बागवानी किसानों के लिए सरकार ने शुरु की है यह योजना, जानें कैसे आमदनी बढ़ा सकते हैं किसान

बागवानी किसानों के लिए सरकार ने शुरु की है यह योजना, जानें कैसे आमदनी बढ़ा सकते हैं किसान


फतेहाबाद। भावांतर भरपाई योजना के तहत गांव दहमन में आयोजित किसान जागरूकता शिविर को संबोधित करते जिला उद्यान विभाग के अधिकारी।

 18 नवंबर 2019, 10: 48 PM
 हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
फतेहाबाद। बागवानी किसानों के जोखिम को कम करने के लिये सरकार द्वारा भावांतर भरपाई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत बाग व सब्जियों की दस फसलों जैसे टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, मटर, अमरूद व किन्नु को लिया गया है। इस योजना को लागू करने का मुख्य उद्देश्य किसानों को मंडी में उपरोक्त सब्जियों का कम दाम मिलने पर उन्हे एक संरक्षित मूल्य प्रदान करके उनके जोखिम को कम करना है ताकि किसान कृषि में विविधि करण को अपनाकर बागवानी फसलों से अपनी आय में वृद्धि कर सके। आज यहां भूना खंड के गांव दहमन में स्कीम के तहत किसान जागरूकता कैम्प का आयोजन किया गया। कैम्प में जिला उद्यान अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह ने बताया कि इस स्कीम के तहत पंजीकरण करवाने के लिए किसान मार्किट कमेटी के कार्यालय, बागवानी विभाग के कार्यालय व गांव में स्थापित केंद्र के माध्यम से अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। बागवानी विभाग द्वारा स्कीम के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए जनवरी माह तक 6 जागरूकता कैम्पों का आयोजन किया जाना है। इस स्कीम के अंतर्गत आलू, प्याज, टमाटर व फूलगोभी के लिए औसत उत्पादन 120, 100, 140, 100 क्विंटल प्रति एकड़ व संरक्षित मूल्य क्रमश: 500, 600, 500, 600 प्रति क्विंटल निर्धारित किए गए है। यदि किसान को उपरोक्त संरक्षित मूल्य से कम दाम मिलते हैं तो उसकी भरपाई सरकार द्वारा की जायेगी। डीएचओ ने बताया कि योजना की मुख्य विशेषता यह है कि किसान को उपरोक्त संरक्षित मूल्य के हिसाब से यदि उसका उत्पादन उपरोक्त औसत उत्पादन के बराबर होता है तो उसे 60000 से 70000 रुपये तक प्रति एकड़ आमदनी सुनिश्चित हो जाएगी। किसान को इसके लिए फसलों की बुआई अनुसार अपना निशुल्क पंजीकरण डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट एचएसएएमबी डॉट जीओवी डॉट आईएन पर मार्किटिंग बोर्ड/ बागवानी विभाग/कृषि विभाग/सरल केंद्र पर जाकर बीबीवाई पोर्टल के माध्यम से करवाना होगा तथा इसके लिए किसान को आधार कार्ड, ड्राईविंग लाईसैंस या वोटर कार्ड , पासपोर्ट साईज फोटो व बैंक खाता संख्या का पूर्ण ब्यौरा इत्यादि दस्तावेज उपलब्ध करवाने होंगे। पंजीकृत किसानों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा। इस स्कीम का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार या किराये पर काश्त करने वाले किसान ले सकेंगे। बागवानी विभाग द्वारा पंजीकृत किसानों का एक निश्चित समय अवधि में क्षेत्र का सत्यापन किया जाएगा तथा यदि किसान इस संबंध में किसी भी स्तर पर असंतुष्ट होते हैं तो वो इस संबंध में जिला बागवानी अधिकारी को अपील दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे। किसान द्वारा अपनी फसल की बिक्री जे फार्म के माध्यम से करनी अनिवार्य होगी तथा इस प्रकार यदि बिक्री की अवधि के दौरान किसान को संरक्षित मूल्य से कम भाव मिलता है तो भाव के अन्तर की भरपाई निश्चित समय अवधि पश्चात 15 दिन के अन्दर-अन्दर आधार लिंक बैंक खाते में कर दी जाएगी।

इस तकनीक से 70 फीसद तक पानी बचा सकते हैं किसान
बागवानी अधिकारियों ने किसानों से आह्वान किया है कि वे अपना जोखिम कम करने के लिए अपना पंजीकरण करवाएं व सरकार द्वारा चलाई जा रही इस अनूठी स्कीम का लाभ उठाएं। किसान अधिक जानकारी के लिए बागवानी विभाग के ब्लॉक व जिला स्तर के कार्यालय तथा मार्किट कमेटी कार्यालय से किसी भी कार्य दिवस में संपर्क कर सकते हैं। इस अवसर पर उद्यान विकास अधिकारी अमरजीत सिंह ने किसानों को विभागीय स्कीमों की जानकारी विस्तार से दी और बताया कि किसान परम्परागत खेती को छोडकर नई तकनीक से खेती करना सीखें। बागवानी फसलों में टपका सिंचाई प्रणाली अपनाकर पानी की बचत 70 प्रतिशत तक होती है और फसल की उच्च स्तर की गुणवता होती है, जिसके कारण किसान को बाजार भाव भी ज्यादा मिलता है। जिला परियोजना समंवयक लक्ष्मी ने किसानों को एफपीओ कैसे बनाए जाए, इसके बारे में विस्तार से बताया और कहा कि विभाग द्वारा 70 से 90 प्रतिशत तक अनुदान राशि एफपीओ के तहत दी जा रही है।



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