धान को छोड़ इस बार मक्का, अरहर, ग्वार, तिल व ग्रीष्म मूंग जैसी फसलों की बुआई करें किसान


जल संरक्षण महाभियान में सीएम मनोहर लाल ने किसानों से मांगा सहयोग 


संदीप कम्बोज। हरियाणा मीडिया जंक्शन 
चंडीगढ़। जल संरक्षण महाभियान में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के किसानों से सहयोग मांगा है। सीएम ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए पानी की बचत सुनिश्चित करने की दिशा में धान बाहुल्य जिलों में धान के स्थान पर किसानों को कम पानी से तैयार होने वाली अन्य वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए चलाए गए ‘जल ही जीवन है’ अभियान को और अधिक गति प्रदान करने के मद्देनजर आज प्रदेश के किसानों नेताओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे इस अभियान को एक आंदोलन के रूप में चलाकर किसानों को धान के स्थान पर मक्का, अरहर, ग्वार, तिल, ग्रीष्म मूंग (बैशाखी मूंग) व अन्य फसलों की बुआई करने के लिए प्रेरित करें। वे यहां चंडीगढ़ से विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न किसान संघों के नेताओं से बातचीत करने के दौरान किया। मुख्यमंत्री ने विडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई किसान नेताओं द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों का स्वागत करते हुए इन्हें भविष्य की योजनाओं में शामिल करने का आश्वासन देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक विजय दहिया को निर्देश भी दिए कि जिन किसान नेताओं द्वारा सुझाव दिए गए हैं, उनको शीघ्र ही कृषि निदेशालय में बुलाकर पूरी जानकारी लें तथा 15 दिनों के अंदर-अंदर जल संरक्षण की नई योजनाएं तैयार करें। इसी प्रकार, भू-जल रिचार्ज के लिए खेतों व तालाबों में बोरवैल की एक समेकित योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा, फरीदाबाद जिले के मंझावली के प्रगतिशील किसान मुकेश यादव के दिए गए सुझाव कि जिन-जिन जिलों में प्रगतिशील किसानों ने अपनी खेती को एक मॉडल के रूप में विकसित किया है, वहां का दौरा अन्य किसानों को भी करवाया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जिलें में 50 से 100 किसानों की एक सूची तैयार की जाए और प्रगतिशील किसानों के मॉडल का अवलोकन करें तथा वे स्वयं भी इसे अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें।

सरकार ने रखा है यह लक्ष्य 
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष  हरियाणा ने धान बाहुल्य जिलों में 50 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल के स्थान पर मक्का, अरहर व अन्य फसलों उगाने के लिए ‘फसल विविधीकरण पायलट योजना’ की शुरूआत कर देश के समक्ष ‘जल ही जीवन है’ का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था और अब इस योजना का विस्तार करके इसे एक लाख हैक्टेयर क्षेत्र किया गया है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि अब किसान नेता भी इस पहल के लिए आगे आएं ताकि हम भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए पानी की बचत सुनिश्चित कर सकें। सीएम ने कहा कि सबको यह संदेश देना होगा कि पानी बचाना है तो धान नहीं लगाना है बल्कि धान के स्थान पर इसके बराबर आमदनी वाली फसलें उगानी हैं। मुख्यमंत्री ने किसान नेताओं को आश्वासन दिया कि जिस प्रकार सरकार ने सरसों व बाजरे की खरीद की है, उसी प्रकार धान के स्थान पर उगाई गई मक्का का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

इस बार प्रवासी मजदूर भी नहीं होंगे उपलब्ध 
मुख्यमंत्री ने किसान नेताओं से अपील की है कि जिन पंचायतों ने पंचायती जमीन ठेके पर दी है उन पट्टेदारों से भी अपील करें कि वे धान के स्थान पर मक्का, अरहर व अन्य फसलों की ही बुआई करें और सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल ही जीवन है अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि किसानों को यह बात समझनी चाहिए कि एक किलोग्राम चावल उगाने पर 3000 से 5000 लीटर पानी की खपत होती है और विभाग द्वारा पानी की इस खपत को कम करने के लिए यह योजना शुरू की है। इसके अलावा, कुछ किसान नेताओं ने सुझाव भी दिया कि कोरोना महामारी के चलते प्रवासी मजदूर उपलब्ध नहीं होंगे और इसलिए इस बार धान की रोपाई में परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

ढैंचा बीच उपलब्ध करवा रहा है हरियाणा बीज निगम
बैठक में मुख्यमंत्री  मनोहर लाल को इस बात की भी जानकारी दी गई कि गेहूं की फसल की कटाई के बाद धान की बजाय कुछ जिलों में किसान ढैंचा भी लगाते हैं, जो चारे के साथ-साथ हरी खाद का काम करता है, क्योंकि किसान कुछ समय बाद इसकी खेत में जुताई कर देता है और इससे भूमि की उर्वरक शक्ति भी बढ़ती है। मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि विभाग द्वारा हरियाणा बीज निगम के माध्यम से 29 हजार क्विंटल ढैंचा के बीज की उपलब्धता करवाई गई है।

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