गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाल सकती कंपनी, जानें अपने अधिकार व आईपीसी की धाराएं


गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाल सकती  कंपनी, जानें अपने अधिकार व आईपीसी की धाराएं 


मीडिया जंक्शन न्यूज
नई दिल्ली। हमारे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीकतें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण हम अपने अधिकारों से महरूम रह जाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही अधिकारों की जानकारी दे रहे हैं जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे। ये अधिकार आगे चलकर जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकते हैं।


शाम के वक्त नहीं हो सकती महिला की गिरफ्तारी 
कोड आफ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो। अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है। इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है।


सिलेंडर फटने पर ले सकते हैं 40 लाख तक का बीमा कवर क्लेम 
पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है। आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रुपए तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है। अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है।

किसी भी होटल में पी सकते हैं फ्री पानी 
इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते हंै और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते हंै। हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते। अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है। आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं को नहीं निकाला जा सकता नौकरी से
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोजगार संघटना में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुमार्ना भरना पड़ सकता है।

आपकी शिकायत लिखने से इनकार नहीं कर सकती पुलिस 
आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता। अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम *(6)*महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है।


     जानिए आईपीसी की कुछ धाराओं के बारे में 


धारा 307* = हत्या की कोशिश
*धारा 302* = हत्या का दंड
*धारा 376* = बलात्कार
*धारा 395* = डकैती
*धारा 377* = अप्राकृतिक कृत्य
*धारा 396* = डकैती के दौरान हत्या
*धारा 120* = षडयंत्र रचना
*धारा 365* = अपहरण
*धारा 201* = सबूत मिटाना
*धारा 34*   = सामान आशय
*धारा 412* = छीनाझपटी
*धारा 378* = चोरी
*धारा 141* = विधिविरुद्ध जमाव
*धारा 191* = मिथ्यासाक्ष्य देना
*धारा 300* = हत्या करना
*धारा 309* = आत्महत्या की कोशिश
*धारा 310* = ठगी करना
*धारा 312* = गर्भपात करना
*धारा 351* = हमला करना
*धारा 354* = स्त्री लज्जाभंग
*धारा 362* = अपहरण
*धारा 415* = छल करना
*धारा 445* = गृहभेदंन
*धारा 494* = पति/पत्नी के जीवनकाल में पुन:विवाह
*धारा 499* = मानहानि
*धारा 511* = आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड


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