खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी...


     खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी...


अंग्रेजों से लोहा लेते हुए 18 जून 1858 को आज ही के दिन दिया था बलिदान 
हिसार में अनेक सामाजिक संगठनों ने महारानी लक्ष्मी बाई को किया नमन्
 
मीडिया जंक्शन/Hisar Media Junction
हिसार।
महारानी लक्ष्मी बाई झांसी के  द्वारा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए 18 जून 1958 को बलिदान दिया। उनकी याद में भारत भर में उनकी जयंती एवं पुण्यतिथि मनाई जाती है। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहर में स्थित लक्ष्मी बाई चौक पर महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा पर शहर के आम जन से लेकर छात्र-छात्राओं युवा महिलाओं ने प्रतिमा स्थल पर आकर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि दे नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित कर प्रणामजली एवं श्रद्धांजलि दी। इस प्रतिमा का निर्माण 2002 में डा. विजय प्रभा उध्यक्ष  अशोक शर्मा सचिव वीर वीरांगना समिति व निहाल सिंह सैनी संस्थापक शहीद सम्मान,प्रतिमा निर्माण,संरक्षण समिति हिसार द्वारा किया गया था। इस आयोजन में भारत विकास परिषद् विवेकानन्द शाखा के सदस्य सुरेन्द्र लाहोरिया,सुरेंद्र कुच्छल, श्रृषीराज,नीरज जिन्दल,शक्ति अग्रवाल,आशोक गर्ग एवं शहिद चन्द्रशेखर आजाद शाखा से जगतराम लोहान,कुलदीप आजाद,रामनिवास आध्यापक सहपरिवार ,पवन वत्स,राज कंवर,प्रिंसिपल गणेश दत्त शर्मा ,धीरज शर्मा । श्री परशुराम सेवा समिति के संयोजक श्योगेंद्र शर्मा थे।दायित्व फाउंडेशन रजिस्टर हिसार की कार्यकारिणी सदस्यों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रमुख हैं जगतराम लोहान,नगेंद्र सैनी,नवीन लोहान,दलबीर सिंह वर्मा,विकास वर्मा एवं सुषमा वर्मा ,संदीप सैनी,राम भगत पंघाल के साथ आमजन शामिल है। स्मरण रहे कि दायित्व फाउंडेशन प्रत्येक वर्ष शहर में स्थित 32 प्रतिमाओं एवं स्थलो पर उनकी जयन्तीयां एवं पुण्यतिथि पर आयोजन कर शहरवासियों के साथ मनाते हैं।

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