हरियाणा : सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें गांवों में
हरियाणा विजन जीरो के तहत सड़क हादसों में सात फीसद तक आई गिरावट
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। एक सर्वे के अनुसार हरियाणा के शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर अधिक है। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित विभागों को मिलकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से आरंभ किए गए ‘हरियाणा विजन जीरो’ कार्यक्रम से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग सात प्रतिशत तक कमी आई है। चरखी दादरी और कैथल जिले में 40-40 प्रतिशत, 8 जिलों में लगभग 10-10 प्रतिशत और 3 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को शून्य करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जनभागीदारी के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों के बारे जागरूकता की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और आमजन को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम को प्रदेशभर में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि सडक दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले युवाओं को खोना न केवल परिवार पर बल्कि देश की आर्थिक उन्नति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करना आज एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग से सड़क दुर्घटनाओं का लाइव डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए, ताकि उन दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए खराब सड़कों का पता लगाकर मुरम्मत करने, साईकिल के लिए अलग लाईन बनाना, पैदल चलने वालों के लिए मार्ग, सुरक्षा के दृष्टिगत सीसीटीवी कैमरों को लगाने जैसे उठाए गए कदमों में और तेजी लाने की आवश्यकता है।
दुर्घटनाओं के लिए आमजन भी जिम्मेदार
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार और सिस्टम के साथ-साथ आमजन की भी जिम्मेवारी बनती है कि वे यातायात के नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचाने में पुलिस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 75 फीसद 12-35 आयु वर्ग के
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक मनोज यादव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 75 प्रतिशत जान गंवाने वालों में 12 से 35 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में वाहनों की औसत स्पीड बहुत ज्यादा है, जिसे रोकने के लिए पुलिस विभाग तत्परता से कार्य कर रहा है।
3 मई 2017 को हुई थी हरियाणा विजन जीरो की शुरुआत
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. सी. गुप्ता ने बताया कि हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम की शुरूआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा 3 मई 2017 को गुरुग्राम में की गई थी। इसके लिए हरियाणा सरकार, नासकॉम और वर्ल्ड रिसॉर्स इंस्टीटयूट के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। मई 2017 से दिसंबर 2018 तक पहले चरण में 10 जिलों में हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम चलाया गया, जिसकी सफलता के बाद जनवरी 2019 से दूसरे चरण में सभी 22 जिलों में इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। पहले चरण के कार्यक्रम में 230 लोगों को बचाया गया। 6554 किलोमीटर सड़कों का सड़क सुरक्षा आॅडिट करवाया गया। 1386 दुर्घटनाओं की जांच की गई तथा 141 जिला सुरक्षा समितियों की बैठक की गई।
हरियाणा विजन जीरो के तहत सड़क हादसों में सात फीसद तक आई गिरावट
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। एक सर्वे के अनुसार हरियाणा के शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर अधिक है। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित विभागों को मिलकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से आरंभ किए गए ‘हरियाणा विजन जीरो’ कार्यक्रम से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग सात प्रतिशत तक कमी आई है। चरखी दादरी और कैथल जिले में 40-40 प्रतिशत, 8 जिलों में लगभग 10-10 प्रतिशत और 3 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को शून्य करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जनभागीदारी के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों के बारे जागरूकता की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार और आमजन को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम को प्रदेशभर में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए हितधारकों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि सडक दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले युवाओं को खोना न केवल परिवार पर बल्कि देश की आर्थिक उन्नति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करना आज एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग से सड़क दुर्घटनाओं का लाइव डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए, ताकि उन दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए खराब सड़कों का पता लगाकर मुरम्मत करने, साईकिल के लिए अलग लाईन बनाना, पैदल चलने वालों के लिए मार्ग, सुरक्षा के दृष्टिगत सीसीटीवी कैमरों को लगाने जैसे उठाए गए कदमों में और तेजी लाने की आवश्यकता है।
दुर्घटनाओं के लिए आमजन भी जिम्मेदार
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार और सिस्टम के साथ-साथ आमजन की भी जिम्मेवारी बनती है कि वे यातायात के नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचाने में पुलिस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 75 फीसद 12-35 आयु वर्ग के
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक मनोज यादव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 75 प्रतिशत जान गंवाने वालों में 12 से 35 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में वाहनों की औसत स्पीड बहुत ज्यादा है, जिसे रोकने के लिए पुलिस विभाग तत्परता से कार्य कर रहा है।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. सी. गुप्ता ने बताया कि हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम की शुरूआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा 3 मई 2017 को गुरुग्राम में की गई थी। इसके लिए हरियाणा सरकार, नासकॉम और वर्ल्ड रिसॉर्स इंस्टीटयूट के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। मई 2017 से दिसंबर 2018 तक पहले चरण में 10 जिलों में हरियाणा विजन जीरो कार्यक्रम चलाया गया, जिसकी सफलता के बाद जनवरी 2019 से दूसरे चरण में सभी 22 जिलों में इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। पहले चरण के कार्यक्रम में 230 लोगों को बचाया गया। 6554 किलोमीटर सड़कों का सड़क सुरक्षा आॅडिट करवाया गया। 1386 दुर्घटनाओं की जांच की गई तथा 141 जिला सुरक्षा समितियों की बैठक की गई।


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