अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय : माता तारा देवी की अमर कथा जिन्होंने जीवित ही ले ली थी समाधी

अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय : माता तारा देवी की अमर कथा जिन्होंने जीवित ही ले ली थी समाधी 


पढें जमाने के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी माता तारा देवी की 200 साल पहले की कहानी 
सोनी समाज में कुलदेवी के रूप में विख्यात ह माता तारा देवी

16 अक्तूबर 2019, 4:15
हरियाणा मीडिया जंक्शन। गौरव सोनी 
भारतवर्ष की पावन धरा पर ऋषि-मुनी, पीर-पैगम्बर अवतार धारण करते आए हैं। यह पवित्र धरा कभी सूफी-संतों से खाली नहीं रही। इन महान संतों, शख्सिहत व समाज सुधारकों ने समय-समय पर अपने-अपने तरीके से समाज को सही दिशा दी। ऐसे ही राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की तहसील नोहर के नजदीक गांव भुक्करकां में आज से करीब 200 साल पहले माता तारा देवी ने अवतार रूप में ऐसे-ऐेसे करिश्मे कर दिखाए जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। जीवित समाधी लेकर अमरत्व प्राप्त करने वाली माता तारा देवी आज सोनी समाज में कुलदेवी के रूप में विख्यात हंै। माता तारा देवी का जीवन दानवीरता व उदारता के अनेक ऐसे किस्सों से भरा है जो न केवल जमाने के लिए पे्ररणास्त्रोत हैं बल्कि समाज को नई दिशा देने में भी मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। आज हम आपको माता तारा देवी की अमर कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने जीवित ही समाधी ले ली थी। विस्तार से बता रहे हैं हरियाणा मीडिया जंक्शन के उत्तर भारत के मुख्य संवाददाता गौरव सोनी। 

बात उन दिनों की है जब भारतवर्ष में अकाल ने अनेक जिंदगियों को लील लिया था। राजस्थान में अकाल का प्रभाव कुछ ज्यादा था। मान्यता है कि इसी दौरान हनुमानगढ़ इलाके में एक बारात आई जो माता तारा देवी के गांव भुक्करकां से होते हुए आगे किसी गांव में गई थी। बता दें कि उस वक्त अधिकतर बाराती पैदल ही सफर करते थे। जब दो-तीन दिन बाद वह बारात वापिस लौटी तो अंधेरा हो चुका था। बारातियों ने ग्रमीणों से गांव में रूकने के लिए स्थान मांगा। ग्रामीण उस वक्त हैरान रह गए जब  उन्हें मालूम पड़ा कि बारात बिन दुल्हन ही वापिस लौट आई है। ग्रामीणों के पूछने पर बारातियों ने बताया कि झगड़ा होने की वजह से लड़की वालों ने शादी करने से इंकार दिया। इस पर गांव के मौजिज लोगों ने गांव के ही बागड़ी सुनार के सहदेवड़ा गौत्र से बातचीत की। उन्होंने कहा कि आप अपनी बेटी तारा देवी जो कि भोली व दानी (भोलेपन में)थी की शादी इसी दुल्हे से कर दें ताकि उनका भी समाज में मान-सम्मान बना रहे। ग्रामीणों के कहने पर दादी तारा देवी पंजाबी सोत्रीय सुनार के जोड़ा गोत्र के उसी दुल्हे के साथ विवाह बंधन में बंध गई जो कि दूसरे गांव से बगैर दुल्हन लौट रहा था।
विवाह के बाद माता तारा ने सात बेटों को जन्म दिया जिनमें सबसे बड़ा पुत्र अमी तो दूसरे नंबर पर अमरीका थे। तीसरे नंबर पर गोरु, चौथे पर अमरा, पांचवें नंबर पर रामू, छठे पर बूड़ा तो अंत में सातवें नंबर पर हरुआ ने जन्म लिया। एक बार फिर ऐसा वक्त आया कि अकाल से आवाम त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगी। इस अकाल से माता तारा देवी के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया कि वे हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गई। माता तारा देवी के सातों बेटे मेहनत कर जीवन यापन करने लगे। वे अपनी मेहनत की सारी कमाई माता तारा देवी को सौंप देते। और माता तारा देवी उन सारे रूपयों आदि को जरूरतमंदों को दान कर दिया करती। माता तारा देवी द्वारा सारी कमाई दान कर देने से दो बेटे तो इतने ज्यादा तंग आ चुके थे कि उन्होंने एक दिन माँ से सवाल कर ही डाला, कि हम इतनी मेहनत से कमा कर लाते हैं और आप सब कुछ दान कर देती हो। इन्हीं दो बेटों ने माता तारा देवी को हमेशा के लिए मौत की नींद सुलाने का प्लान तैयार कर लिया। प्लान के मुताबिक इन्हीं दोनों बेटों ने माता तारा देवी की हत्या करने के लिए दो ओर व्यक्तियों को तैयार किया व माता तारा देवी को पिहर(मायके)जाने के लिए लेकर चल पड़े। बीच रास्ते एक पेड़ की छांव के नीचे माता तारा देवी को बैठने को कहकर दोनों बेटे थोड़ी देर में वापिस आने की कहकर चल पड़े। माता तारा देवी की हत्या करने के इरादे से आए दोनों व्यक्ति जब माता तारा देवी की तरफ बढ़ने लगे तो माता तारा देवी ने उनसे साथ आने का कारण पूछा। दोनों व्यक्तियों ने बताया कि हम तो आपके बेटों के बुलावे पर आपकी हत्या करने के इरादे से आए हैं। हत्या के इरादे से आए व्यक्तियों ने उन दोनों बेटों के नाम भी माता तारा देवी को बता दिए जिनके कहने पर वे आए थे। माता तारा देवी ने संकट की इस घड़ी में बाबा खेत्रपाल को याद किया। बाबा खेत्रपाल प्रकट हुए व माता तारा देवी को वचन किए कि आप चिंंता मत करें, ये आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। अचानक ऐसा चमत्कार हुआ कि माता तारा देवी को मारने आए व्यक्ति दोनों व्यक्तियों की आंखों के सामने अंधकार छा गया। दोनों को दिखाई देना बंद हो चुका था। वे माता के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगे और बोले, माता हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई, कृप्या हमें माफ कर दो, हमारी आंखें चली गई हैं, हमें दिखाई देना बंद हो गया है। चारों तरफ अंधकार के सिवाय हमें कुछ नजर नहीं आ रहा। वे बार-बार माता तारा देवी से माफ करने की गुहार लगा रहे थे। इस पर माता तारा देवी ने उन्हें कहा कि, ‘ठीक है ! तुम यहीं से वापिस लौट जाओ और पीछे की तरफ मुड़कर बिल्कुल भी मत देखना, तुम्हारी आंखें ठीक हो जाएंगी। अगर तुमने एक बार भी पीछे मुड़कर देख लिया तो जीवनभर तुम्हारी आंखों की रोशनी नहीं लौटेगी।’ माता का आदेश पाकर दोनों व्यक्ति वापिस लौट गए।अब उन्हें आंखों से दिखाई देने लगा था। अब माता तारादेवी भी वापिस अपने पीहर (मायका)गांव भुक्करकां स्थित डेरा लौट आई जो आज बाबा कलाईनाथ के डेरे के नाम से विख्यात है। माता तारा देवी खेत्रपाल के मंदिर के पास जाकर बैठ गई। बाबा खेत्रपाल ने कहा कि बेटी, आपकी तपसया से मैं बहुत प्रसन्न हूं, अगर आप चाहो तो अपने वंश के बच्चों के झंडूल यहां उतरवा सकते हो। थोड़ी देर में माता तारा देवी को लेने उनका ज्येष्ठ पुत्र अमी आया और माता तारा देवी को घर लौटने के लिए विनती की। अब माता तारा देवी ने अपने दो पुत्रों अमी व गोरु को गांव भुक्करकां में बाबा खेत्रपाल के मंदिर में बच्चों की झंडूल उतरवाने के वचन किए और साथ जाने से मना करते हुए आशीर्वाद दिया कि, ‘बेटा तुम चल जाओ, तुम्हारी कुल इतनी ज्यादा बढ़ेगी कि एक टाईम के खाने में सवा मन नमक लगा करेगा। ’ माता तारा देवी की आज्ञा लेकर ज्येष्ठ बेटा अमी वापिस लौट गया। अब माता तारा देवी ने मौजूदा गद्दीनशीन बाबा जी से तपस्या करने की इच्छा जाहिर करते हुए डेरे में स्थान मांगा तो बाबा जी ने कहा कि, डेरा इतना विशाल है कि आप कहीं भी तपस्या कर लें। माता तारा देवी ने अपने पीहर (मायके) गांव भुक्करकां में तपस्या की व ठीक उसी स्थान पर जीवित समाधी ले ली जहां आज माता तारा देवी का विशाल मंदिर है। आज के समय में तपस्वी बाबा कलाई नाथ मंदिर के पीछे माता तारा देवी का मंदिर व साथ में बाबा खेत्रपाल का मंदिर स्थित है।


जब माता तारा देवी ने सपने में दर्शन देकर किए जागरण के वचन 
अब आपको बताते हैं माता तारा देवी के जागरण के बारे में। माता तारा देवी के जागरण साल 2014 में उस वक्त शुुरु हुए जब उन्होंने हनुमानगढ़ जंक्शन निवासी सुभाष पुत्र हंसराज के सपने में दर्शन देकर जागरण करवाने के वचन किए।  माता तारा देवी ने सुभाष को सपने में दर्शन देकर कहा कि , ' यह धरती सोई पड़ी है, अगर जोड़ा गोत्र यहां जागरण करवाए तो इस धरती के भाग जाग जाएंगे।’ इस प्रकार हनुमानगढ़ जंक्शन निवासी सुभाष पुत्र हंसराज जोड़ा व अन्य सुनार बिरादरी के लोगों ने वर्ष 2014 में माता तारा देवी का पहला विशाल जागरण करवाया। इसके कुछ समय बाद सिरसा के गांव कोटली निवासी भीमसैन जोड़ा पुत्र मोहन लाल जोड़ा ने माता तारा देवी के मंदिर में पहला रात्रिजगा का आयोजन करवाया।


प्रस्तुति : गौरव सोनी, 9541056008

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