हरियाणा महाभारत-2019। विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही चढ़ा राजनीतिक पारा, सभी राजनीतिक दलों ने लगाया एड़ी चोटी का जोर
5 साल में 23.9 फीसद बढ़ गया भाजपा का जनाधार, जानें किस पार्टी में कितना-दम ?
इस बार भाजपा का मिशन 75+ और हार का बदला लेने को तैयार विपक्ष ?
2014 में पहली बार 47 सीटें हासिल कर भाजपा ने पूर्ण बहुमत से बनाई थी सरकार
इनेलो को 19 तो कांग्रेस को मिली थी महज 15सीटें
2004 में भाजपा को महज दो तो 2009 में मिली थी 4 सीट
2009 लोस चुनाव में इनेलो+भाजपा गठबंधन को मिले थे महज 23 फीसद वोट
हरियाणा विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। प्रदेश में ठीक एक माह बाद 21 अक्तूबर को चुनाव होने हैं। टिकट के लिए अपनी दावेदारी मजबूजी से रखने के लिए नेताओं के जनसंपर्क अभियान ने भी रफ्तार पकड़ ली है। टिकट के दावेदार नेता रोजाना गांवों में जा-जाकर लोगों से मिल रहे हैं व उन्हें तरह-तरह के लुभावने सपने दिखा रहे हैं। विस चुनाव के लिए भाजपा ने जहां 75+ का लक्ष्य तय किया है वहीं कांग्रेस, जेजेपी व इनेलो भी जीत के दावे कर रहे हैं। विपक्ष बिल्कुल भी नहीं चाहता कि विस चुनावों में कहीं दोबारा फिर उन्हें मुंह की खानी पड़े, इसलिए सभी पार्टियां हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। जननायक जनता पार्टी ने सात उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है, वहीं भाजपा नवरात्र के दौरान टिकट की घोषणा करेगी जबकि कांग्रेस 22 सितंबर के बाद कभी भी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सकती है।
21 सितंबर 2019, 5:57 PM
हरियाणा मीडिया जंक्शन/संदीप कम्बोज
हिसार। लो जी, हरियाणा में 14वीं विधानसभा के चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दलों के योद्धाओं ने कमर कस ली है। दल-बदल का खेल भी जोरों पर है। भाजपा के बढ़ते अपार जनसमर्थन से कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों में हाहाकार मचा है तथा वह इन चुनावों में भाजपा को करारी शिकस्त देकर हार का बदला लेना चाहता है। भाजपा को घेरने के लिए सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति बना रही हैं। लोकसभा चुनाव में मिली अपार जीत से गदगद भाजपा ने विस चुनाव में 75+ सीटों का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2019 के चुनाव में हरियाणा के इतिहास में यह पहला ऐसा मौका था जब भाजपा को 10 की 10 सीटों पर बहुमत हासिल हुआ। पिछले पांच साल में भाजपा के वोट प्रतिशत में 23.9 फीसद तक इजाफा हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा को हरियाणा मेंं 34.84 फीसद तो वहीं कांग्रेस 22.99 फीसद वोट प्राप्त हुए थे। 2019 के लोस चुनाव में भाजपा को 57.93 फीसद तो वहीं कांग्रेस को 28.48 फीसद वोट हासिल हुए हैं। वहीं हरियाणा के विधानसभा के चुनावों की अगर बात करें तो वर्ष 2014 में 12वीं विधानसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को राज्य में 1967 से लेकर अब तक के चुनावी इतिहास में सर्वाधिक 33.2 प्रतिशत वोट मिले थे जिनके सहारे पाटी न केवल 90 सदस्यीय विधानसभा में 47 सीटें जीतने बल्कि स्पष्ट बहुमत हासिल करने में भी सफल रही। 2014 के विधानसभा चुनाव में कुल 603 उम्मीदवारों ने ताल ठोंकी थी जिनमें भाजपा व कांग्रेस ने जहां सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे वहीं इनेलो के 88 सीट, बसपा के 87 सीट, हजकां के 65 सीट, माकपा के 17 व भाकपा के 14 सीटों पर उम्मीदवार मैदान में थे। वहीं वर्ष 2009 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को महज 9.04 प्रतिशतवोट मिले थे और वह केवल चार सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। 2014 में पहला ऐसा मौका था जब भाजपा ने अकेले 47 सीट जीतकर पहली बार हरियाणा में सरकार बनाई थी और सीएम मनोहर लाल मुख्यमंत्री चुने गए। वहीं इनेलो 19 सीट जीतकर सबसे बड़ा विपक्षी दल बना था। कांग्रेस ने 15 सीटें जीती थी, जबकि आजाद व अन्य उम्मीदवारों ने 9 सीटें जीती थी। क्या भाजपा 75+ के लक्ष्य को हासिल कर पाती है या विपक्ष अपनी करारी हार का बदला ले पाने में कामयाब हो पाएगा, यह तो अब समय ही बताएगा?
हुड्डा के आने से रेस में आई कांग्रेस
लोकसभा चुनाव में महज हिसार सीट को छोड़ दें तो कांग्रेस 9 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। इस चुनाव में भी भाजपा की टक्कर कांग्रेस से मानी जा रही है। भले ही कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हो गया हो लेकिन गुटबाजी अभी भी कम नहीं हुई है। हां, हुड्डा के आ जाने से कांग्रेस रेस में जरुर आ गई है लेकिन देरी से फैसला होने का नुकसान भी उन्हें उठाना पड़ रहा है। अब इतना समय नहीं बचा है कि वे संगठन मजबूत कर सके। वे सीधे चुनाव में उतरने जा रहे हैं। वहीं भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
इनेलो से मजबूत हुई जेजेपी
2014 में भाजपा के बाद 19 सीटें लेकर दूसरा सबसे बड़ा दल बनने वाली इनेलो अब बिल्कुल बिखर चुकी है। चौटाला परिवार टूटने के बाद जजपा का गठन हुआ। जजपा ने सबसे ज्यादा इनेलो को नुकसान पहुंचाया है। इनेलो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष से लेकर पार्टी के बड़े नेता और कई मौजूदा विधायक इस्तीफा देकर जजपा, कांग्रेस और भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में जजपा मौजूदा समय में इनेलो से मजबूत नजर आ रही है। इनेलो के लिए प्रत्याशी ढूंढना ही इस चुनाव में बड़ी चुनौती होने वाला है। अभय घोषणा कर चुके हैं कि पार्टी 50 प्रतिशत युवाओं को टिकट देगी, पार्टी में पुराने नेता छोड़कर जा चुके हैं। वहीं जजपा का किसी पार्टी से गठबंधन नहीं हो सका है। जजपा 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का दावा कर रही है लेकिन उसके पास भी उम्मीदवारों का टोटा है। ऐसे में इनेलो और जजपा दोनों के लिए चुनौती है।
हरियाणा विधानसभा चुनावों में कुछ यूं बढ़ा भाजपा का वोट बैंक
पार्टी 2014 सीट मिली/वोट फीसद 2009 सीटें /वोट फीसद
भाजपा 47/33.2 4 /9.04
इनेलो 19/24.1 31/25.79
कांग्रेस 15/20.6 40/35.08
हजकां 2/3.6 6/7.40
निर्दलीय 7/18.5 9/22.7
हरियाणा विस चुनाव का पिछले 52 साल का ग्राफ
वर्ष भाजपा कांग्रेस इनेलो
सीटें सीटें सीटें
1967 - 48 -
1968 - 48 -
1972 - 52 -
1977 - 3 -
1982 6 36 -
1987 16 5 -
1991 2 51 -
1996 11 9 -
2000 6 21 47
2005 2 67 9
2009 4 40 31
2014 47 15 19
हरियाणा : लोकसभा चुनावों में मिला वोट फीसद
पार्टी 2019 2014
भाजपा 57.93 34.84
कांग्रेस 28.48 22.99
इनेलो 1.9 24.43
बसपा 3.63 4.6
आप 0.36 6.14
अन्य 7.75 7
2019 लोस चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों को मिला वोट फीसद
सीट सांसद पार्टी वोट प्रतिशत
अंबाला रतनलाल कटारिया भाजपा 58.68
कुरुक्षेत्र नायब सिंह सैनी भाजपा 55.98
सरसा सुनीता दुग्गल भाजपा 52.16
हिसार बृजेंद्र सिंह भाजपा 51.13
करनाल संजय भाटिया भाजपा 70.08
सोनीपत रमेश चंद्र कौशिक भाजपा 52.03
रोहतक डा. अरविंद शर्मा भाजपा 46.81
भिवानी-महेंद्रगढ़ धर्मबीर भाजपा 63.26
गुडगांव राव इंद्रजीत भाजपा 60.94
फरीदाबाद कृष्णपाल गुर्जर भाजपा 68.68


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