अपील : मत जलाएं पराली, जानें क्या हैं पराली जलाने के नुक्सान

अपील : मत जलाएं पराली, जानें क्या हैं पराली जलाने के नुक्सान 




 

 21 नवंबर 2019, 1:57 PM
 हरियाणा मीडिया जंक्शन ब्यूरो
चंडीगढ़। इन दिनों देशभर में पराली को लेकर घमासान छिड़ा है। आज हम आपको बताएंगे आखिर पराली पर इतना बवाल क्यों और पराली जलाने से क्या नुक्सान हैं।फसल अवशेष जलाने से पोषक तत्वों का नुक्सान होता है। फसल अवशेष जलाने से 100 प्रतिशत नाईट्रोजन, 25 प्रतिशत फास्फोरस, 20 प्रतिशत पोटाश व 60 प्रतिशत सल्फर का नुक्सान होता है। उन्होंने बताया कि इससे जैविक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी कीटों का नुक्सान होता है। फसल अवशेष जलाने से कार्बन मोनोआक्साइड, कार्बनडाई आक्साईड, राख, सल्फर हाईआक्साईड, मीथेन व अन्य अशुद्धियां उत्पन्न होती है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इन्हें जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ-साथ भूूण्डलीय तापमान में बढौत्तरी होती है तथा छोटे पौधे व वृक्षो पर आश्रित पक्षी मारे जाते हैं। 

बढ़ती है भूमि की उर्वरा शक्ति व जैविक कार्बन
फसल अवशेषों के साथ 10-15 किलोग्राम यूनिया खाद डालने से अच्छी जैविक खाद मिलती है। भूमि की उर्वरा शक्ति व जैविक कार्बन में बढ़ौतरी होती है। इससे समय की बचत होती है और उपयुक्त समय पर बिजाई सम्भव होती है। फसल अवशेष पोटाश व अन्य पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने का महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। इससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है। इस प्रकार विदेशी मुद्रा बचती है। पानी की बचत होती है। फसल अवशेष अत्याधिक गर्मी व ठंड में भूमि के तापमान नियंत्रण में सहायक होते है। बदलते मौसम के प्रभाव का प्रकोप कम होता है।

पराली न जलाने से क्या होता है लाभ
फसलों की उपज में 2 से लेकर 4 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की बढौत्तरी होती है। लम्बे समय में भूमि के भौतिक रासायनिक व जैविक गुणों में सुधार होता है तथा उत्पादन लागत में कमी आती है। इसलिए हरियाणा मीडिया जंक्शन सभी किसान भाईयों से अपील करता है कि वे फसली अवशेषों को न जलाएं बल्कि इनका सदुपयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाए। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे अपने फसल अवशेषों में आग न लगाए। फसल अवशेषों को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

Post a Comment

0 Comments