स्कूलों में बच्चों का शोषण हो तो एफआईआर जरूर दर्ज करवाएं शिक्षा विभाग के अधिकारी

स्कूलों में बच्चों का शोषण हो तो एफआईआर जरूर दर्ज करवाएं शिक्षा विभाग के अधिकारी



  14 दिसंबर 2019, 3:19 PM 
  गौरव सोनी। हरियाणा मीडिया जंक्शन
 सिरसा। बच्चों को शोषण से बचाने के लिए सभी   विभागों के अधिकारी मिल-जुलकर काम करें। यह  निर्देश उपायुक्त अशोक कुमार ने जिला बाल संरक्षण ईकाई की बैठक के दौरान दिए। उपायुक्त ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अनुसार यदि किसी भी बच्चे के साथ शोषण की घटना होती है तो उसकी जानकारी पुरी तरह गुप्त रखें। उन्होंने निर्देश दिए कि जो बच्चे गोद दिए जाते हैं, उनका पूरा रिकार्ड रखें तथा पूरी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही बच्चों को गोद दिया जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए जब भी कोई बच्चा मिसिंग होता तो फास्टट्रेक माध्यम से कार्रवाई करें, क्योंकि बच्चें के साथ कोई भी दूर्घटना हो सकती है। जे.जे. अधिनियम के अंतर्गत किशोर की सोशल बेकग्राउंड रिपोर्ट फार्म नम्बर 1 के अनुसार अवश्य दर्ज करें। डीसी ने कहा कि पीड़ित बच्चे का मेडिकल एग्जामिनेशन जल्द से जल्द करवाएं ताकि बच्चे व उसके परिवार को किसी प्रकार की परेशानी न हो। डीसी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि स्कूलों में बच्चों का शोषण होता है तो उसकी जांच के लिए कमेटी गठित करें और पुलिस विभाग में भी एफआईआर दर्ज करवाएं ताकि बच्चे की पढ़ाई व उसके जीवन पर दुष्प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि स्पोंसरशिप स्कीम के तहत बच्चों को 2 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी की 75 प्रतिशत हाजिरी जरुरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों की हाजिरी समय पर डीसीपीओ कार्यालय में जमा करवाएं ताकि योजना का लाभ समय पर दिया जा सके। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. दर्शना सिंह ने उपायुुक्त एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों का स्वागत किया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी डा. गुरप्रीत कौर ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, दत्तक व स्पॉसरशिप योजना के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। बैठक में लीगल प्रोबेशन आॅफिसर डा. मोनिका चौधरी ने पोक्सो एक्ट के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी ताकि बच्चों के साथ हो रही शोषण की घटनाओं पर रोक लगाई जा रखे।

गुमशुदा बच्चा मिले तो डायल करें 1098
डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए कि वे बाल देखभाल गृह में रह रहे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर अवश्य करवाते रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अगर कोई गुमशुदा बच्चा मिलता है तो उसकी रिपोर्ट नजदीकी पुलिस स्टेशन, 1098 अथवा संबंधित बाल संरक्षण अधिकारी को सूचित करें ताकि बच्चे को जल्द से जल्द उसके अभिभावकों से मिलवाया जा सके।

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