
स्वस्थ रहना है तो खान-पान को लेकर बदलनी होंगी यह आदतें, जानें क्या है यह फिटनेस मंत्र
18 नवंबर 2919, 11: 01 PM
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
फतेहाबाद। आज हम आधुनिक व पाश्चात्य जीवनशैली के आकर्षण में पुरानी शुद्ध परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। मोबाइल व टीवी की वजह से व्यक्ति का बाहर आना जाना तथा शारीरिक व्यायाम कम हो गया है जिसके कारण लाईफ स्टाईल डिसॉर्डर, ब्लड प्रैशर, मधुमेह मोटापा व हृदय रोग को स्वयं आमंत्रण दे रहे हैं। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि मोबाईल फोन पर टायलेट सीट से भी अधिक बैक्टीरिया होते हंै तथा बच्चे खाते हुए मोबाईल का प्रयोग साथ-साथ करते हंै। सिविल सर्जन डॉ मुनीष बंसल आज यहां नागरिक अस्पताल के आयुष विंग में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत आयुष विभाग द्वारा आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय नैचुरोपैथी (प्राकृतिक चिकित्सा) दिवस के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंनें कहा कि बच्चे बड़ों का अनुसरण करते है इसलिए बड़ों को भी अपनी आदतों को सुधारना होगा व बच्चों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। कार्यक्रम में डॉ हरीश यादव मुख्य वक्ता व प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ के तौर पर उपस्थित हुए। मुख्य अतिथि सिविल सर्जन डॉ मनीष बंसल ने आयुष विभाग के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आहार की आदतों में बदलाव लाकर स्वस्थ रहने के लिए इस सेमिनार व प्रदर्शनी का उदद्ेश्य बहुत सार्थक है। इस अवसर पर प्रतिदिन उपयोग में लाए जाने वाले आहार, फलों, मसालों के गुण बताते हुए तथा औषधीय पौधों की प्रदर्शनी तथा डॉ हरीश यादव द्वारा रोगियों की मिट्टी के लेप द्वारा चिकित्सा का प्रदर्शन बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने रहे। कार्यक्रम में डॉ बलवान सिंह, योग विशेषज्ञा अंबिका पांटा, डॉ शिक्षा कुमारी, डॉ दिनेश कुमार, डॉ राजेश कुमार, डॉ संजय पाल, डॉ विश्वजीत, डॉ अजीत कुमार, डॉ मुकेश कुमार, डॉ हरीश चन्द्र, डॉ नेहा बिदानी, डॉ कल्पना जोशी, डॉ शकुन्तला, डॉ भारती चौहान, डॉ रितु भाटिया, डॉ जसविन्द्र सिंह, डॉ मीना कुमारी, संदीप, रमेश कुमार, मनीषा, सीमा, सोनिया, देनेश, राजाराम, पंकज, दिलबाग, सुरेन्द्र, ललित, ममता, पंकज आदि मौजूद रहे।
सूर्यास्त से पहले ही कर लें रात्री भोज
कार्यक्रम संयोजक जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ धर्मपाल पूनिया ने बताया कि तीन मुख्य चिकित्सा पद्धतियों आर्युेद, एलोपैथी व हौम्योपैथी के अतिरिक्त वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में योग व प्राकृतिक चिकित्सा आयुष विभाग के माध्यम से लोगों को निरोग रहने में मदद कर रही है। उन्होंने आजकल सुबह बच्चों के बहुत जल्दी स्कूल जाने के कारण शौचादि की क्रिया ठीक से न होने व स्कूल में भी मूत्र के वेग को रोके रखने से होने वाली बीमारियों पर चिन्ता व्यक्त की। डॉ हरीश यादव ने अपने वक्तव्य में प्राकृतिक चिकित्सा के इतिहास को विस्तार से बताया। आहार ही औषधि विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि यदि भोजन शुद्ध होगा तो शरीर शुद्ध होगा और शरीर शुद्ध होगा तो बुद्धि शुद्ध होगी। उन्होंने मिट्टी के अन्दर भरपूर उर्जा शक्ति होने की बात कहते हुए आजकल मिट्टी से सबका नाता टूटने को चिंता का विषय बताया। साफ मिट्टी के लेप व संपर्क से रोग दूर होने व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उन्होनें नाश्तें में अंकुरित दालें, दोपहर को मोटे अनाज से बनी रोटी व सूर्यास्त से पहले ही भोजन करने पर बल दिया।
आयुर्वेद में यह है आहार की उपयोगिता
आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश कुमार ने आयुर्वेद में वर्णित आहार की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। आयुर्वेद में वर्णन किए तीन मुख्य आधार स्तंभों आहार, निद्रा तथा ब्रहम्चर्य में आहार को सबसे पहले स्थान पर रखा गया है। आहार से ही हमारे शरीर में रस का निर्माण होता है तथा उसके बाद क्रमश: रक्त, मांस, मेंद, अस्थि, मज्जा, शुक तथा ओज का निर्माण होता है। इसलिए भोजन को सोच समझकर ग्रहण करना चाहिए।

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