हरियाणा : बेस्ट गायकों व कवियों को एक लाख रूपए पुरस्कार देगी सरकार
प्रदेश में चार स्थानों पर केश कला सिखाए जाने की तैयारी
मीडिया जंक्शन समाचार
रोहतक। पलवल में स्थापित कौशल विकास विश्वविद्यालय की तर्ज पर प्रदेश में चार जगह चिन्हित कर केश कला सिखाई जायेगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सरकार ने प्रसिद्ध लोक गायक बाजे भक्त के नाम से पुरस्कार घोषित किया है जिसके तहत समाज के अच्छे गायकों, कवियों व अच्छा कार्य करने वाले लोगों को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा। कला परिषद की ओर से पुरस्कारों के लिए आवेदन मांगे गए है तथा अब तक 1200 के लगभग आवेदन आये है। सीएम ने सैन समाज को कहा कि वे पहले बाजे भक्त स्मारक के लिए सरकार की नीति अनुसार एक हजार वर्ग गज जमीन अलॉट करवायें उसके बाद जैसे ही जमीन अलॉट होती है स्मारक के लिए 11 लाख रुपये की अनुदान राशि उसी समय सैन समाज को मिल जायेगी। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय से ही सेवा व कर्म के प्रतीक रहे सैन समाज ने श्री सैन भक्त व कवि बाजे भक्त जैसे अनेक संत व समाज सुधारक हमें दिये है जिसके लिए पूरा सर्व समाज उनका सदैव ऋणी रहेगा। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने इस अवसर पर महान कवि, लोक गायक व समाज सुधारक श्री बाजे भगत को नमन करते हुए कहा कि सैन समाज हर वर्ग, जाति, धर्म और सम्प्रदाय के लोगों के प्यार और प्रेम का भागीदार है। हर परिवार के सुख-दुख के समय इसकी भूमिका रहती है। देश की आजादी के आन्दोलन और उसके बाद देश के नव-निर्माण में सैन समाज का योगदान प्रशंसनीय है।
जब बचपन के दिनों को याद करने लगे सीएम
सीएम मनोहर लाल ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने निंदाना गांव में सांगी धनपत सिंह ढुम का सांग सुना है जिन्होंने सांग करके लोगों से उस समय एक लाख रुपये चंदा इक्कठा कर गांव में स्कूल बनवाया। मैं ऐसे संत को और ऐसे कलाकार को श्रद्घांजलि देता हूं। सीएम ने कहा कि 15 के करीब सांगों की रचना करने वाले इस महान कवि बाजे भगत की रचनायें हमारे लिये जीवन का पाठ हैं और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं। उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज हमारे लिए आदर्श हैं। आज के भौतिकता के दौर में जब जीवन मूल्यों में गिरावट आ रही है और मूल्यहीनता व फूहड़ता का बोलबाला है तो उनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। आज की युवा पीढी को उनकी रचनाओं से सीख लेते हुए लोक मयार्दाओं का पालन करना होगा जिससे परिवार व समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाया जा सकें। उनका समस्त साहित्य देश व समाज की वह अमूल्य धरोहर है जिसे सम्भाल-सहेजकर रखना हम सभी का कर्तव्य और दायित्व है, क्योंकि उससे वर्तमान ही नहीं, आने वाली पीढ़ियां भी लाभान्वित होंगी।


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