कस्टम हायरिंग सेंटर खोलना चाहते हैं तो 10 जुलाई तक करें आवेदन
Hisar Media Junction
चंडीगढ़। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2019-20 के दौरान केन्द्र सरकार की नई इन-सीटू क्रोप रेज्ड्यू मैनेजमैन्ट स्कीम के तहत कस्टम हायरिंग सैन्टर स्थापित किये जाएंगे। कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना हेतु ऑफलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 जुलाई है। विभाग के एक प्रवक्ता ने विस्तार से बताया कि इस योजना के तहत कस्टम हायरिंग सैन्टर स्थापित करने के इच्छुक ऐसे किसानों के समूहों, किसानों की सहकारी सोसायटियों, एफ.पी.ओ, स्वयं सहायता समूहों, रजिस्टर्ड किसान सोसायटी/किसान समूहों, प्राईवेट उद्यमियों, महिला किसान समूहों अथवा स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत किसानों से आवेदन आमंत्रित किये जा रहे हैं, जिनके पास अपना टै्रक्टर या कम्बाईन हारवेस्टर है। इस स्कीम के तहत केवल 10 लाख तक की परियोजना लागत के कस्टम हायरिंग सैन्टर बनाए जा सकते हंै। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सैन्टर की स्थापना हेतु केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत 8 प्रकार के इन-सीटू क्रोप रेज्ड्यू मैनेजमैन्ट फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यन्त्र जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) हैप्पीसीडर, पैडी स्ट्राचोपर/श्रेडर/मल्चर, शर्ब मास्टर/कटर-कम-स्प्रेडर, रिवर्सिबल एम बीप्लो, रोटरी स्लेशर, जीरो टिलड्रील मशीन, रोटावेटर लेने अनिवार्य हैं, जिन पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना के इच्छुक व्यक्तिगत किसान/किसान समूह/सोसायटियां ऑफलाइन आवेदन पत्र संबंधित उप-कृषि निदेशक या सहायक कृषि अभियन्ता के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान भी उक्त 8 प्रकार के फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यन्त्रों में से अलग तरह के किन्हीं तीन यन्त्रों पर अनुदान का लाभ ले सकते हैं। इसके लिये किसान लघु/सीमान्त श्रेणी का होना चाहिये। किसान के पास 5 एकड़ या इससे ज्यादा भूमि नहीं होनी चाहिये। उसके पास फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्र नहीं होने चाहिये और उसने पिछले 2 वर्षों में फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्रों पर अनुदान का लाभ न लिया हो। प्रवक्ता ने बताया कि किसान के पास अपना ट्रैक्टर या कम्बाइन हारवेस्टर होना अनिवार्य है। प्रत्येक कृषि यन्त्र पर उपलब्ध अनुदान केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित किये गए अधिकतम मूल्य/वास्तविक मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम अनुदान राशि (जो भी कम हो) देय होगी। इन उपकरणों की खरीद केन्द्रीय कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अधिकृत तथा पोर्टल पर रजिस्टर्ड ऐसे कृषि यंत्र निर्माताओं से करनी अनिवार्य है, जिनकी मशीन केन्द्र सरकार के प्राधिकृत किसी भी परीक्षण संस्थान द्वारा प्रमाणित हो। व्यक्तिगत कृषि यन्त्रों तथा कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना हेतु www.agriharyana.org www.agriharyana.gov.in ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। योजना की विस्तृत जानकारी विभागीय वैबसाइट पर उपलब्ध है।
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चंडीगढ़। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2019-20 के दौरान केन्द्र सरकार की नई इन-सीटू क्रोप रेज्ड्यू मैनेजमैन्ट स्कीम के तहत कस्टम हायरिंग सैन्टर स्थापित किये जाएंगे। कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना हेतु ऑफलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 जुलाई है। विभाग के एक प्रवक्ता ने विस्तार से बताया कि इस योजना के तहत कस्टम हायरिंग सैन्टर स्थापित करने के इच्छुक ऐसे किसानों के समूहों, किसानों की सहकारी सोसायटियों, एफ.पी.ओ, स्वयं सहायता समूहों, रजिस्टर्ड किसान सोसायटी/किसान समूहों, प्राईवेट उद्यमियों, महिला किसान समूहों अथवा स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत किसानों से आवेदन आमंत्रित किये जा रहे हैं, जिनके पास अपना टै्रक्टर या कम्बाईन हारवेस्टर है। इस स्कीम के तहत केवल 10 लाख तक की परियोजना लागत के कस्टम हायरिंग सैन्टर बनाए जा सकते हंै। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सैन्टर की स्थापना हेतु केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत 8 प्रकार के इन-सीटू क्रोप रेज्ड्यू मैनेजमैन्ट फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यन्त्र जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) हैप्पीसीडर, पैडी स्ट्राचोपर/श्रेडर/मल्चर, शर्ब मास्टर/कटर-कम-स्प्रेडर, रिवर्सिबल एम बीप्लो, रोटरी स्लेशर, जीरो टिलड्रील मशीन, रोटावेटर लेने अनिवार्य हैं, जिन पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना के इच्छुक व्यक्तिगत किसान/किसान समूह/सोसायटियां ऑफलाइन आवेदन पत्र संबंधित उप-कृषि निदेशक या सहायक कृषि अभियन्ता के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान भी उक्त 8 प्रकार के फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यन्त्रों में से अलग तरह के किन्हीं तीन यन्त्रों पर अनुदान का लाभ ले सकते हैं। इसके लिये किसान लघु/सीमान्त श्रेणी का होना चाहिये। किसान के पास 5 एकड़ या इससे ज्यादा भूमि नहीं होनी चाहिये। उसके पास फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्र नहीं होने चाहिये और उसने पिछले 2 वर्षों में फसल अवशेष प्रबन्धन कृषि यन्त्रों पर अनुदान का लाभ न लिया हो। प्रवक्ता ने बताया कि किसान के पास अपना ट्रैक्टर या कम्बाइन हारवेस्टर होना अनिवार्य है। प्रत्येक कृषि यन्त्र पर उपलब्ध अनुदान केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित किये गए अधिकतम मूल्य/वास्तविक मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम अनुदान राशि (जो भी कम हो) देय होगी। इन उपकरणों की खरीद केन्द्रीय कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अधिकृत तथा पोर्टल पर रजिस्टर्ड ऐसे कृषि यंत्र निर्माताओं से करनी अनिवार्य है, जिनकी मशीन केन्द्र सरकार के प्राधिकृत किसी भी परीक्षण संस्थान द्वारा प्रमाणित हो। व्यक्तिगत कृषि यन्त्रों तथा कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना हेतु www.agriharyana.org www.agriharyana.gov.in ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। योजना की विस्तृत जानकारी विभागीय वैबसाइट पर उपलब्ध है।


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