सावधान ! कहीं महंगी न पड़ जाए आतिशबाजी, पटाखे चलाएं लेकिन संभलकर

सावधान ! कहीं महंगी न पड़ जाए आतिशबाजी, पटाखे चलाएं लेकिन संभलकर 

27 अक्तूबर 2019, 5: 37 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
हिसार। दीपों के पर्व दीपावली पर आज हर तरफ खुशियों का माहौल है। रोशनी का यह त्योहार पटाखों के धमाके और सतरंगी आतिशबाजी के बिना फीका माना जाता है, लेकिन अनदेखी और इनमें होने वाला हानिकारक रसायनों का प्रयोग आपकी मस्ती को मुसीबत में बदल सकता है। आप भी चाहते हैं कि आपकी खुशियां बरकरार रहें तो आतिशबाजी संभल कर करें क्योंकि जिंदगी अनमोल है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। दिवाली के उल्लास और उमंग पर पटाखों के हानिकारक रसायन और धुएं बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में पटाखे चलाते समय पूरी सावधानी बरतें।

पटाखों से अटे बाजार 
अत्याधुनिक पटाकों से बाजार अटा पड़ा है। बच्चे और नौजवान आज रात पटाकों से धूम-धड़ाका करेंगे। बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है। हो भी क्यों न, साल में एक बार सभी को रोशन करने वाला पर्व जो है दीपावली। खरीदारी के लिए पटाका बाजार में भारी भीड़ उमड़ी। कोई रंग-बिरंगी फुलझडिय़ों की खरीदारी में मस्त दिखा तो किसी ने एटम बम में दिलचस्पी दिखाई।

आतिशबाजी के समय सजग रहें 
पटाके देखने में भले ही आकर्षक लगें लेकिन इनकी तेज आवाज व इनमें मिले बारूद व अन्य रसायनों से आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में पटाकों को खरीदते समय पटाकों का चयन करने में सावधानी बरतें। उन्हें जलाते समय भी काफी सजग रहना होगा क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। सर्वाधिक परेशानी दमा व हृदय रोगियों को उठानी पड़ सकती है।

बच्चों का रखें विशेष ध्यान 
पटाखे से निकलने वाला धुआं परेशानी का सबब बन सकता है। बच्चों के साथ विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। कोशिश करें कि पटाखा जलाते समय बच्चों के साथ बड़े मौजूद रहें। चिकित्सक भी पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, जिससे कि प्रकाश पर्व पर आपके आंगन में खुशियां बरकरार रहें।

हो सकती हैं ये समस्याएं
पटाखों का असुरक्षित उपयोग से आपको जीवन भर का दर्द भी मिल सकता है। इसलिए आतिशबाजी के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। दीपावली के दौरान अस्पतालों में आंख, त्वचा, कान, मस्तिष्क, ह्वदय एवं श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याओं के मरीजों में यकायक इजाफा हो जाता है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य तौर पर कान 85 डेसीबल तक ही ध्वनि सहन कर सकते है। इससे अधिक आवाज वाले धमाके कान के पर्दे तक फाड़ सकते हैं। इसके अलावा लगातार धमाकों की आवाज से श्रवण शक्ति भी कमजोर हो सकती है। इसलिए आतिशबाजी दूर से करें और छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें।

पटाखों में छिपे होते हैं हानिकारक रसायन
रॉकेट : आसमान में जाकर फूटने वाले पटाखे जैसे रॉकेट, स्काय शॉट आदि में चारकोल, पोटेशियम नाइटे्रट के अलावा सल्फर व एल्यूमिनियम के मिश्रण से तैयार किए जाते है।

बम :  तेज आवाज वाले बम बनाने में बेहद विषैले तत्वों का प्रयोग किया जाता है। इनमें भी चारकोल, पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर आदि शामिल होते है।

फुलझड़ी : चकाचौंथ करने वाली व रंगीन रोशनी छोडऩे वाले पटाखे जैसे अनार, फुलझड़ी व चकरी आदि बेरियम नाइट्रेट, एल्यूमिनियम, सल्फर व चारकोल से तैयार किए जाते है।



पटाखा चलाते समय यह बरतें सावधानी
-पटाखे खुले मैदान में ही चलाएं
-पटाखे चलाते समय सूती व चुस्त कपड़े पहने
-बड़ों की देखरेख में ही बच्चों को पटाखे चलाने दें
-पटाखे छोडऩे वाले स्थान पर मिट्टी व पानी की भरी बाल्टी रखें
-बहती हवा के विपरीत दिशा मेें पटाखे चलाएं, इससे धुआं से बचा जा सकता है।
-प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स में डिटॉल, बरनॉल, गॉज पट्टी, रूई, कैंची, पेन किलर टेबलेट आदि जरूर रखें।


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