कैसी हो नई शिक्षा नीति, आप भी जरुर दीजिएगा राय


कैसी हो नई शिक्षा नीति, आप भी जरुर दीजिएगा राय

नई शिक्षा नीति से ही बदलेगी हिन्दुस्तान की तस्वीर 
एडीसी एएस मान की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति-2019 के ड्राफ्ट पर चर्चा शिक्षा विभाग व निजी स्कूलों की बैठक में मंथन


हिसार। भारत में जल्द लागू होने वाली नई शिक्षा नीति देश में शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य को पूरी तरह से बदलकर रख देगी। केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति-2019 के ड्राफ्ट के माध्यम से ऐसा प्रारूप प्रस्तुत किया गया है जिससे भारत चीन की तर्ज पर तेज गति से विकास की ओर अग्रसर होगा। नई शिक्षा नीति बच्चों को सक्षम व आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम साबित होगी।
यह बात अतिरिक्त उपायुक्त अमरजीत सिंह मान ने आज जिला सभागार में नई शिक्षा नीति-2019 के ड्राफ्ट पर शिक्षा विभाग, सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों के मुखियाओं के साथ आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को ही नहीं, प्रत्येक जनसाधारण को भी देश में लागू होने जा रही शिक्षा नीति के बारे में जानकारी होनी चाहिए और इसके संबंध में अपने सुझाव व प्रतिक्रियाएं देनी चाहिए ताकि इसमें और अधिक सुधार किए जा सकें। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि आज युवाओं में जो भटकाव और गैर-जिम्मेदारी की भावना देखी जा रही है, उसे नियंत्रित करने में केवल शिक्षक ही भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए शिक्षकों को पहले खुद आदर्श आचरण अपनाना होगा। शिक्षक अपने भीतर झांकें और अपने आचरण व व्यवहार को खुद परखें। यदि स्कूल में बच्चों के हित में किसी सुविधा की जरूरत है तो उसे जुटाने की कोशिश करें और अपनी जिम्मेदारियों से भागने की कोशिश करें। 
चीन और पश्चिम देशों की तर्ज पर भारत भी नई शिक्षा नीति के कारण तेज विकास के पथ पर अग्रसर होगा। भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली का ड्राफ्ट सन् 1986 में आया था और अब तक इसमें संशोधनों के अलावा कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किया गया जबकि इसके निर्माण के समय प्रत्येक 10 साल बाद इसमें बदलाव की अनुशंसा की गई थी। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति वर्तमान में लागू सामान्य शिक्षा के स्थान पर कौशल आधारित होगी। इसमें परीक्षा प्रणाली में भी पूरी तरह से बदलाव किया जाएगा। शिक्षा को रोजगारपरक बनाना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नई शिक्षा नीति में कलस्टर आधारित प्रणाली विकसित होगी। कुछ स्कूलों को मिलाकर बनाए जाने वाला प्रत्येक कलस्टर विशेष शिक्षा के लिए समर्पित होगा। कोई कलस्टर कृषि शिक्षा देगा तो दूसरा कलस्टर अंतरिक्ष विज्ञान, ऑटोमोबाइल या मैनुफैक्चिरिंग की स्पेशलाइज्ड शिक्षा के प्रति समर्पित होगा।  डीईओ ने बताया कि प्रत्येक कलस्टर पर सरकार द्वारा जरूरत के सभी संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे। कलस्टर में शिक्षकों के प्रशिक्षण से लेकर विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए जरूरी तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं, चिकित्सक व परामर्शक भी मौजूद रहेंगे। स्कूलों में प्रधानाचार्य अब वरिष्ठïता के आधार पर नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर नियुक्त होंगे। अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को भारी-भरकम प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी ताकि वे शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सुधार कर सकें। प्रत्येक शिक्षक के लिए प्रतिवर्ष 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। डीईओ ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत जिला स्तर पर जिला शिक्षा परिषद का गठन होगा जिसके अध्यक्ष उपायुक्त होंगे। इस परिषद की हर माह समीक्षा बैठक की जानी अनिवार्य होगी। शिक्षकों के प्रशिक्षण पर मुख्य फोकस रखा जाएगा तथा पूरे देश में थ्री लैंगवेज फार्मूला पर काम किया जाएगा। वर्तमान में चल रहे स्कूलों, डाइट, बीईओ व डीईओ के प्रारूप को पूरी तरह से पुनर्निर्मित किया जाएगा। चार-पांच कलस्टरों को मिलाकर स्कूल कॉम्पलेक्स बनाए जाएंगे। बैठक में डीपीसी कुलदीप सिहाग, डिप्टी डीईओ चंद्रकला व अनिता सिंगला, जिला के सरकारी व निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य, एपीसी, लैक्चचरर, पीजीटी व टीजीटी यूनियनों के प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।


30 जुलाई तक दे सकते हैं सुझाव
जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने नई शिक्षा नीति-2019 के ड्राफ्ट बारे बताया कि नई नीति के कारण शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बदल जाएगी। इस ड्राफ्ट को पेश करते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से सुझाव नोट मांगा है। राज्य सरकारों द्वारा अपने सुझाव देने की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित है। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद वर्तमान में चली आ रही शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से बदल जाएगी। 

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