लानत है ऐसे प्राध्यापकों पर, सरकारी स्कूल को ही बना डाला प्यार व प्रपोज करने का अड्डा


लानत है ऐसे प्राध्यापकों पर, सरकारी स्कूल को ही बना डाला प्यार व प्रपोज करने का अड्डा

कोर्ट ने भी की है यह तल्ख टिप्पणी ‘काली भेड़ के समान हैं ऐसे प्राध्यापक,ये समाज को क्या पाठ पढ़ाएंगे, इन्हें स्कूल से बाहर फेंक देना चाहिए'

स्कूल में प्यार का स्वांग रचाने वाले दोनों ही हैं पहले से शादीशुदा 

मीडिया जंक्शन न्यूज
रोहतक। 'इस केस को देखकर मैं अपने जीवन का एक किस्सा बताना चाहूंगा। मेरे पिता बताते थे कि एक स्कूल में प्राध्यापक बीड़ी पी रहे थे, तभी वहां पर बच्चे आ गए। प्राध्यापक ने बीड़ी को अपने हाथ में मसल दिया। इससे प्राध्यापक का हाथ जल गया, लेकिन उन्होंने बच्चों को बीड़ी नहीं दिखने दी। गुरु ऐसे होते हैं, जो खुद जलकर बच्चों को बुराइयों से दूर रखते हैं, लेकिन आप जैसे प्राध्यापकों ने शिक्षण संस्थानों को प्यार का अड्डा बना दिया। शादी के लिए प्रपोज का इंस्टीट्यूट बना दिया। ऐसे शिक्षक समाज को क्या पाठ पढ़ाएंगे। वह काली भेड़ के समान हैं। इन्हें स्कूल से बाहर फेंक देना चाहिए।' यह तल्ख टिप्पणी रोहतक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल ने दुष्कर्म के आरोपित प्राध्यापक की अग्रिम जमानत पर सुनवाई करते हुए की है।  बता दें कि महम क्षेत्र के एक गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाली प्राध्यापिका ने 16 जुलाई को पुलिस को शिकायत दी कि उसके साथ पढ़ाने वाले गणित के प्राध्यापक ने उसे अपने प्रेमजाल में फंसा लिया और शादी का झांसा दिया। हालांकि प्राध्यापक और प्राध्यापिका पहले से ही शादीशुदा हैं। प्राध्यापक ने उसे अपनी मां से भी मिलाया था। इसके बाद उसने अपनी पत्नी से तलाक लेने के लिए कोर्ट में केस डाल दिया। प्राध्यापिका का आरोप है कि प्राध्यापक ने उस पर भी दबाव बनाकर तलाक का केस डलवा दिया। इसके बाद प्राध्यापक ने कभी गोहाना तो कभी झज्जर समेत कई अन्य होटल में ले जाकर उसके साथ दुराचार किया। आरोपित ने उसके अश्लील वीडियो और फोटो भी खींच लिए। इसके बाद उसे ब्लैकमेल करने लगा। प्राध्यापिका की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। आरोपित प्राध्यापक का करीब 15 साल का बेटा है और प्राध्यापिका के बच्चे भी करीब आठ-दस साल के हैं।

आरोपित प्राध्यापक ने लगाई थी अग्रिम जमानत
महिला प्राध्यापक की तरफ से मुकदमा दर्ज कराने के बाद आरोपित प्राध्यापक ने कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इस पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल की कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्राध्यापक के वकील ने सुबूत पेश किए और अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया। कोर्ट ने अग्रिम जमानत तो मंजूर कर ली, लेकिन स्कूल के अंदर इस तरह के मामले आने पर कड़ी टिप्पणी भी की। न्यायाधीश ने कहा कि जहां हम अपने बच्चों को सबसे अधिक सुरक्षित समझते हैं, वहां पर ऐसे काम हो रहे
हैं।

शिक्षा विभाग भी करेगा कार्रवाई 
कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि इस मामले के आर्डर की कॉपी शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को भी भेजी जाए, जिससे प्राध्यापक और प्राध्यापिका को लेकर सर्विस रूल के तहत भी कार्रवाई की जा सके।


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