हिसार की सिया ने 8 की उम्र में शुरु कर दी थी प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम, आज दुनियाभर में बढ़ाया हिन्दुस्तान का मान
13 अक्तूबर 2019, 2:00 PM
संदीप कम्बोज। हरियाणा मीडिया जंक्शन
हिसार/गुरुग्राम। इन दिनों दुनियाभर में प्लास्टिक व पॉलिथिन पर चर्चा छिड़ी है। इस बीच हरियाणा के हिसार की बेटी सिया तायल ने स्विजरलैंड के जेनेवा स्थित युनाइटेड नेशन्स के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में माई आॅन बैग मतलब मेरा खुद का थैला पर जबरदस्त भाषण देकर हिन्दुस्तान का मान बढ़ाया है। गुरुग्राम स्थित श्रीराम अरावली स्कूल में कक्षा नौंवीं में पढ़ने वाली सिया तायल दुनियाभर में चुने गए 9 वक्ताओं में से एक थी। और सबसे खास बात यह कि सूचना विवरणिका में वक्ताओं की सूची में सिया को सबसे पहला स्थान दिया गया था। सिया ने ऐसा काम कर दिखाया है जिससे हर हिसारवासी ही नहीं बल्कि हर हिन्दुस्तानी का सीना आज गर्व से चौड़ा हो जाएगा। पूर्व मंत्री बलदेव तायल की पोती व नगर सुधार मंडल के पूर्व अध्यक्ष राहुल तायल की बेटी सिया की इस पहल का जिक्र इस वक्त और भी प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्लास्टिक बैग्स का प्रयोग बंद करके कपड़े का थैला प्रयोग करने का आह्वान किया है। सिया तायल की पहल में एक खास बात ये भी है कि वो अपने कपड़ों के बैग बनाने के लिए उन कपड़ों का प्रयोग करती है जो टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिए वेस्ट होते हैं और इंडस्ट्रीज में उन्हें जला दिया जाता है। सिया तायल के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को जेनेवा के इस कार्यक्रम में काफी सराहना मिली। जेनेवा से लौटने पर सिया ने बताया कि प्लास्टिक के खिलाफ उसने अपनी ये मुहिम महज आठ वर्ष की उम्र में शुरू कर दी थी। इसके लिए उसने हिसार में गांव जुगलान की महिलाओं और लड़कियों को अपने साथ जोड़ा और आज इस मुहिम से जुड़कर कई महिलाएं व लड़कियां अपना खर्च खुद उठाती हैं।
90 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, सिर्फ 9 को मिला मंच पर बोलने का अवसर
सिया तायल के अनुसार उसे अपने मकसद में ज्यादा प्रोत्साहन तब मिला जब मुम्बई की डीएस टैक्सटाइल ने अपनी फैक्ट्री में वेस्ट हो जाने वाले कपड़ों को उसे नि:शुल्क उपलब्ध करवाने की हामी भरी। सिया तायल को स्कूल ने भी प्रोत्साहित किया और समय-समय पर थैलों को बेचने में मदद की। इससे जितना भी थोड़ा बहुत पैसा बचता था वो स्कूल के माध्यम से विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को दे दिया जाता है। वह अब तक ऐसे हजारों कपड़ों के थैले देश-विदेश में भेज चुकी है। बचपन में अपने परिजनों से प्रोत्साहन मिलने पर उसने अपने इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए अन्य लोगों को भी अपने साथ जोड़ा। उसने बी निफ्टी नाम से एक फेसबुक कम्युनिटी शुरू की और अपनी मुहिम को आगे बढ़ाया। उसका ये कार्य डिजीज मैनेजमेंट एसोसिएशन आॅफ इंडिया के राजेन्द्र प्रताप की नजरों में आया तो उन्होंने सिया तायल का नाम यूनाइटेड नेशन के युवा नेतृत्व प्रोग्राम के लिए आगे किया। इस प्रोग्राम के तहत 1एम 2030 के मकसद को लेकरए जिसमे 2030 तक सिया तायल जैसे विश्व मे 10 लाख स्वेच्छिक कार्यकतार्ओं को प्रेरित करना है। सिया तायल को इसी कार्यक्रम के तहत 27 सितम्बर को यूएनओ जिनेवाए यूनाइटेड नेशंस इंसिटीटूट आॅफ ट्रेनिंग एंड रिसर्च द्वारा आयोजित प्रोग्राम में वक्ता के तौर पर बुलाया गया जहां लगभग 90 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें से केवल 9 प्रतिनिधियों को बोलने का अवसर मिला।
दुनियाभर में सबसे कम उम्र वक्ता
सिया तायल ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पॉलीथिन का इस्तेमाल बन्द करने और वातावरण को बेहतर बनाने के बारे में अपने विचार रखे। बताने लायक बात है कि सिया तायल इस कार्यक्रम में सबसे कम उम्र की वक्ता थी। विदेश से लौटने के बाद सिया तायल के पिता राहुल तायल बताया कि जिस उम्र में अधिकतर लड़कियां अपने स्पार्टफोन स्नैपचैट करने या फिर यूथ आइकॉन काइली जेनर व माइली साइरस के वीडियो देखने में व्यस्त रहती हैंए उस 10 वर्ष की उम्र में सिया गुडगांव में अपनी सोसायटी के पास गर्मी में काम कर रहे मजदूरों और गार्ड्स को ठंडा पानी पिलाने में व्यस्त होती थी।
फैंके जाने वाले कपड़ों से बनाने शुरु किए बैग
सिया ने डीएलएफ गोल्फ सिटी के बाहर गैलेरिया मार्केट में आवारा घूमने वाले श्वान के लिए पानी के साफ कटोरे उपलब्ध करवाये। इसके बाद वहीं सोसायटी में सिया ने कुछ दोस्तों के साथ फैंके जाने वाले कपड़ों के पुन: प्रयोग होने वाले कपड़ों के बैग्स बनाने शुरू किये। इसको लेकर उसे काफी अच्छी प्रतिक्रियाएं मिली। श्बी निफ्टीश् नाम से सिया ने अपनी सोसायटी और स्कूल में स्टॉल्स लगाकर इन कपड़ों के थैलों और अन्य सामान को बेचा। इस बिक्री से मिली रकम से सिया ने बेसहारा श्वान को खिलाने में प्रयोग किया। साथ ही मुम्बई में विशेष बच्चों के स्कूल श्रद्धा को भी आर्थिक मदद भेजी। राहुल तायल के अनुसार सिया का मकदस इस विश्व को रहने के लिए बेहतर जगह बनाना है।





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