करनाल : गन्ना किसानों की 20 साल पुरानी मांग पूरी, 263 करोड़ से होगा शुगर मिल का विस्तार
13 सितंबर 2019, 2:21 PM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। रिंकू गोंदर
करनाल। करनाल सहकारी चीनी मिल के विस्तार की गन्ना किसानों की 20 साल पुरानी मांग को हरियाणा सरकार ने मंजूरी प्रदान करते हुए इस पर काम भी शुरुकर दिया है। शुगर मिल के विस्तार पर करीब 263 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह कार्य एक वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। इस मिल के विस्तारीकरण के बाद क्षेत्र के किसानों को अपना गन्ना बेचने के लिए कहीं बाहर बेचने की दिक्कत से निजात मिलेगी। चीनी मिल के विस्तारीकरण के अवसर पर सीएम ने भूमि पूजन किया और ईंट रखकर कार्य की शुरूआत की। इस मिल की क्षमता अब 2200 टीसीडी से बढकर 3500 टीसीडी हो जाएगी। इस कार्य पर करीब 263 करोड़ रुपये खर्च आएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार बनी कुछ ही समय बाद किसानों पर ओलावृष्टि, बारिश के जल भराव व पश्चिमी हरियाणा में कपास में सफेद मक्की के प्रकोप की भारी मार पड़ी। परंतु हरियाणा सरकार ने निर्णय लिया कि किसानों का नुकसान किसी प्रकार से मंजूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने किसानों को मुआवजा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 5 साल में किसानों को 3400 करोड़ रुपये दिए जबकि पिछले 48 साल में सभी सरकारों ने मिलकर 1400 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जीडीपी ठीक करने के लिए सभी लोगों के लिए आर्थिक योजना बनानी पड़ती है ताकि हर गरीब आत्मविश्वास और स्वाभिमान से जीवनयापन कर सके।
हमारी सरकार ने बंद किया बिचौलिया सिस्टम
इस अवसर पर सीएम ने कहा कि सरकार के साथ समन्वय बनाने के लिए बिचौलिए के सिस्टम को बंद किया गया। सरपंच से लेकर ऊपर तक पैसे देने की प्रथा थी, उस पर अंकुश लगाया गया है। सफेद मांड के कुर्ता-पजामा वाले तक कमीशन जाती थी, उनकी कमीशन बंद करके उनके कुर्ता-पजामों को खूंटी पर टंगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने अपने शासनकाल में प्रदेश की जनता को यह बताने का काम किया है कि शासन क्या होता है, परंतु अभी कार्य अधूरा है उसको आपके आशीर्वाद से पूरा किया जाएगा। आप सभी लोगों के आशीर्वाद की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान सरकार की योजना मेरी फसल मेरा ब्यौरा में अपना पंजीकरण करवाएं ताकि फसल बेचने और सरकार की योजना का लाभ लेने में कोई दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए हरियाणा सरकार ने भी 6000 रुपये वार्षिक पेंशन देने का निर्णय लिया है और साथ ही निर्णय लिया है कि जो भी बीमा प्रीमियम की राशि सरकार को किसान जमा करवाता है उसकी किस्त अब उनकी पेंशन से काटकर बाकी राशि उनके जनधन खाता में जमा करवा दी जाएगी। अब किसान को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं रहने दी जाएगी।
50 लाख क्विंटल गन्ना पिराई की क्षमता
सीएम ने कहा कि इस शुगरमिल के विस्तारीकरण के बाद 50 लाख क्विंटल तक गन्ने की पिराई की क्षमता होगी। किसान को अब अपना गन्ना बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होने कहा कि यह सहकारी चीनी मिल है, यदि किसान आपसी सहमति मिल को चलाना चाहें चला सकते हैं, यह उनका मिल है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि कल के लिए पानी बचाएं, हरियाणा के पास पानी का कोई स्त्रोत नहीं है। किसानों को चाहिए कि वह ऐसी फसल का उत्पादन करें जिसमें कम पानी लगता हो। उन्होंने कहा कि यमुना की तलहटी के लोगों को गन्ना उत्पादन में काफी लाभ मिलेगा, इस क्षेत्र में पानी का स्तर भी ऊपर है और गन्ने का मिल भी नजदीक है। वह इससे अधिक आय कर सकते हैं। हरियाणा में यूपी की अपेक्षा गन्ने का भाव भी ज्यादा है।


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