रोहतक पीजीआई में दूसरे दिन भी जारी रही जूनियर डॉक्टर हड़ताल



रोहतक पीजीआई में दूसरे दिन भी जारी रही जूनियर डॉक्टर हड़ताल

हिसार मीडिया जंक्शन
रोहतक। रोहतक पीजीआई में सुसाइड करने वाले डॉ. ओमकार के पक्ष में दूसरे दिन भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं। सभी जूनियर डॉक्टर पीजीआई कैंपस के विजय पार्क में सुबह से धरने पर बैठे हैं। उन्होंने पीजीआईएमएस के वीसी को विभाग की एचओडी गीता गठवाला के खिलाफ एक मांग पत्र भी भेजा है। दो पेज के इस पत्र में गीता गठवाला पर कई आरोप लगाए गए हैं और उन्हें सस्पेंड नहीं बल्कि नौकरी से टर्मिनेट करने की मांग की है। वहीं डॉक्टर गीता गठवाला शुक्रवार से ही फरार हैं। उनके घर पर ताला लटका हुआ है। पीजीआई प्रशासन ने उन्हें शुक्रवार को सस्पेंड कर दिया। पीजीआई में शनिवार को भी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। वहीं आरोपी डॉ. गीता गठवाला ने कहा है कि एचओडी की कुर्सी से हटाने के लिए ही कुछ लोग स्टूडेंट के सुसाइड की आड़ में यह पूरा षड्यंत्र रच रहे हैं। उसको बहन की शादी में जाने के लिए अवकाश नहीं दिया गया और थीसिस जमा कराने का दबाव बनाए जाने का आरोप गलत हैं। ओमकार पर गलत इलाज से एक बच्चे की मौत होने का आरोप लगा था, जिस पर जांच कमेटी में शामिल डॉ. कत्याल व डॉ. कुंदन मित्तल ने उसे दोषी माना था। पीजी स्टूडेंट ओमकार पर केस दर्ज हुआ था। एक माह के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे निलंबित कर दिया था, लेकिन अब ऐसा प्रदर्शित किया जा रहा है कि जैसे उन्होंने ही ओमकार को निलंबित कराया था।

जानें क्या था पूरा मामला
  1. रोहतक पीजीआई में पीडियाट्रिक विभाग के पीजी तृतीय वर्ष में अध्ययनरत डॉक्टर डॉ. ओमप्रकाश ने रेजीडेंट डॉक्टर्स हॉस्टल में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था। ओमकार के साथी डाक्टरों ने पीजीआई कैंपस में पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट की हेड डॉ. गीता गठवाला पर आरोप लगा था कि गठवाला ने डॉ. ओमकार को उनकी बहन की शादी में जाने के लिए छुट्टी नहीं दी। इस वजह से उसने सुसाइड किया।
  2. शादी शुक्रवार को थी। साथियों ने यह भी बताया कि ओमकार अपनी बहन के लिए शादी का जोड़ा खरीदकर लाया था। उन्हीं कपड़ों में से एक को फंदा बना जान दी। डॉ. ओमकार ब्वायज हॉस्टल के फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे। साथियों के मुताबिक, वह गुरुवार शाम करीब साढ़े नौ बजे अपने कमरे पर लौटे। इसके बाद रात करीब 10 बजे जब उनके साथी ने कमरे का गेट खोला तो वो फंदे पर लटके हुए थे। वहीं, ये भी बताया जा रहा है कि ओमकार पर करीब दो साल पहले पीजीआई में एक बच्चे की मौत मामले में लापरवाही का केस दर्ज हुआ था। इससे भी वो तनाव में थे।
  3. लोन लेकर पढ़ाई कर रहा था ओमकार

    डॉ. ओमकार के मध्यमवर्गीय परिवार ने उसके एमडी बनने के ढेरों सपने देखे थे। कर्नाटक के हुबली निवासी पिता माणिक रेलवे वर्कशॉप में मैकेनिक पद पर कार्यरत हैं। मां प्रेमला गृहिणी है। घर में दो भाई व एक बहन में सबसे बड़ा ओमकार बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहा। ओमकार ने एमबीबीएस की पढ़ाई कर्नाटक से पूरी की। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से एजुकेशन लोन लिया।
  4. एमडी की पढ़ाई के लिए वर्ष 2017 में उसका चयन रोहतक पीजीआई में हुआ। छोटे भाई महंताश ने आरोप लगाया कि दो वर्ष से ही एचओडी डॉ. गीता गठवाला भाई को परेशान कर रही थी। साथियों ने कहा कि एक जूनियर होने के बावजूद एक बच्चे की मौत के मामले में सारा इल्जाम ओमकार के सिर पर ही मढ़ दिया। डॉ. गीता खुद बच गई। तब से ओमकार तनाव में चल रहा था।
  5. परिजनों ने बेटी की शादी का कार्ड दिखाकर रोते हुए कहा कि बहन की शादी के लिए भी एचओडी ने छुट्टी नहीं दी। घर में बड़ा बेटा होने के नाते उसके सिर पर ही सारी जिम्मेदारी थी। डॉ. ओमकार ने सुबह 11 बजे के करीब मां प्रेमला व भाई से फोन पर बात की। उसने मां को आश्वस्त किया कि एचओडी थीसिस सबमिट करने का दबाव बना रही थी, वो काम उसने पूरा कर लिया है। वह अब जल्द घर लौटेगा।
  6. भाई ने इसके बाद रात 11 बजे के करीब भाई ओमकार की मौत की सूचना परिवार को दी तो कोहराम मच गया। पिता माणिक ने बताया कि बेटी की सगाई के लिए भी एचओडी ने छुट्टी नहीं दी थी, लिहाजा बेटा ओमकार 48 घंटे लगातार ड्यूटी कर अवकाश लेकर सगाई में पहुंचा था।

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