आरटीआई के तहत जानबुझकर सूचना न देने वाले अधिकारियों से अब वसूला जाएगा यह जुर्माना
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। आटीआई के तहत जानबुझकर सूचना न देना या आधी-अधूरी सूचना देना अब संबंधित जन सूचना अधिकारी को भारी पड़ सकता है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है और साथ में 25 हजार रूपए जुर्माना भी अदा करना होगा। हरियाणा सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्रोई ने बताया कि सूचना का अधिकार जनता का मौलिक अधिकार है, ऐसे में बिना किसी तथ्य कारणों के सूचना न देना या जानबूझकर अपूर्ण सूचना देना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार एक क्रांतिकारी अधिनियम है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार को रोकने में भी इस अधिनियम ने काफी अह्म रोल अदा किया है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारियों का दायित्व सूचना देना है, सूचना न देने के तरीके ढूंढना नहीं है। सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 में लागू हुआ है। इसके तहत सूचना मांगने वाले व्यक्ति को 30 दिन में सूचना देनी अनिवार्य है। सूचना नहीं देने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी सूचना के लिए कहेगा, सूचना न देने की सूरत में संबंधित पर 25 हजार रुपये का जुमार्ना लगाया जा सकता है और सूचना देना भी अनिवार्य है। सूचना आयुक्त ने सरपंचों को आह्वान किया कि वे अपने कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए सूचना के अधिकार अधिनियम को लागू करें। कोई भी व्यक्ति अगर इस अधिनियम के तहत सूचना लेता है, तो उसे सूचना दी जाएं। सरपंच अपने गांव के रिकॉर्ड को दुरूस्त करके कंप्यूटराईज करें। कंप्यूटराईज होने के बाद उन्हें सूचना देने में काफी कठिनाईयों से मुक्ति मिलेगी और कार्यों में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि सरपंचों को इस अधिनियम की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अधिनियम की जानकारी होने पर ही वे सही तरीके से जवाब दे सकते हैं और वे अनावश्यक प्रकार के झंझटों से भी बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि व अधिकारी इस अधिनियम का अध्ययन करें तो उन्हें उनकी शक्तियां व कार्य प्रणाली बारे जानकारियां मिल सकेगी।


0 Comments