सक्सेस मंत्र : धैर्य रखें, जरूर मिलेगी सफलता
हमेशा याद रखें हर फैसला अंतिम नहीं होता
नई दिल्ली। 23 मई यानी चुनाव परिणाम वाले दिन के लिए एक खास मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था जिसमें सभी पार्टी समर्थकों को कुछ एहतियात रखने को कहा गया है, जैसे, वे हल्का नाश्ता कर बीपी की दवा ले लें, ठंडा पानी पास रखें, गहरी सांस लें, टीवी की आवाज कम रखें और बीच-बीच में हंसी मजाक करते रहें। कुल मिलाकर, इस संदेश में मजाकिया अंदाज में चुनाव परिणाम को दिमाग पर हावी न करते हुए शरीर का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। भले ही इस संदेश पर हमें हंसी आए, लेकिन असल जिंदगी में बहुत सारे लोग अपने फैसलों के प्रति इस कदर संवेदनशील होते हैं कि उन्हें यह याद दिलाना पड़ता है कि कोई फैसला अंतिम नहीं होता। पहले क्या चुनना है, इसकी बेचैनी होती है, फिर उसके नतीजों की चिंता हमें चैन से नहीं बैठने देती। बात सिर्फ यहां तक है, तो भी सही है। पर होता यह है कि हम अपने ही चुनाव को एकमात्र सच मान लेते हैं। उस पर दोबारा विचार करने की गुंजाइश नहीं छोड़ते। अपने से अलग बात हमें अच्छी नहीं लगती। बस किसी भी कीमत पर खुद को सही साबित करने में लगे रहते हैं। इस सिलसिले में अपने अहं की उंगली थामे हम इतने आगे बढ़ जाते हैं कि वापसी मुश्किल हो जाती है। अपने चुनावों पर अड़ने और अटकने का यह रवैया कुछ लोगों में आदत का रूप ले लेता है। फिर वह छोटी-छोटी बातों जैसे कौन से रूट से जाएं, किस तरह खाएं, क्या खाएं, कहां जाएं, कौन सी टीम जीतेगी, कौन खिलाड़ी अच्छा है, आदि मामूली बातों पर तैश में आ जाते हैं। दुनिया में सफलता पाने के लिए धैर्य या धीरज का होना बहुत जरुरी होता है। बहुत से ऐसे कार्य होते हैं जिन्हें पूरा होने में काफी समय लगता है, ऐसे में यदि उस कार्य को करने वाले व्यक्ति में धैर्य नहीं है तो या तो वह उस काम को बीच में ही छोड़ देगा या फिर उस काम को जल्दी पूरा करने की कोशिश करेगा और आधा-अधूरा बीच में ही छोड़ देगा।
इस तरह लें बेहतर फैसले
मौजूदा हालात और विकल्पों पर ढंग से गौर करें।
भेड़चाल में न फंसें। अपने मूल्यों और पसंद-नापसंद को तथा दिल की भी सुनें।
अपने अहं को परे रख दूसरों के नजरिये को सुनें और समझें।
अपने फैसलों पर लगातार सोचें। गलती सुधारने पर ध्यान दें।
गलती होने पर न अड़ें, न ही दूसरों को दोष दें।
जिन फैसलों में दूसरे भी शामिल हैं, उसमें उनसे भी राय लें।
अपने सही-गलत अनुभवों से जरूर सीखें।
हर बात पर खुद को साबित करने का दबाव न रखें।
पड़ाव है, मंजिल नहीं
इसमें दो राय नहीं कि जीवन में सही फैसलों की बड़ी भूमिका होती है। अच्छे फैसले हमें दूसरों की नजर में ऊंचा उठाते हैं। अपनी बात सही साबित होने पर हमें खुशी मिलती है और हम आत्मविश्वास से भर उठते हैं। पर हमेशा हमारे फैसले सही ही होंगे, ऐसा नहीं होता। हम जितना अड़ते हैं, उतना पीछे हटने में दिक्कत महसूस होती है। उतना ही उनके गलत होने पर दुखी हो उठते हैं। फिर जो बात समझनी है वह यह कि हर फैसला, जीवन-मरण, हार या जीत का प्रश्न नहीं होता। एक्सपर्ट की मानें तो हमारी सोच पर परिवेश का गहरा असर पड़ता है। सही फैसले पर शाबाशी और गलत चुनने पर डांट या मजाक उड़ाने जैसी बातें हमें फैसलों के प्रति संवेदनशील बना देती हैं। जितना कम हमें गलती करने की छूट होती है, उतना ही हम प्रयोग करना, नया सोचना बंद कर देते हैं।' दरअसल जीवन में बेहतरी की प्रक्रिया लगातार चलती है। हर फैसले के भी कई पड़ाव होते हैं। ऐसे में गलत पड़ाव पर जहां मुड़कर रास्ता बदलने की जरूरत होती है, वहीं उसे मंजिल बना लेना समझदारी नहीं है। यही वजह है कि कामयाब लोग गलत फैसलों से भी बहुत कुछसीख लेते हैं।
मत बनें फैसलों के गुलाम
हर फैसला एक खास समय, स्थिति और समझ के आधार पर लिया जाता है। एक दौर या हालात में लिया गया फैसला हर दौर में सही ही होगा, ऐसा नहीं होता। हर बात को भीष्म प्रतिज्ञा का रूप दे देना सही नहीं होता। ऐसा करना हमें अपने फैसलों का गुलाम बना देता है। गुलामी कोई भी हो, हमें आगे बढ़ने से रोकती है।
-मीडिया जंक्शन फीचर्स डेस्क


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