खुद को प्रगतिशील मुद्दों के साथ जोड़ें खाप पंचायतें

खुद को प्रगतिशील मुद्दों के साथ जोड़ें खाप पंचायतें 
राखी गढ़ी में राखी बारह खाप के नवनिर्मित चबुतरे पर बोले वित्त मंत्री 





हिसार। समय के साथ नई सामाजिक चुनौतियां सामने आती है और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए नए सामाजिक मूल्यों का गठन किया जाता है। हमारे ऋषि मुनि इस तथ्य से भली भांति परिचित थे इसलिए उन्होंंने व्यवस्था की थी जिसके अनुसार लोग मिल-बैठकर आपसी विचार विमर्श पर भविष्य की चुनौतियों का समाधान निकालें। स्वामी विवेकानंद ने भी सत्यार्थ प्रकाश के संकलन उपरांत यह स्पष्ट किया कि वेद का विज्ञान अटल है परन्तु भविष्य में समाज के पास किस प्रकार की चुनौतियां आएंगी इसका अनुमान लगाना मुशकिल है। यह बात आज वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने गांव राखी गढ़ी में राखी बारह खाप के नवनिर्मित चबुतरे पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहीं। वित्त मंत्री को इस अवसर पर 17 गांवों के 12 खाप पंचायतों के सरपंचों ने फूलमाला व पगड़ी पहनाकार स्वागत किया। वित्तमंत्री ने कहा कि हजारों सालों से खाप पंचायतों ने बिना लिखित कानून के गांव के लोगों के आपसी झगड़ों को निपटाने का काम किया है। हम चाहे कितने ही नए कानून बना लें परन्तु फिर भी समाज में नई परिस्थितियां उत्पन्न होती रहेंगी और उन परिस्थितियों के कारण पनपे व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए नए कानून बनाने पड़ेगें। कानून बनने तक समाज को ऐसी परिस्थितियों में स्वयं का संचालन करना पड़ेगा जो मिल-जुलकर आपसी भाईचारे के साथ ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानव समाज में सबसे पहला नियम परमात्मा का है जिसके अनुसार सभी जीव एक समान है। दूसरा नियम प्रकृति का है जिसमें हर जीव को प्रकृति के अनुसार आचरण करना है और उसे ऋतु, दिन -रात, मौसम आदि के अनुसार व्यवहार करना पड़ता है अन्यथा वह कष्ट में आ सकता है। तीसरा देश का नियम होता है। व्यक्ति जिस भुखण्ड या देश में रहता है उस देश में लागू कानून की पालना करना उसके लिए अनिवार्य है। इनके अलावा मनुष्य जिस समाज में रहता है उसे उसकी मयार्दा का पालन करना पड़ता है और सामाजिक बन्धनों मे रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश आगे बढ़ता है सामाजिक मूल्य उसके अनुसार तय करने पड़ते है। हमारे साधु संतो ने हमे इतनी आजादी दी कि बदलते समय के अनुसार हम अपने मूल्यों को ढाल सकें। हर 12वर्षों में कुंभ के मेले का आयोजन का सार भी यही है कि हम इन वर्षों में समाज में आए हुए परिवर्तन का मूल्याकंन एक स्थान पर  कर सकें। हमारे भारत का समाज सदियों से इसी परम्परा पर चलता आया है और खाप पंचायते इसी परम्परा के आधार विकसित हुई है। हमारे बुजुगों ने गांव में 36 बिरादरी के भाईचारे को कायम करने के साथ-साथ आपसी झगड़ों को मिल-जुलकर आपस में बातचीत के माध्यम से निपटाया जा सकता है। खाप पंचायतों ने आपसी झगड़ों का निपटान मिल-जुलकर करती रही है। इस अवसर पर बारह खाप के सभी सरपंच, वरिष्ठ भाजपा नेता राजेन्द्र लांबा, अजय सिंधु,सुशील खरब, जयबीर माजरा, सुखबीर संधु, मास्टर टीकाराम, सुभाष श्योराण, सत्यवान दुहन, राजेश नाड़ा, रामफल जांगड़ा, जिला पार्षद रमेश श्योराण, राधा कृष्ण, पाला राम, महाराज प्रेमनाथ, रामफल ठेकेदार, चन्द प्रकाश, ओमप्रकाश ढाण्डा समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

हर नागरिक के लिए पहले हो देश व समाज 
वित्त मंत्री ने कहा कि खाप पंचायतों को बदलते परिवेश में प्रगतिशील सोच को अपनाते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ हरियाणा-स्वस्थ हरियाणा जैसे नए सामाजिक मुद्दों के साथ खुद को जोड़ना चाहिए। उन्होंने 12 खाप चबुतरे पर ईमारत के निर्माण में निजी कोष से 21 लाख रूप की धन राशि देने की घोषणा करते हुए कहा कि आज जब हरियाणा प्रदेश में बिना पर्ची-बिना खर्ची के नौकरियां मिल रही हंै तो ऐसे में यहां बनने वाले भवन में बच्चों के पढ़ने के लिए लाईब्रेरी व कोचिंग सैंटर का निर्माण करवाया जाए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को कृषि के साथ-साथ उद्योग धंधों व सेवा-क्षेत्र से जुडे अन्य व्यवस्याओं मेंंं आगे बढने के लिए प्रेरित करें ताकि भारतीय अर्थ व्यवस्था मेंं उनकी हिस्सेदारी बढ सके। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के लिए देश व समाज पहले होना चाहिए और राजनीति का मूल मंत्र भी विकास होना चाहिए।

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