जो कानूनी प्रावधानों के तहत दिए गए आदेश को नहीं मानते। यानिकि जो भी अधिकारी अपनी ड्यूटी को सही से नहीं निभाता तो उसको इस प्रावधान के तहत