हरियाणा : 5 साल मेें 146 सरकारी स्कूल बंद, 483 प्राईवेट स्कूल खुले, 4.87 लाख बच्चों ने छोड़ा सरकारी स्कूल

5 साल मेें 146 सरकारी स्कूल बंद, 483 प्राईवेट स्कूल खुले, 4.87 लाख बच्चों ने छोड़ा सरकारी स्कूल 

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने भाजपा सरकार को आंकड़ों के साथ लिया आड़े हाथ 
गांव के सरकारी स्कूलों के बच्चों की शिक्षा का स्तर चिंताजनक, लेकिन सरकार सो रही 
फाईल फोटो 

16 सितंबर 2019, 10:24 
PM 

हरियाणा मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। हरियाणा मेंं पिछले 5 साल में 146 सरकारी स्क्ूल बंद हो गए जबकि इसी दरमियान 483 नए प्राईवेट खुले। इन पांच सालों में कुल 4.87 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों से बाहर हा गए। आज सोमवार को यह आंकड़े पेश कर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया। प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े आँकड़ें इशारा कर रहे हैं कि खट्टर सरकार हरियाणा के भविष्य को लेकर सजग नहीं है और पिछली कांग्रेस सरकार की तरह जनता की आँखों में केवल धूल झोंकने का काम कर रही है। योगेन्द्र यादव ने कहा कि खट्टर सरकार ने शिक्षा के निजीकरण को और भी तेज कर गरीब घर के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

4 साल की आयु के 62 तो 6-14 आयु के 55 फीसद बच्चे जा रहे प्राईवेट स्कूलों में 
"असर" सर्वेक्षण 2018 के अनुसार हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 14 साल की आयु के अब 55फीसद बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जा रहे हैं। प्री स्कूल में तो हालत और भी बुरी है। 4 साल की आयु के 62 फीसद बच्चे प्राइवेट स्कूल या नर्सरी में जा रहे हैं जबकि केवल 12 फीसद सरकारी स्कूल या नर्सरी में हैं। सन 2017 में हरियाणा में अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन काउंसिल की घोषणा के बाद नर्सरी शिक्षा पर कोई भी कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीण विद्यार्थियों का शिक्षा स्तर बेहद कमजोर
स्वराज इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गोदारा ने शिक्षा के स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि "असर" सर्वेक्षण 2018 के मुताबिक हरियाणा के ग्रामीण विद्यार्थियों में शिक्षा का स्तर बहुत कमजोर है। सरकारी स्कूलों में कक्षा तीन में पढ़ने वाले 66 फीसद बच्चे कक्षा दो की हिंदी की पुस्तक नहीं पढ़ सकते। हालत इतनी खराब है कि कक्षा पांच में पढ़ने वाले 42 फीसद विद्यार्थी भी कक्षा दो की हिंदी की पुस्तक का सामान्य पैरा नहीं पढ़ सकते। इसी सर्वेक्षण के मुताबिक गांव के सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे एक अंक का हासिल वाला भाग नहीं कर सकते।

जनता के पैसे से महंगे विज्ञापन देकर गुमराह कर रही सरकार 
स्वराज इंडिया ने सवाल उठाया है कि इतनी चिंताजनक स्थिति के बावजूद भी खट्टर सरकार तनिक भी गंभीर नहीं दिखती। सरकार का पूरा ध्यान जनता के पैसे से ही मँहगे विज्ञापन देकर जनता को गुमराह करने में लगा हुआ है। जाहिर है पिछली सरकारों की तरह इस सरकार को भी गांव और गरीब की शिक्षा की तनिक भी चिंता नहीं है। स्वराज इंडिया इस स्थिति को पलटने के लिए अपना वैकल्पिक प्रस्ताव जल्द ही हरियाणा की जनता के सामने पेश करेगी।

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