हरियाणा मीडिया जंक्शन : भाजपा में क्या हुआ बीती रात, टिकट वितरण से पहले आखिर क्यों बिगड़ी बात ?
54 उम्मीदवारों का नाम लगभग फाइनल, किसी भी वक्त जारी हो सकती है पहली लिस्ट
30 सितंबर 2019, 9:29 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण से पहले ही घमासान छिड़ गया है। गत रात साढ़े नौ बजे प्रेस कांफ्रेंस कर टिकटों का ऐलान करने को तैयार भाजपा में आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि पार्टी को टिकट वितरण का ऐलान टालने के साथ-साथ प्रेस कांफ्रेंस तक रद्द करनी पड़ी। सूत्रों की मानें तो टिकटों को लेकर देरी में परिवारवाद आड़े आ रहा है। चूंकि भाजपा परिवारवाद के सख्त खिलाफ है और राव इंद्रजीत अपनी बेटी को टिकट देने के लिए अड़े हैं। जबकि पार्टी यह पूरी तरह से साफ कर चुकी है कि एक परिवार का कोई भी नेता किसी पद पर है तो उस परिवार से दूसरे को टिकट नहीं दिया जाएगा। अब यदि भाजपा राव इंद्रजीत की बेटी को टिकट देती है तो यह न केवल पार्टी की फजीहत है बल्कि इससे जनता के बीच भी गलत संदेश जाएगा। विरोधियों को भी हमलावर होने का मौका मिल जाएगा और वे भाजपा के सिद्धांतवादी होने की परंपरा पर कटाक्ष करेंगे तथा चुनावी सभाओं में इसे भुनाएंगे। सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए सभी 90 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में पहले चरण के लिए 54 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लग चुकी है। इनकी घोषणा कभी भी हो सकती है। शेष बची सीटों के लिए भी समिति कोई बैठक नहीं करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को शेष सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ सीटों पर अभी पेच फंसा है। सूत्र बता रहे हैं कि राव इंद्रजीत द्वारा बेटी के लिए टिकट मांगने पर ही सारा खेल बिगड़ा है। भाजपा उन्हें मनाने में जुटी है। आज भाजपा हर हाल में टिकटों का ऐलान कर सकती है।
क्या पार्टी के सिद्धांतों से ऊपर हो गए राव इंद्रजीत ?
भाजपा का यदि सिद्धांत है कि वह परिवारवाद के सख्त खिलाफ है तो क्या भाजपा में शामिल नेताओं को इसकी जानकारी नहीं है। यदि भाजपा के सभी नेता जानते हैं कि पार्टी परिवारवादी विचारधारा को महत्व नहीं देती तो क्या राव इंद्रजीत जैसे नेता पार्टी के सिद्धांतों से ऊपर हो गए हैं। क्या उन्हें पार्टी का अनुशासन तोड़े जाने की खुली इजाजत है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आखिर क्या फैसला लेती है। क्या भाजपा राव इंद्रजीत की जिद्द के आगे घुटने टेक देगी या फिर पार्टी के सिद्धांत के मुताबिक टिकट वितरण करेगी, इसका फैसला आज जारी होने जा रही भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में हो जाएगा।
54 उम्मीदवारों का नाम लगभग फाइनल, किसी भी वक्त जारी हो सकती है पहली लिस्ट
30 सितंबर 2019, 9:29 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण से पहले ही घमासान छिड़ गया है। गत रात साढ़े नौ बजे प्रेस कांफ्रेंस कर टिकटों का ऐलान करने को तैयार भाजपा में आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि पार्टी को टिकट वितरण का ऐलान टालने के साथ-साथ प्रेस कांफ्रेंस तक रद्द करनी पड़ी। सूत्रों की मानें तो टिकटों को लेकर देरी में परिवारवाद आड़े आ रहा है। चूंकि भाजपा परिवारवाद के सख्त खिलाफ है और राव इंद्रजीत अपनी बेटी को टिकट देने के लिए अड़े हैं। जबकि पार्टी यह पूरी तरह से साफ कर चुकी है कि एक परिवार का कोई भी नेता किसी पद पर है तो उस परिवार से दूसरे को टिकट नहीं दिया जाएगा। अब यदि भाजपा राव इंद्रजीत की बेटी को टिकट देती है तो यह न केवल पार्टी की फजीहत है बल्कि इससे जनता के बीच भी गलत संदेश जाएगा। विरोधियों को भी हमलावर होने का मौका मिल जाएगा और वे भाजपा के सिद्धांतवादी होने की परंपरा पर कटाक्ष करेंगे तथा चुनावी सभाओं में इसे भुनाएंगे। सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए सभी 90 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में पहले चरण के लिए 54 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लग चुकी है। इनकी घोषणा कभी भी हो सकती है। शेष बची सीटों के लिए भी समिति कोई बैठक नहीं करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को शेष सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ सीटों पर अभी पेच फंसा है। सूत्र बता रहे हैं कि राव इंद्रजीत द्वारा बेटी के लिए टिकट मांगने पर ही सारा खेल बिगड़ा है। भाजपा उन्हें मनाने में जुटी है। आज भाजपा हर हाल में टिकटों का ऐलान कर सकती है।
क्या पार्टी के सिद्धांतों से ऊपर हो गए राव इंद्रजीत ?
भाजपा का यदि सिद्धांत है कि वह परिवारवाद के सख्त खिलाफ है तो क्या भाजपा में शामिल नेताओं को इसकी जानकारी नहीं है। यदि भाजपा के सभी नेता जानते हैं कि पार्टी परिवारवादी विचारधारा को महत्व नहीं देती तो क्या राव इंद्रजीत जैसे नेता पार्टी के सिद्धांतों से ऊपर हो गए हैं। क्या उन्हें पार्टी का अनुशासन तोड़े जाने की खुली इजाजत है। अब देखना यह होगा कि पार्टी आखिर क्या फैसला लेती है। क्या भाजपा राव इंद्रजीत की जिद्द के आगे घुटने टेक देगी या फिर पार्टी के सिद्धांत के मुताबिक टिकट वितरण करेगी, इसका फैसला आज जारी होने जा रही भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में हो जाएगा।


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