हरियाणा : व्यवसायिक श्रेणी से बाहर हुए ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्म, 50 फीसद कम हुआ प्रोपर्टी टैक्स
प्रदेश के ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्म संचालकों को मिली बड़ी मनोहर सौगात
07 सितंबर 2019, 1:56 PM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। प्रवीन कम्बोज
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्म संचालकों को मनोहर सौगात देते हुए इन्हें व्यावसायिक श्रेणी से बाहर कर है। इस बदलाव के बाद अब ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्म संचालकों की टैक्स भुगतान दरें मात्र आधी रह जाएंगी। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने बताया कि 2013 में प्रापर्टी टैक्स के लिए दर्जनभर श्रेणियां निर्धारित की गई थीं, जिसमें पेट्रोल पंप, बैंक्वेट हाल से लेकर होटल तक शामिल हैं। इनमें ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्मों को शामिल नहीं किया गया था, जिस कारण उन्हें प्रापर्टी टैक्स व्यावसायिक श्रेणी के अनुसार प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करने को मजबूर होना पड़ रहा था। नई व्यवस्था के अनुसार अब व्यावसायिक श्रेणी के मुकाबले 50 प्रतिशत कम दर पर प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। मंत्री कविता जैन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीएलयू (चेंज आफ लैंड यूज) ले चुके ढाबा संचालक तथा सीएलयू के लिए आवेदन कर चुके ढाबा संचालकों को नई श्रेणी के दायरे में लाया गया है। अब ढाबों को व्यावसायिक क्षेत्र के प्रापर्टी टैक्स का 50 फीसदी कम भुगतान करना होगा। ढाबों के अंदर खाली क्षेत्र के प्रापर्टी टैक्स का भुगतान व्यवसायिक श्रेणी के खाली भूखंड के अनुसार होगा। मंत्री कविता जैन के अनुसार 2 एकड़ में स्थापित डेयरी एवं पोल्ट्री फार्म संचालक को गुरुग्राम एवं फरीदाबाद नगर निगम में पांच रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा बाकी नगर निगमों में 3.75 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष की दर से प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। नगर परिषदों में 2.50 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा सभी नगर पालिकाओं में 2 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष निर्धारित किया गया है।


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