हास्य-व्यंग्य कविता : हो गया चुनाव


हास्य-व्यंग्य कविता : हो गया चुनाव 
चुनाव हो गया, बहुत से जीते बहुत से हारे, 
बहुतों ने वोट दिया,कितनों ने नोट दिया। 
कुछ को तालियाँ मिलींकुछ को गालियाँ मिलीं। 
हारने वाले रोए, वोटर मौज से सोए, 
देश कहां जाता है, किसी को पता नहीं। 
सब यही कहते हैं हमारी खता नहीं।
गांव में खाने को लोग हैं तरसते, 
शहर में ओस बन रुपये बरसते। 
सिनेमा में चारों ओर मेला और धक्का है, 
कहीं बना काशी है, कहीं बना मक्का है।
साड़ियाँ लेने दुकानों पर जाइए, 
देख-देख के उनकी डिजाइन मर जाइए। 
युवक ऐसे सूटों के दरिया में बहता है, 
देश में गरीबी है, कौन यह कहता है। 
बैण्ड सरकार के चाहे कोई बजा ले, 
कुरसी के शासन के कोई भी मजा ले। 
पेट नहीं भरता है जब तक हमारा, 
कोई नहीं अच्छा हमें लगता है नारा। 
-बेढब बनारसी 

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