हरियाणा : जिला परिषदों की बढ़ी ताकत
हिसार मीडिया जंक्शन
हिसार। हरियाणा में जिला परिषदों की ताकत अब बढ़ गई है। प्रदेश की सभी जिला परिषदें अब मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और समेकित वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम के तहत कार्य करने में सक्षम होंगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विगत दिवस पंचकूला किसान भवन में आयोजित विकास एवं पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में घोषणा की कि अब जिला परिषद सीईओ के पास स्वतंत्र प्रभार होगा और किसी भी एडीसी को सीईओ जिला परिषद का प्रभार नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विकास कार्य करवाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग या जन स्वास्थ्य विभाग या किसी अन्य विभाग में से एक कनिष्ठ अभियंता को प्रत्येक जिले में जिला परिषदों का स्वतंत्र प्रभार दिया जाए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य के लोग राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों में वर्तमान राज्य सरकार को पूर्ण एवं स्पष्ट जनादेश देकर दोबारा सेवा करने का मौका देंगे। उन्होंने कहा कि पहली नवंबर, 2019 को हरियाणा दिवस के अवसर पर कई नए निर्णय लिए जा सकते हैं। बैठक में विकास एवं पंचायत मंत्री ओपी धनखड, विधायकज्ञान चंद गुप्ता एवं लतिका शर्मा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल, जिला परिषदों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सभी एडीसी सभी सीईओ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की निचले स्तर पर कार्यों के में पारदर्शिता लाने के लिए सोशल आॅडिट प्रणाली समेत अनेक नई पहल लागू करने की योजना है। पूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और इंजीनियरों को शामिल करके ग्राम स्तरीय समितियों का गठन किया जाना चाहिए जो न केवल विकास कार्यों की प्रगति की निगरानी करेगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेंगी। समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि विकास कार्यों में उत्तम स्तर की सामग्री का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियां सुरक्षित हाथों में होनी चाहिए और इसके लिए हमें उनके ट्रस्टी के रूप में कार्य करना चाहिए।
बढ़ेगा जिला परिषदों का बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले बजट के अलावा, जिला परिषदों को अपने स्वयं के आय स्रोत बनाने के लिए प्रयास करने चाहिए। पहले जिला परिषदों का बजट केवल एक से दो करोड़ रुपए हुआ करता था, जबकि वर्तमान राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 20 से 25 करोड़ रुपए तक कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम जिला परिषदों के बजट को और बढ़ाना चाहते हैं।
अनिवार्य होगा मृत्यु पंजीकरण
सीएम ने कहा कि जन्म पंजीकरण की तरह राज्य सरकार प्रदेश में मृत्यु पंजीकरण अनिवार्य करने की योजना बना रही है ताकि आबादी के वास्तविक आंकड़ों का पता लगाया जा सके। इसके लिए राज्य में सभी श्मशानघाटों या कब्रिस्तानों का पंजीकरण किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशानघाट या कब्रिस्तानों के लिए ग्राम चौकीदार को नोडल पर्सन बनाया गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में समाज का प्रधान नोडल अधिकारी होगा।
अनुबंधित कॉलेज गेस्ट लेक्चरर का मानदेय बढ़ा
कॉलेजों में कार्यरत अनुबंधित गेस्ट लेक्चरर का मानदेय सरकार ने बढ़ा दिया है। जिन गेस्ट लेक्चरर का पीएचडी और नेट क्लीयर नहीं है और 2014 से 18 हजार रुपए मासिक मानदेय ले रहे हैं, उन्हें 23 जुलाई, 2017 से 23 हजार 500 रुपए मानदेय दिया जाएगा। जबकि पीएचडी और नेट क्लीयर करने पर उन्हें लेक्चरर की तरह 26 हजार रुपए का मानेदय दिया जाएगा। इसे लेकर हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के निदेशक की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
बोर्ड, निगमों के चेयरमैनों के मानदेय में 25 हजार की बढ़ोतरी
प्रदेश में विभिन्न बोर्ड, निगम आदि के चेयरमैनों के मानदेय में सरकार ने बढ़ोतरी कर दी है। उनके मानदेय में मासिक 25 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पहले उन्हें मासिक 50 हजार रुपए मानदेय मिलता था, लेकिन अब उन्हें 75 हजार रुपए मानदेय के रूप में मिलेंगे। इसे लेकर मुख्य सचिव कार्यालय से सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी किया गया है। प्रदेश सरकार में 30 से ज्यादा चेयरमैन है हालांकि उन्हें भत्ते आदि पहले की तरह रहेंगे।
हिसार मीडिया जंक्शन
हिसार। हरियाणा में जिला परिषदों की ताकत अब बढ़ गई है। प्रदेश की सभी जिला परिषदें अब मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और समेकित वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम के तहत कार्य करने में सक्षम होंगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विगत दिवस पंचकूला किसान भवन में आयोजित विकास एवं पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में घोषणा की कि अब जिला परिषद सीईओ के पास स्वतंत्र प्रभार होगा और किसी भी एडीसी को सीईओ जिला परिषद का प्रभार नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विकास कार्य करवाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग या जन स्वास्थ्य विभाग या किसी अन्य विभाग में से एक कनिष्ठ अभियंता को प्रत्येक जिले में जिला परिषदों का स्वतंत्र प्रभार दिया जाए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य के लोग राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों में वर्तमान राज्य सरकार को पूर्ण एवं स्पष्ट जनादेश देकर दोबारा सेवा करने का मौका देंगे। उन्होंने कहा कि पहली नवंबर, 2019 को हरियाणा दिवस के अवसर पर कई नए निर्णय लिए जा सकते हैं। बैठक में विकास एवं पंचायत मंत्री ओपी धनखड, विधायकज्ञान चंद गुप्ता एवं लतिका शर्मा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल, जिला परिषदों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, सभी एडीसी सभी सीईओ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की निचले स्तर पर कार्यों के में पारदर्शिता लाने के लिए सोशल आॅडिट प्रणाली समेत अनेक नई पहल लागू करने की योजना है। पूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और इंजीनियरों को शामिल करके ग्राम स्तरीय समितियों का गठन किया जाना चाहिए जो न केवल विकास कार्यों की प्रगति की निगरानी करेगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेंगी। समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि विकास कार्यों में उत्तम स्तर की सामग्री का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियां सुरक्षित हाथों में होनी चाहिए और इसके लिए हमें उनके ट्रस्टी के रूप में कार्य करना चाहिए।
बढ़ेगा जिला परिषदों का बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले बजट के अलावा, जिला परिषदों को अपने स्वयं के आय स्रोत बनाने के लिए प्रयास करने चाहिए। पहले जिला परिषदों का बजट केवल एक से दो करोड़ रुपए हुआ करता था, जबकि वर्तमान राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 20 से 25 करोड़ रुपए तक कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम जिला परिषदों के बजट को और बढ़ाना चाहते हैं।
अनिवार्य होगा मृत्यु पंजीकरण
सीएम ने कहा कि जन्म पंजीकरण की तरह राज्य सरकार प्रदेश में मृत्यु पंजीकरण अनिवार्य करने की योजना बना रही है ताकि आबादी के वास्तविक आंकड़ों का पता लगाया जा सके। इसके लिए राज्य में सभी श्मशानघाटों या कब्रिस्तानों का पंजीकरण किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशानघाट या कब्रिस्तानों के लिए ग्राम चौकीदार को नोडल पर्सन बनाया गया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में समाज का प्रधान नोडल अधिकारी होगा।
अनुबंधित कॉलेज गेस्ट लेक्चरर का मानदेय बढ़ा
कॉलेजों में कार्यरत अनुबंधित गेस्ट लेक्चरर का मानदेय सरकार ने बढ़ा दिया है। जिन गेस्ट लेक्चरर का पीएचडी और नेट क्लीयर नहीं है और 2014 से 18 हजार रुपए मासिक मानदेय ले रहे हैं, उन्हें 23 जुलाई, 2017 से 23 हजार 500 रुपए मानदेय दिया जाएगा। जबकि पीएचडी और नेट क्लीयर करने पर उन्हें लेक्चरर की तरह 26 हजार रुपए का मानेदय दिया जाएगा। इसे लेकर हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के निदेशक की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
बोर्ड, निगमों के चेयरमैनों के मानदेय में 25 हजार की बढ़ोतरी
प्रदेश में विभिन्न बोर्ड, निगम आदि के चेयरमैनों के मानदेय में सरकार ने बढ़ोतरी कर दी है। उनके मानदेय में मासिक 25 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पहले उन्हें मासिक 50 हजार रुपए मानदेय मिलता था, लेकिन अब उन्हें 75 हजार रुपए मानदेय के रूप में मिलेंगे। इसे लेकर मुख्य सचिव कार्यालय से सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी किया गया है। प्रदेश सरकार में 30 से ज्यादा चेयरमैन है हालांकि उन्हें भत्ते आदि पहले की तरह रहेंगे।


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