आरटीआई के तहत जानकारी देने में आनाकानी न करें सरपंच व ग्राम सचिव
बोले, आरटीआई के दायरे में आती हैं सरकार से एक पैसे का भी लाभ लेने वाली सभी संस्थाएं
3 अगस्त 2019, 5:21
मीडिया जंक्शन न्यूज
हिसार। सरपंच व ग्राम सचिव कान खोलकर सुन लें, आरटीआई के तहत मांगी जाने वाली सूचना देने में जरा भी आनाकानी न करें। यदि आप ईमानदार हैं तो डरें नहीं, आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा और यदि कोई गड़बड़ घोटाला किया है तो छोड़ा नहीं जाएगा। हरियाणा राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्रोई आज यहां लघु सचिवालय स्थित जिला सभागार में जिला के सरपंचों व ग्राम सचिवों को जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के संबंध में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आवेदक को निर्धारित समयावधि में सूचनाएं प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम नया नहीं है। स्वतंत्र भारत में पारदर्शिता लाने के लिए इसे 2005 में कानून का रूप दिया गया है जबकि विश्व के 150 देशों में यह सन् 1866 से लागू है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। एक्ट के प्रावधानों के नियमों की जानकारी न होने के कारण ही सूचनाएं देने से डर लगता है। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधि व सरकारी कर्मचारी होने के नाते सभी को यह एक्ट पढ़ना चाहिए। जब आपको सभी नियमों की जानकारी होगी तो आरटीआई का जवाब देने में कभी दिक्कत नहीं आएगी।
श्री बिश्रोई ने कहा कि जो निजी संस्थाएं सरकार से एक पैसे का भी लाभ लेती हैं वे सभी आरटीआई के दायरे में आती हैं। ये निजी या अर्धसरकारी संस्थाएं सार्वजनिक दायरे की सूचनाएं देने से मना नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आपसे जो सूचना मांगी जाए, उसका 30 दिन के भीतर जवाब देना जरूरी है। यदि अपेक्षित सूचना आपसे संबंधित नहीं है तो इस संबंध में आवेदक को सूचित कर दें। यदि सूचना किसी अन्य विभाग से संबंधित है तो 5 दिन में उस विभाग को प्रेषित कर दें तथा इसकी सूचना आवेदक को भी दे दें। यदि सूचना निर्धारित से अधिक पन्नों में है तो इसके लिए अपेक्षित फीस जमा करवाने की डिमांड की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने जन प्रतिनिधियों व ग्राम सचिवों के आरटीआई से जुड़े सवालों के जवाब भ्ी दिए। उन्होंने उनसे अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल संरक्षण के लिए बारिश के पानी को सहेजने और गांव का सुधार करने की दिशा में विशेष कदम उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर डीडीपीओ अश्वीर सिंह, बीडीपीओ संदीप कुमार भारद्वाज सहित पंचायत विभाग के अन्य अधिकारी, कर्मचारी व जिला के सरपंच और ग्राम सचिव मौजूद रहे।
नपेंगे रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने वाले सरपंच व ग्राम सचिव
सूचना आयुक्त ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद ग्राम सचिव सरपंच का रिकॉर्ड अपने अधिकार में लें तथा उसे नवनिर्वाचित सरपंच के सुपुर्द करके इसकी पावती प्राप्त करे। जान-बूझकर जानकारी न देने पर जुमार्ने का प्रावधान है और ऐसा करने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरंपच द्वारा पुराने रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई है तो बीडीपीओ व डीडीपीओ को सूचना देकर उनके माध्यम से एफआईआर दर्ज करवाएं। उन्होंने कहा कि सूचनाएं न तो नष्टद्द की जा सकती हैं और न ही बनाई जा सकती हैं। जो रिकॉर्ड में दर्ज है उनकी एक से अधिक कॉपियां होती हैं जो कहीं न कहीं उपलब्ध रहती हैं। उन्होंने सरपंचों व ग्राम सचिवों को सूचनाओं के डिजिटलाइजेशन के संबंध में भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि यदि आप ईमानदार हैं और आपका कार्य सही है तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।




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