11 साल के इस ऑटिज्म पीडि़त मासूम को स्टेम सेल थेरेपी से मिला जिंदगी का उपहार
नवी मुंबई के नेरुल में स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट बना वरदान
60 से अधिक देशों के 8000 मरीजों का किया जा चुका सफल इलाज
असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त हरियाणा के मरीजों के लिए 27 जुलाई को चंडीगढ़ में आयोजित होने जा रहा है निशुल्क स्टेमसेल थेरेपी परामर्श शिविर
मीडिया जंक्शन न्यूज
रोहतक। नवी मुंबई के नेरुल में स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट स्टेम सेल थेरेपी और रिहैबिलेशन के माध्यम से असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण बना है।सर्जिकल सेवाओं की प्रमुख व न्यूरो सर्जन रिचा बनसोड ने बताया कि न्यूरोजेन बीएसआई की स्थापना स्टेम सेल थेरेपी के जरिए सुरक्षित और प्रभावी तरीके से असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों की मदद करने और उनके लक्षणों और शारीरिक विकलांगता से राहत प्रदान करने के लिए की गई है। न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट न्यूरोलॉजिकल विकार मसलन ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी मानसिक मंदता ब्रेन स्ट्रोक मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी सिर में चोटए सेरेबेलर एटाक्सिया डिमेंशिया मोटर न्यूरॉन रोगए मल्टीपल स्केलेरॉसिस और न्यूरोसाइकिएट्रिक विकार के लिए स्टेम सेल थेरेपी और समग्र पुनर्वास प्रदान करता है। डा. रिचा बनसोड अब तक इस संस्थान ने 60 से अधिक देशों के 8000 मरीजों का सफ लतापूर्वक उपचार किया है। न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट ने हरियाणा के न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों के लिए आगामी 27 जुलाई को चंडीगढ़ में एक नि:शुल्क कार्यशाला व ओपीडी परामर्श शिविर का आयोजन कर रहा हैं। न्यूरोजेन को एहसास है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी इत्यादि विकारों से पीडि़त मरीजों को सिर्फ परामर्श के उद्देश्य से मुंबई तक की यात्रा करना काफी तकलीफदेह होता है इसलिए मरीजों की सुविधा के लिए इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
जानें क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसार्डर
न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की सर्जिकल सेवाओं की प्रमुख व अग्रणी न्यूरोसर्जन डॉ. रिचा बनसोड ने बताया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसार्डर एएसडी बचपन की आम न्यूरो साइकिएट्रिक बीमारियों में से एक है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 68 में से एक बच्चे में यह समस्या पाई गई है तो भारत में हर 250 में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीडि़त है और जागरूकता एवं उम्दा निदान के चलते यह संख्या आंकड़ों के लिहाज से बढ़ रही है। यह जानकर झटका लगता है कि बच्चे का ऑटिज्म पीडि़त होना अधिकांश माता-पिता के लिए जीवन को बदलने वाला अनुभव होता है। ऑटिस्टिक लक्षणों वाले ऑटिज्मग्रस्त बच्चे की परवरिश अभिभावकों के लिएए खासकर माताओं के लिए एक निरंतर चुनौती की तरह होता है क्योंकि यह थकाऊ लंबी और अकेले रोलर कोस्टर की सवारी करने जैसी प्रक्रिया है। ऑटिज्म बचपन का एक विकार है जो बोलने में दिक्कतए अतिसक्रियताए आक्रामक व्यवहार और सामाजिक संपर्क में कठिनाई के परिणाम प्रकट करता है। वर्तमान में भारत में तकरीबन एक करोड़ बच्चे इससे प्रभावित हैं जिनका दवाओं के सहारे लाक्षणिक राहत विशेष शिक्षा ऑक्युपेशनल स्पीच और बिहैवियरल थेरेपी के साथ इलाज किया जा रहा है। एलटीएमजी अस्पताल और एलटीएम मेडिकल कॉलेज सायन मुंबई के प्रोफेसर एवं न्यूरोसर्जरी के प्रमुख और न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आलोक शर्मा बताया कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति के विकास पर एक नजर डालने से पता चलता है कि मुश्किल लाइलाज बीमारियों का समाधान अक्सर मल्टी डिसिप्लीनरी अप्रोच से मिलता है। यह तभी होता है जब लाइलाज या उपचार के लिहाज से मुश्किल विकारों के मामलों में अलग.अलग विशेषताओं के लोग अपने ज्ञानए कौशल और संसाधनों का संयुक्त रूप से प्रयोग करते हैं।
न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उप निदेशक और चिकित्सा सेवा प्रमुख डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा कि ऑटिज्म उच्च मानसिक कार्यों में दोष का कारण बनता है और बच्चों को अतिसक्रियए आक्रामक बनाता है और उनके सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। बोलचाल भाषा और संचार कौशल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऐसे बच्चे सामान्य स्कूलों में नहीं जा पाते हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए माता पिता या देखभाल करने वालों पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। बच्चे का ऑटिज्म से पीडि़त होना समग्र परिवार को भावनात्मक सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करता है। यह सामान्यत: लड़कियों के मुकाबले लड़कों में अधिक पाया जाता है। डॉ. आलोक शर्मा ने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि श्स्टेम सेल थेरेपी ऑटिज्म के लिए उपचार के नए विकल्प के रूप में उभर रही है। इस उपचार में आणविकए संरचनात्मक और कार्यात्मक स्तर पर क्षतिग्रस्त तंत्रिका ऊतकों की मरम्मत की क्षमता है।
अब ठीक है हिसार का 11 वर्षीय जय
हरियाणा के हिसार के 11 वर्षीय बच्चे जय बामेल का जिक्र करते हुए बताया कि जय का जन्म सही समय पर सीजेरियन प्रक्रिया द्वारा हुआ। तब उसकी माता की उम्र 26 वर्ष थी और गर्भावस्था से पहले या बाद में किसी तरह की समस्या नहीं देखी गई थी। उसके परिवार में ऑटिज्म या संबंधित विकारों का कोई इतिहास नहीं था। जय का जन्म एक स्वस्थ बच्चे के रूप में हुआ था और प्रारंभिक कुछ वर्षों तक उसका विकास भी सामान्य ढंग से हो रहा था। उसने पहले साल में चलना शुरू कर दिया और उसकी सभी प्रेरक पेशियां सामान्य थीं। दो साल का होते तक उसने कुछ शब्द बोलना भी शुरू कर दिया। इन शुरुआती वर्षों में जय को बाकी रह गया टीका दिया गया। जय के अभिभावकों को आशंका है कि इसी के चलते जय में न्यूरोलॉजिकल गिरावट आई। हालांकि किसी भी चिकित्सकीय नैदानिक परीक्षण से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जब वह ढाई साल का हुआ तब उसके पिता संदीप और माता सोमी ने उसके व्यवहार में कुछ असामान्य बदलाव देखे।उसका भाषण बिगड़ गया और अतिसक्रिय व्यवहार में वृद्धि हुई। उसे एक सामान्य स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाया गयाए जिसने एडीएचडी ;अटेंशन डेफिशिट हाइपरएक्टिविटी डिसॉर्डर की आशंका जताई। उसे कई चिकित्सकों दिखाया गया परंतु ठीक नही हुआ। जय के माता पिता को अमेरिका के अपने एक दूर के रिश्तेदार से नवी मुंबई स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के बारे में पता चला ओर बच्चे का मार्च 2018 में ईलाज करवाया उसकी आयु दस वर्ष की थी। न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में जय का एक स्वनिर्धारित पुनर्वास कार्यक्रम के साथ स्टेम सेल थेरेपी उपचार किया गया। अपने.अपने क्षेत्र के सबसे अनुभवी पेशेवरों के मार्गदर्शन में उसे व्यावसायिक चिकित्साएं फिजियोथेरेपी स्पीच थेरेपी और मनोवैज्ञानिक परामर्श का एक संयोजित कार्यक्रम प्रदान किया गया। स्टेम सेल थेरेपी के बाद जय में दिखाई दिए मुख्य सुधारों में पाया गया कि निर्देशों का पालन करने की उसकी क्षमता में सुधार आया है जय अब विशेष स्कूल में जाता है और पिछले 6 वर्षों से विशेष। शिक्षक उसे घर पर पढ़ा रहे हैं। जय के पिता संदीप और माता सोमी का कहना है कि अब तक जहां इस समस्या का कोई उपचार नहीं उपलब्ध था हमने अपने बच्चे में सुधार के लिए इस नई अवधारणा को आजमाने का प्रयास किया। इसमें दृढ़ता और काफी धैर्य और प्रोत्साहन की जरूरत होती है। जय अब अपने छोटे भाई दुष्यंत के साथ खेल.कूद और दैनिक गतिविधियों में व्यस्त होता है।
फ्री परामर्श के लिए यह है हेल्पलाईन नंबर
असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीज इस नि:शुल्क शिविर में परामर्श के लिए समय लेने के लिए पुष्कला मोबाइल नंबर. 09821529653 व 09920200400 से संपर्क कर सकते हैं।
नवी मुंबई के नेरुल में स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट बना वरदान
60 से अधिक देशों के 8000 मरीजों का किया जा चुका सफल इलाज
असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त हरियाणा के मरीजों के लिए 27 जुलाई को चंडीगढ़ में आयोजित होने जा रहा है निशुल्क स्टेमसेल थेरेपी परामर्श शिविर
मीडिया जंक्शन न्यूज
रोहतक। नवी मुंबई के नेरुल में स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट स्टेम सेल थेरेपी और रिहैबिलेशन के माध्यम से असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण बना है।सर्जिकल सेवाओं की प्रमुख व न्यूरो सर्जन रिचा बनसोड ने बताया कि न्यूरोजेन बीएसआई की स्थापना स्टेम सेल थेरेपी के जरिए सुरक्षित और प्रभावी तरीके से असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों की मदद करने और उनके लक्षणों और शारीरिक विकलांगता से राहत प्रदान करने के लिए की गई है। न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट न्यूरोलॉजिकल विकार मसलन ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी मानसिक मंदता ब्रेन स्ट्रोक मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी सिर में चोटए सेरेबेलर एटाक्सिया डिमेंशिया मोटर न्यूरॉन रोगए मल्टीपल स्केलेरॉसिस और न्यूरोसाइकिएट्रिक विकार के लिए स्टेम सेल थेरेपी और समग्र पुनर्वास प्रदान करता है। डा. रिचा बनसोड अब तक इस संस्थान ने 60 से अधिक देशों के 8000 मरीजों का सफ लतापूर्वक उपचार किया है। न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट ने हरियाणा के न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीजों के लिए आगामी 27 जुलाई को चंडीगढ़ में एक नि:शुल्क कार्यशाला व ओपीडी परामर्श शिविर का आयोजन कर रहा हैं। न्यूरोजेन को एहसास है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजुरी मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी इत्यादि विकारों से पीडि़त मरीजों को सिर्फ परामर्श के उद्देश्य से मुंबई तक की यात्रा करना काफी तकलीफदेह होता है इसलिए मरीजों की सुविधा के लिए इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
जानें क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसार्डर
न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की सर्जिकल सेवाओं की प्रमुख व अग्रणी न्यूरोसर्जन डॉ. रिचा बनसोड ने बताया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसार्डर एएसडी बचपन की आम न्यूरो साइकिएट्रिक बीमारियों में से एक है। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 68 में से एक बच्चे में यह समस्या पाई गई है तो भारत में हर 250 में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीडि़त है और जागरूकता एवं उम्दा निदान के चलते यह संख्या आंकड़ों के लिहाज से बढ़ रही है। यह जानकर झटका लगता है कि बच्चे का ऑटिज्म पीडि़त होना अधिकांश माता-पिता के लिए जीवन को बदलने वाला अनुभव होता है। ऑटिस्टिक लक्षणों वाले ऑटिज्मग्रस्त बच्चे की परवरिश अभिभावकों के लिएए खासकर माताओं के लिए एक निरंतर चुनौती की तरह होता है क्योंकि यह थकाऊ लंबी और अकेले रोलर कोस्टर की सवारी करने जैसी प्रक्रिया है। ऑटिज्म बचपन का एक विकार है जो बोलने में दिक्कतए अतिसक्रियताए आक्रामक व्यवहार और सामाजिक संपर्क में कठिनाई के परिणाम प्रकट करता है। वर्तमान में भारत में तकरीबन एक करोड़ बच्चे इससे प्रभावित हैं जिनका दवाओं के सहारे लाक्षणिक राहत विशेष शिक्षा ऑक्युपेशनल स्पीच और बिहैवियरल थेरेपी के साथ इलाज किया जा रहा है। एलटीएमजी अस्पताल और एलटीएम मेडिकल कॉलेज सायन मुंबई के प्रोफेसर एवं न्यूरोसर्जरी के प्रमुख और न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आलोक शर्मा बताया कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति के विकास पर एक नजर डालने से पता चलता है कि मुश्किल लाइलाज बीमारियों का समाधान अक्सर मल्टी डिसिप्लीनरी अप्रोच से मिलता है। यह तभी होता है जब लाइलाज या उपचार के लिहाज से मुश्किल विकारों के मामलों में अलग.अलग विशेषताओं के लोग अपने ज्ञानए कौशल और संसाधनों का संयुक्त रूप से प्रयोग करते हैं।
न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उप निदेशक और चिकित्सा सेवा प्रमुख डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा कि ऑटिज्म उच्च मानसिक कार्यों में दोष का कारण बनता है और बच्चों को अतिसक्रियए आक्रामक बनाता है और उनके सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। बोलचाल भाषा और संचार कौशल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऐसे बच्चे सामान्य स्कूलों में नहीं जा पाते हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए माता पिता या देखभाल करने वालों पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। बच्चे का ऑटिज्म से पीडि़त होना समग्र परिवार को भावनात्मक सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करता है। यह सामान्यत: लड़कियों के मुकाबले लड़कों में अधिक पाया जाता है। डॉ. आलोक शर्मा ने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि श्स्टेम सेल थेरेपी ऑटिज्म के लिए उपचार के नए विकल्प के रूप में उभर रही है। इस उपचार में आणविकए संरचनात्मक और कार्यात्मक स्तर पर क्षतिग्रस्त तंत्रिका ऊतकों की मरम्मत की क्षमता है।
अब ठीक है हिसार का 11 वर्षीय जय
हरियाणा के हिसार के 11 वर्षीय बच्चे जय बामेल का जिक्र करते हुए बताया कि जय का जन्म सही समय पर सीजेरियन प्रक्रिया द्वारा हुआ। तब उसकी माता की उम्र 26 वर्ष थी और गर्भावस्था से पहले या बाद में किसी तरह की समस्या नहीं देखी गई थी। उसके परिवार में ऑटिज्म या संबंधित विकारों का कोई इतिहास नहीं था। जय का जन्म एक स्वस्थ बच्चे के रूप में हुआ था और प्रारंभिक कुछ वर्षों तक उसका विकास भी सामान्य ढंग से हो रहा था। उसने पहले साल में चलना शुरू कर दिया और उसकी सभी प्रेरक पेशियां सामान्य थीं। दो साल का होते तक उसने कुछ शब्द बोलना भी शुरू कर दिया। इन शुरुआती वर्षों में जय को बाकी रह गया टीका दिया गया। जय के अभिभावकों को आशंका है कि इसी के चलते जय में न्यूरोलॉजिकल गिरावट आई। हालांकि किसी भी चिकित्सकीय नैदानिक परीक्षण से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जब वह ढाई साल का हुआ तब उसके पिता संदीप और माता सोमी ने उसके व्यवहार में कुछ असामान्य बदलाव देखे।उसका भाषण बिगड़ गया और अतिसक्रिय व्यवहार में वृद्धि हुई। उसे एक सामान्य स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाया गयाए जिसने एडीएचडी ;अटेंशन डेफिशिट हाइपरएक्टिविटी डिसॉर्डर की आशंका जताई। उसे कई चिकित्सकों दिखाया गया परंतु ठीक नही हुआ। जय के माता पिता को अमेरिका के अपने एक दूर के रिश्तेदार से नवी मुंबई स्थित न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के बारे में पता चला ओर बच्चे का मार्च 2018 में ईलाज करवाया उसकी आयु दस वर्ष की थी। न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में जय का एक स्वनिर्धारित पुनर्वास कार्यक्रम के साथ स्टेम सेल थेरेपी उपचार किया गया। अपने.अपने क्षेत्र के सबसे अनुभवी पेशेवरों के मार्गदर्शन में उसे व्यावसायिक चिकित्साएं फिजियोथेरेपी स्पीच थेरेपी और मनोवैज्ञानिक परामर्श का एक संयोजित कार्यक्रम प्रदान किया गया। स्टेम सेल थेरेपी के बाद जय में दिखाई दिए मुख्य सुधारों में पाया गया कि निर्देशों का पालन करने की उसकी क्षमता में सुधार आया है जय अब विशेष स्कूल में जाता है और पिछले 6 वर्षों से विशेष। शिक्षक उसे घर पर पढ़ा रहे हैं। जय के पिता संदीप और माता सोमी का कहना है कि अब तक जहां इस समस्या का कोई उपचार नहीं उपलब्ध था हमने अपने बच्चे में सुधार के लिए इस नई अवधारणा को आजमाने का प्रयास किया। इसमें दृढ़ता और काफी धैर्य और प्रोत्साहन की जरूरत होती है। जय अब अपने छोटे भाई दुष्यंत के साथ खेल.कूद और दैनिक गतिविधियों में व्यस्त होता है।
फ्री परामर्श के लिए यह है हेल्पलाईन नंबर
असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीडि़त मरीज इस नि:शुल्क शिविर में परामर्श के लिए समय लेने के लिए पुष्कला मोबाइल नंबर. 09821529653 व 09920200400 से संपर्क कर सकते हैं।




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