खेतों के खालों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण व विस्तार का मसौदा तैयार


खेतों के खालों के पुनर्वास, पुनर्निर्माण व विस्तार का मसौदा तैयार
राज्य के जलमार्गों के पुनरोद्घार को हरियाणा ने बनाई है नई नीति 

मीडिया जंक्शन न्यूज
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने जलमार्गों (वॉटरकोर्स अर्थात खालों) के पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विस्तार के सम्बन्ध में एक नीति-2019 बनाई है, जिसके तहत राज्य के जलमार्गों का पुनरोद्घार किया जाएगा। सिंचाई और जल संसाधन विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2017 में, विभाग ने जलमार्गों को दरुस्त करने के लिए एक नीति तैयार की थी परन्तु इस नीति के क्रियान्वयन के पश्चात विभाग को कुछ कठिनाइयों को सामना करना पड़ा और इसी कड़ी में विभाग ने अब पुन: जलमार्गों (वॉटरकोर्स)के पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विस्तार के सम्बन्ध में एक नई नीति बनाई है ताकि इन कठिनाइयों को दूर किया जा सकें। संशोधित नीति के तहत जलमार्गों (वॉटरकोर्स अर्थात खालों) के पुनर्वास, पुनर्निर्माण और विस्तार के सम्बन्ध में प्राप्त आवेदनों की प्राथमिकता के लिए प्रक्रिया व मानदण्ड़ों बारे उन्होंने बताया कि यदि जलमार्ग पूरी तरह से अनियंत्रित है, तो इसकी लाइनिंग के लिए काडा द्वारा विचार किया जाएगा। यदि जलमार्ग आंशिक रूप से पंक्तिबद्ध है और लाइनिंग 20 वर्ष से कम पुरानी है, तो केवल  40 फीट प्रति एकड़ मौजूदा लंबाई से विस्तार के लिए विचार किया जा सकता है। यदि जलमार्ग आंशिक रूप से पंक्तिबद्ध है और लाइनिंग 20 साल से अधिक पुरानी है, तो मौजूदा लाइनिंग को पुनर्वास/पुर्ननिर्माण व विस्तार के लिए सीसीए की प्रति एकड़ 40 फीट की लंबाई तक विचार किया जाएगा। इन सभी में, हरियाणा कैनाल और ड्रेनेज एक्ट के तहत सुनवाई की आवश्यकता होगी यदि शेयरधारकों द्वारा जलमार्ग में विस्तार या लाईनिंग की मांग आती है और जहां जलमार्ग की मौजूदा लंबाई की 40 फीट प्रति एकड़ के मानदंड से कम है। विस्तार को डीसीओ द्वारा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए तय किया जाना चाहिए कि दो शाखाओं के बीच की दूरी 5 एकड़ से कम नहीं होनी चाहिए। व्यवहार्यता के अनुसार लाइनिंग में विस्तार खुले के रूप में या पाइप वॉटरकोर्स में हो सकता है लेकिन पाइप वॉटर कोर्स को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। योग्यता मानदंड  के बारे में उन्होंने बताया कि पुनर्वास / पुर्ननिर्माण / विस्तार के लिए केवल उन वॉटरकोर्स पर विचार किया जाएगा जो वॉटर यूजर एसोसिएशन के तहत पंजीकृत होंगे। इसी प्रकार, केवल उन जलमार्गों पर विचार किया जाएगा, जिनमें से डब्ल्यूयूए के तहत जलमार्ग के पुनर्वास /पुर्ननिर्माण व विस्तार के लिए आवेदन के साथ एक प्रतिशत राशि जमा करेंगे। जलमार्गों की न्यूनतम आयु के तहत केवल 20  वर्ष  की आयु वाले जलमार्गों पर विचार किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में 15 वर्ष से अधिक आयु के जलमार्गों पर भी विचार किया जा सकता है। इसी प्रकार, 75 प्रतिशत से अधिक बर्बाद जलमार्ग की पुर्ननिर्माण व पुर्नवास पर विचार किया जा सकता है, जिस वाटरकोर्स के पुर्ननिर्माण, पुनर्वास और विस्तार प्रस्तावित है उसका आबियाना का बकाया नहीं होना चाहिए और बकाया का प्रमाण संबंधित मंडल नहर अधिकारी द्वारा दिया जाना चाहिए। ऐसे सभी प्रकार के आवेदनों में पाई जाने वाली कमियों के तहत मंडल नहर अधिकारी अपने स्तर पर आवेदन का अस्वीकार कर सकेगा। योग्यता के पश्चात प्राथमिकता करने के संबंध में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि कलैण्डर वर्ष में जोकि 1 जनवरी से 31 दिसम्बर के बीच की अवधि होगी, में कुल उपलब्ध बजट या कुल प्राप्त आवेदन पर निर्भर होगा और प्राथमिकता के आधार पर पाइप वाटर कोर्स दिया जाएगा और विशेष परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी ओपन वाटरवोर्स के निर्माण के बारे में निर्णय ले सकता है।

2 माह के बाद के आवेदनों पर होगा विचार 
नीति के कार्यान्वयन के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि वॉटर यूजर एसोसिएशन के पहले से प्राप्त आवेदनों और नीति के प्रकाशन के 2 महीने के बाद प्राप्त आवेदनों पर पहले विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मानदंडों पर विचार करके सभी जलमार्गों की प्राथमिकता सूची हर साल बजट की उपलब्धता के अनुसार तैयार की जाएगी। प्राथमिकता सूची हर तिमाही के बाद विशेष रूप से अपडेट की जाएगी क्योंकि आवेदकों के पास माइक्रो सिंचाई पर स्विच करके अपनी रैंकिंग में सुधार करने का अवसर होगा। प्राथमिकता सूची एक रोलिंग सूची होगी। बजट उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता सूची के अनुसार जलमार्गों को लिया जाएगा।

पॉलिसी प्रकाशन से 2 माह बाद तक कर सकेंगे आवेदन 
डब्ल्यूयूए के पास आवेदन करने के लिए पॉलिसी के प्रकाशन की तारीख से 2 महीने का समय होगा। इस नीति के संदर्भ में सभी लंबित आवेदनों को फिर से जमा करना होगा। हालांकि, अगर कुछ ने पिछले आवेदन के साथ पहले से ही एक प्रतिशत योगदान जमा कर लिया है, तो फिर से उसकी आवश्यकता नहीं होगी। दो महीने के समय अवधि के दौरान प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी। प्राथमिकता सूची हर तिमाही में अपडेट की जाएगी जोकि एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को अपडेट होगी। एक तिमाही के दौरान प्राप्त सभी नए आवेदनों को अगले अपडेशन के समय शामिल किया जाएगा। सभी आवेदकों को प्राथमिकता सूची में आगे बढऩे का अवसर मिलेगा और किसी विशेष तिमाही के दौरान उनके अंकों में सुधार होना, जो अगली सूची की तैयारी के समय अपडेट किया जाएगा। सरकार पाइप वाटरकोर्स को प्राथमिकता देगी। यदि किसी मामले में ओपन वाटरकोर्स बनाया जा रहा है तो संबंधित एससीओ इसके लिए कारण बताएंगे। चाक एरिया से बाहर पानी न बेचने के सम्बन्ध में आउटलेट / वाटरकोर्स के शेयरधारकों से शपथ-पत्र लिया जाना चाहिए। यदि शेयरधारकों में से किसी के द्वारा इस संबंध में उल्लंघना पाई जाती है, तो ऐसे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

टेल शेयरधारक को देना होगा हलफनामा 
टेल शेयरधारक एक हलफनामा प्रस्तुत करेंगे कि उन्हें पानी की नियमित आपूर्ति हो रही है। यदि उन्हें नियमित आपूर्ति नहीं मिल रही है, तो पूछताछ के बाद सम्बन्धित मण्डल नहर अधिकारी को आउटलेट को बंद करने का अधिकार होगा। टेल के शेयरधारकों को नियमित आपूर्ति के साथ जलमार्ग का नियमित रखरखाव / डब्ल्यूयूए द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि इस संबंध में कोई उल्लंघना पाई जाती है, तो सम्बन्धित डीसीओ जांच के बाद आउटलेट को बंद करने का आदेश पारित करेगा।

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