किसानों की आय दोगुना करने का यह है हरियाणा सरकार का ‘मनोहर’ प्लान
पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार करेगी सरकार
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। प्रदेश के किसानों की आय दोगुणा करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सरकार अब फसलों के विविधीकरण और पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार करेगी। सीएम ने बताया कि नई दिल्ली में भारतीय कृषि में परिवर्तन के संदर्भ में नीति आयोग की उच्चाधिकार प्राप्त मुख्यमंत्रियों की समिति की प्रथम बैठक में हरियाणा सरकार की ‘जल ही जीवन है’ योजना की प्रशंसा की गई है और दूसरे राज्यों में भी इस योजना का अनुसरण किए जाने पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों के विविधीकरण के साथ ही सामानांतर रूप से शहरी क्षेत्रों के चारों ओर कृषि क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सुदृढ किए जाने की दिशा में देश में पेरि-अर्बन कृषि को आधार बनाकर नई योजनाएं तैयार करने पर भी विचार विमर्श हुआ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश का काफी कृषि क्षेत्र स्थित होने के दृष्टिगत पेरि-अर्बन कृषि हरियाणा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार होने से कृषि क्षेत्र आर्थिक रूप से सुदृढ होने साथ ही शहरों में लोगों को ताजा खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुणा किए जाने की दिशा में कृषि उत्पादों के विपणन के संदर्भ में किसानों के लिए भंडारण सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी विवरण तैयार किया जाएगा। कृषि फसलों की खरीदारी में केंद्र की भागीदारी बढाए बारे भी विचार विमर्श हुआ। लघु सिंचाई योजनाओं में केंद्रीय अनुदान बढाए जाने की आवश्यकता पर बैठक में विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार सिंचाई योजनाओं में 85 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। केंद्रीय अनुदान में वृद्धि किए जाने से लघु सिंचाई योजनाओं को और अधिक विस्तार मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि भारतीय कृषि में परिवर्तन के संदर्भ में नीति आयोग की उच्चाधिकार प्राप्त मुख्यमंत्रियों की समिति की प्रथम बैठक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व समिति के संयोजक देवेन्द्र फडनवीस की अध्यक्षता में हुई। समिति की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी व अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भाग लिया, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार करेगी सरकार
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। प्रदेश के किसानों की आय दोगुणा करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सरकार अब फसलों के विविधीकरण और पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार करेगी। सीएम ने बताया कि नई दिल्ली में भारतीय कृषि में परिवर्तन के संदर्भ में नीति आयोग की उच्चाधिकार प्राप्त मुख्यमंत्रियों की समिति की प्रथम बैठक में हरियाणा सरकार की ‘जल ही जीवन है’ योजना की प्रशंसा की गई है और दूसरे राज्यों में भी इस योजना का अनुसरण किए जाने पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों के विविधीकरण के साथ ही सामानांतर रूप से शहरी क्षेत्रों के चारों ओर कृषि क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सुदृढ किए जाने की दिशा में देश में पेरि-अर्बन कृषि को आधार बनाकर नई योजनाएं तैयार करने पर भी विचार विमर्श हुआ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हरियाणा प्रदेश का काफी कृषि क्षेत्र स्थित होने के दृष्टिगत पेरि-अर्बन कृषि हरियाणा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है और पेरि-अर्बन कृषि के लिए नई योजनाएं तैयार होने से कृषि क्षेत्र आर्थिक रूप से सुदृढ होने साथ ही शहरों में लोगों को ताजा खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुणा किए जाने की दिशा में कृषि उत्पादों के विपणन के संदर्भ में किसानों के लिए भंडारण सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी विवरण तैयार किया जाएगा। कृषि फसलों की खरीदारी में केंद्र की भागीदारी बढाए बारे भी विचार विमर्श हुआ। लघु सिंचाई योजनाओं में केंद्रीय अनुदान बढाए जाने की आवश्यकता पर बैठक में विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार सिंचाई योजनाओं में 85 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। केंद्रीय अनुदान में वृद्धि किए जाने से लघु सिंचाई योजनाओं को और अधिक विस्तार मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि भारतीय कृषि में परिवर्तन के संदर्भ में नीति आयोग की उच्चाधिकार प्राप्त मुख्यमंत्रियों की समिति की प्रथम बैठक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व समिति के संयोजक देवेन्द्र फडनवीस की अध्यक्षता में हुई। समिति की बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी व अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भाग लिया, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।


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