संदीप कम्बोज । हरियाणा मीडिया जंक्शन
चंडीगढ़। कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार ने विशेष तैयारी कर ली है। लॉकडाउन-2 के दौरान 20 अप्रैल से सरकार प्रदेश में कुछ विशेष छूट देने जा रही है। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया कि 19 अप्रैल के बाद प्रदेश में वाणिज्य गतिविधियां आंरभ करते समय कोविड-19 तथा अर्थव्यवस्था के मध्य संतुलन बनाकर रखा जाना अत्यंत आवश्यक है। (Lockdown-2-This-discount-will-be-available-from-April-20-you-also-know) कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार ने विशेष तैयारी कर ली है। लॉकडाउन-2 के दौरान 20 अप्रैल से सरकार प्रदेश में कुछ विशेष छूट देने जा रही है। हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने बताया कि 19 अप्रैल के बाद प्रदेश में वाणिज्य गतिविधियां आंरभ करते समय कोविड-19 तथा अर्थव्यवस्था के मध्य संतुलन बनाकर रखा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल को जारी विस्तृत दिशा-निदेर्शों की अनुपालना करते हुए 20 अप्रैल से राज्य में मुख्य सचिव ने आज वीडियो कान्फ्रैंसिंग के माध्यम से राज्य के सउन्होंने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 अप्रैल को जारी विस्तृत दिशा-निदेर्शों की अनुपालना करते हुए 20 अप्रैल से राज्य में मुख्य सचिव ने आज वीडियो कान्फ्रैंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों से बात करते हुए निर्देश दिए कि हर जिले को कंटेनमैंट एवं गैर-कंटेनमैंट जोन के लिए अपनी-अपनी योजना तैयार करनी है। उन्होंने बताया कि कंटेनमैंट जोन में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर किसी भी प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं है और गैर-कंटेनमैंट जोन में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा निर्देशित कुछ मानक आॅपरेटिंग प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करना होगा। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे जिला स्तरीय समितियों का गठन करें, जो पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पास जारी करेंगी। उन्होंने आगे कहा कि उद्योगों में कार्य आरंभ होने के साथ ही लोगों की आवाजाही बढ़ जाएगी, ऐसे में उनकी निगरानी करना और अधिक महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर उनका परीक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई श्रमिक अगर एक स्थान से दूसरे स्थान पर कार्य करने जा रहा हो तो कोविड-19 की रोकथाम के लिए उसकी मैडिकल जांच की जानी चाहिए तथा उनका डेटा भी बनाकर रखना है कि वह श्रमिक किस जगह गया है। कार्य-स्थल पर या उसके आप-पास ही ऐसे श्रमिकों के सब-कैंप बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे श्रमिकों की उचित तरीके से निगरानी और सूचना हर दिन प्रस्तुत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिलीफ-कैंपों में होने वाले खर्च का लेखा-जोखा रखने के लिए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी और संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।
जरूरतमंदों तक ही पहुंचाया जाए पकाया हुआ भोजन
मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों के अलावा आपदा-प्रबंधन तथा सरकारी क्षेत्र की ओर से और अधिक सूखा राशन वितरित किया जा रहा है। पकाया हुआ भोजन केवल उन लोगों को प्रदान किया जाना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सेफ-कैंपों में रहने वाले जरूरतमंद श्रमिकों को एक जोड़ी कपड़े भी उपलब्ध करवा देने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन श्रमिकों को मास्क बनाने या किसी अन्य कार्य में व्यस्त रखना चाहिए ताकि उनके समय का सदुपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनवाकर मास्कों के निर्माण में वृद्घि करनी चाहिए।
शिकायत निवारण हेल्पलाइन स्थापित करेगा उद्योग विभाग
उद्योग विभाग द्वारा शिकायत निवारण हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी, जहां उद्योगपति कॉल कर सकते हैं और पास बनवाने व अन्य प्रबंधों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उक्त प्रक्रिया की देखरेख के लिए उन्होंने उपायुक्तों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कदम उठाते हुए उपायुक्तों को निर्णय लेना होगा कि कोई प्रतिष्ठान खुलेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि जिलों में होने वाली औद्योगिक प्रक्रियाओं पर सूक्ष्मता से नजर रखने के लिए उद्योग विभाग के सचिव की देखरेख में मुख्यालय पर एक कमेटी बनार्ईं जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आईएमए जैसे स्वैच्छिक संगठनों को राहत कार्यों के लिए प्रेरित तो करना चाहिए लेकिन करने के लिए दबाव नही डालना चाहिए।
अतंर्राज्यीय सीमा पर ठीकरी पहरा लगाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए, पुस्तकों या स्टेशनरी की दुकानों को खोलने और संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए, बशर्ते वहां सोशल-डिस्टेंसिंग तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन हो। अगर संभव हो तो विद्यार्थियों के दरवाजे तक पुस्तकें पहुंचाने के लिए संभावना को भी खोजा जा सकता है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए आॅडियो और वीडियो क्लिपिंग के माध्यम से आॅनलाइन शिक्षा तंत्र का भी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने अतंर्राज्यीय सीमा पर लोगों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने जाए तथा पूरी सतर्कता से ठीकरी पहरा लगाने के निर्देश दिए।


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