हरियाणा : र्स्टाट-अप लागू करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बना वाईएमसीए


हरियाणा : र्स्टाट-अप लागू करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बना वाईएमसीए 

9 सितंबर 2019, 12:55 PM 
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
फरीदाबाद। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वाईएमसीए द्वारा विश्वविद्यालय में स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को विकसित करने और विद्यार्थियों के स्टार्ट-अपपरियोजनाओं को सहयोग देने उद्देश्य से विश्वविद्यालय की अपनी स्टार्ट-अप नीति जारी की है जो विश्वविद्यालय के मौजूदा तथा भूतपूर्व विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करेगी। इस प्रकार विश्वविद्यालय अपनी स्टार्ट-अप नीति लागू करने वाले वाला राज्य का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। जारी की गई स्टार्ट-अप नीति को राज्य सरकार दिशा-निदेर्शानुसार स्टार्ट-अप कोर्डिनेटर डॉ. संजीव गोयल तथा डॉ. रश्मि पोपली द्वारा कुलपति प्रो. दिनेश कुमार के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में स्टार्ट-अप नीति को जारी किया गया, जिसमें कुलसचिव डॉ. राज कुमार, सभी डीन एवं विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य उपस्थित थे।कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि नई नीति विद्यार्थियों को नवाचार की ओर प्रोत्साहित करेगी तथा उन्हें कैरियर के रूप में उद्यमिता का चयन करने में सहयोग देगी। कुलपति ने बताया कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के लिए 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय का भूतपूर्व छात्र के संघ ने सेंटर की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता का योगदान देने का आश्वासन दिया है। इनक्यूबेशन सेंटर विद्यार्थियों को उनके बिजनेस आइडिया को एक सफल स्टार्ट-अप के रूप में विकसित करने में सहायता प्रदान करेगा। स्टार्ट-अप नीति विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों और पूर्व विद्यार्थियों के लिए इंक्यूबेशन सुविधाओं को कवर करेगी। इंक्यूबेशन केन्द्र की सुविधाओं का विस्तार संकाय सदस्यों के लिए भी किया जा सकता है, जिसमें प्रत्येक मामले की उचित जांच होगी। विश्वविद्यालय द्वारा अकादमिक व औद्योगिक अंतराल को भरने के लिए विभिन्न समझौते किये है, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को औद्योगिक भ्रमण का अनुभव मिलेगा तथा वास्तविक समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी। प्रतिवर्ष अधिकतम पांच इंक्यूबेटिड स्टार्ट-अप कंपनियों को पेटेंट के लिए आवेदन दाखिल करने और अभियोजन के लिए एक लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की जायेगी। प्रतिपूर्ति तीन चरणों में अर्थात आवेदन दाखिला, अभियोजन और स्वीकृति पर प्रदान किया जायेगा। इस तरह का भुगतान डीन स्टूडेंट वेलफेयर के फंड से पेटेंट के आवेदन और प्रोसेसिंग के लिए फिट चार्ज के रूप में किया जाएगा। विश्वविद्यालय के 5वें सेमेस्टर के शुरूआत में विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से संबंधित व्यावहारिक समस्या को हल करना होगा, और इसे अकादमिक पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में हल करना होगा। ऐसे विद्यार्थी, जिन्होंने इस तरह की परियोजनाओं को पूरा कर लिया है और जो अपनी परियोजनाओं को उत्पादों या सेवाओं में बदलना चाहते हैं और स्टार्ट-अप स्थापित करना चाहते हैं, उन्हें एक लाख रुपये की सीमा तक विश्वविद्यालय के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। इस तरह का भुगतान डीन स्टूडेंट वेलफेयर के फंड्स से प्रोडक्ट या सर्विसेज में फाइनल ईयर प्रोजेक्ट कन्वर्जन के लिए फिट चार्ज के रूप में किया जाएगा।

विद्यार्थियों की हर टीम के लिए शुरु होगी पेटेंट ड्राफ्टिंग एक्सरसाइज
इच्छुक विश्वविद्यालय को परियोजना के लिए एक पेटेंट सर्च एवं एनालिसेस रिपोर्ट तैयार करनी होगी ताकि एक ही तरह की परियोजना की पुनरावृत्ति न हो। इसमें, विद्यार्थी को अपने प्रोजेक्ट से संबंधित कम से कम 5 पेटेंट का अध्ययन करने की आवश्यकता होती है। विद्यार्थियों की हर टीम के लिए पेटेंट ड्राफ्टिंग एक्सरसाइज की शुरूआत की जाएगी। सभी विद्यार्थियों को कार्यशालाओं और सेमिनारों के माध्यम से अनंतिम पेटेंट प्रारूपण, फाइलिंग प्रक्रिया, फीस और अन्य आवश्यक विवरणों के बारे में पढ़ाया जायेगा। विश्वविद्यालय अंतर-अनुशासनात्मक परियोजनाओं की भी अनुमति देगा और ऐसी टीमें इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन की एक से अधिक शाखाओं से विद्यार्थियों को शामिल कर सकती हैं। ऐसी परियोजना के लिए, संबंधित विभागों में से प्रत्येक से एक संकाय मार्गदर्शक होगा और परियोजना का समर्थन करने के लिए मार्गदर्शक एक साथ काम करेंगे। विद्यार्थी बाहरी इनक्यूबेटरों या कंपनियों के साथ सहयोग कर सकते हैं, बशर्ते ऐसी संस्थाएं विश्वविद्यालय द्वारा प्रमाणित की गई हो। इनक्यूबेटर या कंपनियों के मेंटर एक बाहरी परियोजना या थीसिस गाइड के रूप में कार्य कर सकते हैं। उन्हें परियोजना के बारे में पूरी जानकारी विश्वविद्यालय के साथ साझा करनी होगी। विश्वविद्यालय विद्यार्थी को पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता की अनुमति देता है। इसके लिए उसे पार्ट-टाइम या छुट्टियों के दौरान काम करना होगा ताकि उनका पाठ्यक्रम प्रभावित न हो।

संकाय अपग्रेडेशन की विशेष योजना भी शुुर 
इसके साथ ही विवि में संकाय अपग्रेडेशन की एक विशेष योजना शुरू की गई है। इसके तहत विश्वविद्यालय संकाय के लिए एक पायलट योजना शुरू की जाएगी, जिसके अंतर्गत संकाय सदस्य निर्दिष्ट समय के लिए विद्यार्थियों के साथ उद्यमिता के लिए काम करने के लिए जाना चाहते है और यदि उद्यम विफल होता है तो उन्हें वापसी की अनुमति दी जायेगी।
विश्वविद्यालय अपने उद्यमी-इन-रेसिडेंस (ईईआरआर) के तहत पूर्व विद्यार्थियों (स्नातक के 3 वर्षों के भीतर) को स्टार्ट-अप की सुविधा देगा। ईआईआर और ईआईआर की संख्या के आधार पर प्रत्येक परियोजना की गहन समीक्षा के बाद विश्वविद्यालय द्वारा उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। अनुसंधान सहायक के रूप में 10,000 रुपये का मासिक वजीफा 11 महीने तक की अवधि के लिए दिया जा सकता है। चयनित उम्मीदवार को विश्वविद्यालय से दिन-प्रतिदिन के आधार पर कार्य करना होगा और विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न स्टार्ट-अप से संबंधित कार्यक्रमों को मेंटर करना होगा। यदि ईआईआर का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विश्वविद्यालय किसी भी दिन अनुसंधान सहायता को समाप्त कर सकता है। इस तरह का भुगतान एलुमनी फंड से ईआईआर स्टाइपेंड के लिए एक फिट चार्ज के रूप में किया जाएगा। पूर्व विद्यार्थी (स्नातक के 3 वर्षों के भीतर) के स्टार्ट-अप जिनका प्रदर्शन अद्वितीय रहा हो और जिसका विश्वविद्यालय इनक्यूबेटर के साथ प्रारंभिक चरण में संबंध रहा हो, को उनकी उपलब्धियों के लिए उपयुक्त मान्यता, प्रशस्ति पत्र या पुरस्कार दिया जाएगा। विश्वविद्यालय नियमित रूप से स्टार्ट-अप से संबंधित राष्ट्रीय स्तर के संवादों, कार्यशालाओं और सम्मेलनों की मेजबानी करेगा, जो अपनी प्रगति का मूल्यांकन करेंगे और राष्ट्रीय नीति निमार्ताओं को भविष्य में संबद्ध कॉलेजों में नवाचार और विद्यार्थी स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए भावी नीतियों और रणनीतियों को आकार देने के लिए प्रभावित करेंगे। 

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