हरियाणा : शिक्षण संस्थानों के बाद अब खेतों में चलेगा पौधगिरी, किसानों की जमीन पर जाएंगे 8 लाख पौधे
13 सितंबर 2019, 11:25 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
चंडीगढ़। जलशक्ति अभियान के तहत बरसात का पानी एकत्रित करने के लिए सरकार ने व्यापक कदम उठाए हैं। प्रदेश के 12000 सार्वजनिक भवनों पर तो बरसाती पानी इक्ट्ठा करने की यह योजना लागू हो चुकी है जबकि शेष 15000 भवनों पर कार्य प्रगति पर है। हरियाणा की मुख्य सचिव श्रीमती केशनी आनन्द अरोड़ा ने अधिकारियों को 15 सितंबर तक प्रदेश के सभी 27 हजार सार्वजनिक भवनों में बारिश के पानी को एक स्थान पर एकत्रित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जल शक्ति अभियान के तहत राज्य में पौधगिरी कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत 86 लाख से अधिक पौधे भी लगाये जा रहे हैं। बैठक में बताया गया कि किसानों की भूमि पर भी 8 लाख से अधिक पौधे लगाये जाएंगे।उन्होने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे जल शक्ति अभियान में जिलों की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए कुरूक्षेत्र, जींद, महेंद्रगढ़, मेवात व भिवानी के उपायुक्त वाटरशेड, जल संरक्षण एवं जल संचयन के साथ-साथ पौधारोपण पर भी बल दें ताकि वे देशभर में पहले 10 स्थानों में शामिल हो सकें। उन्होने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सडकों के साथ-साथ रिज बनाकर पौधा रोपण करें ताकि जल संरक्षण हो सके। श्रीमती अरोड़ा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 21, 22 तथा 23 सितंबर को हरियाणा कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा क्लर्क के पद हेतू ली जाने वाली परीक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करें ताकि परीक्षा सुचारू ढंग से सम्पन्न करवाई जा सके। उन्होने बताया कि इस परीक्षा में 15 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए प्रदेशभर में 1059 केंद्र बनाये गये हैं। इन केंद्रो पर पांच शिफटों में परीक्षा आयोजित करवाई जायेगी। इन केन्द्रों में सुरक्षा के मद्देनजर प्रत्येक कमरे में दो-दो सीसीटीवी कैमरे भी लगाये जाएंगे तथा प्रत्येक जिला स्तर पर उड़नदस्ते का गठन किया जाएगा।
कोई पराली जलाए तो इस मोबाइल एप पर दे सकते हैं सूचना
मुख्य सचिव ने फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जल्द से जल्द 230 सीएससी के माध्यम से कृषि उपकरण खरीद करवाना सुनिश्चित करें ताकि किसान पराली न जला कर इन उपकरणों के माध्यम फसल अवशेषों का प्रबंधन सही ढंग से कर सकें। बैठक में बताया गया कि पराली न जलाने के लिए राज्य की 6 लाख हैक्टेयर भूमि को कवर किया जाएगा और इसके लिए 15 लाख किसानों को मोबाइल के माध्यम से संदेश भेजे जा रहे हैं। उन्होने कहा कि 20 सितंबर से पराली पलटन गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने का कार्य करेगी तथा जियो मैपिंग के माध्यम से पराली जलाने वाले किसानों के खेतों की निगरानी रखेगी। उन्होने कहा कि पराली जलाने की सूचना देने के लिए किसान ऐप भी तैयार किया गया है और इस ऐप के माध्यम से प्रदेश का आम नागरिक भी पराली जलाने की सूचना दे सकता है।


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