न केस, न तारिख न गवाही, बस एक गोली और हो गया इंसाफ
शाबाश IPS अजय! रच दिया इतिहास, सलाम,सलाम,सलाम
हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार बलात्कारी को सजा-ए-मौत
संदीप कम्बोज/ हिसार मीडिया जंक्शन
Jun 23, 2019, 06:17 PM
हिसार।हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार आज हवस के भेडि़यों, हैवान, दरिंदों, दुराचारियों की रूह कांप गई होगी। बाकी बचे बलात्कारी, शैतान अब छिपने के लिए बिल ढूंढ रहे होंगे या अपनी मां-बहन के आंचल में दुबकने की फिराक में होंगे। बलात्कारी को गोली से उडाकर सजा-ए-मौत देने का जो कमाल उत्तर प्रदेश के इस जाबांज आईपीएस अफसर ने कर दिखाया है, वास्तव में बेमिसाल है। कानून भले ही इसकी इजाजत नहीं देता लेकिन ईन हराम के पिल्लों का असल ईलाज यही है जो आपने कर दिखाया है। न कोई केस, न कोई तारिख न कोई गवाही, बस एक गोली और हो गया इंसाफ। अब देखना यह है कि इस बहादुर जाबांज अफसर का विरोध कौन लोग करते हैं। अब बुद्धीजीवी पत्रकारों, नेताओं व समाजसेवी संस्थाओं की बडी़ फौज मानवाधिकारों की दुहाई देते हुए इस बहादुर अफसर के विरोध में खडी़ हो सकती है जो इसे मानवता विरोधी करार देगी। टीआरपी की भूख में ये लोग उन बेटियों के जख्म भी भुला देंगे जो नदीम जैसे शैतानों से उन्हें मिले हैं। मीडिया जंक्शन की समाज से एक विनम्र जरुरी अपील, "बेटियों को इंसाफ दिलाने की ऐतिहासिक शुरूआत करने वाले इस साहसी अफसर के विरोध में उठने वाले एक-एक चेहरे को अब अच्छे से पहचान लीजिएगा क्योंकि असल तस्वीर अब साफ होने वाली है कि कौन एसे हवसी दरिंदों का हिमायती है और कौन हमारी यानि हिन्दुस्तान की बेटियों के पक्ष में ।"
अजय जी को एक बार फिर सैल्यूट, दिल से।
शाबाश IPS अजय! रच दिया इतिहास, सलाम,सलाम,सलाम
हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार बलात्कारी को सजा-ए-मौत
संदीप कम्बोज/ हिसार मीडिया जंक्शन
Jun 23, 2019, 06:17 PM
हिसार।हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार आज हवस के भेडि़यों, हैवान, दरिंदों, दुराचारियों की रूह कांप गई होगी। बाकी बचे बलात्कारी, शैतान अब छिपने के लिए बिल ढूंढ रहे होंगे या अपनी मां-बहन के आंचल में दुबकने की फिराक में होंगे। बलात्कारी को गोली से उडाकर सजा-ए-मौत देने का जो कमाल उत्तर प्रदेश के इस जाबांज आईपीएस अफसर ने कर दिखाया है, वास्तव में बेमिसाल है। कानून भले ही इसकी इजाजत नहीं देता लेकिन ईन हराम के पिल्लों का असल ईलाज यही है जो आपने कर दिखाया है। न कोई केस, न कोई तारिख न कोई गवाही, बस एक गोली और हो गया इंसाफ। अब देखना यह है कि इस बहादुर जाबांज अफसर का विरोध कौन लोग करते हैं। अब बुद्धीजीवी पत्रकारों, नेताओं व समाजसेवी संस्थाओं की बडी़ फौज मानवाधिकारों की दुहाई देते हुए इस बहादुर अफसर के विरोध में खडी़ हो सकती है जो इसे मानवता विरोधी करार देगी। टीआरपी की भूख में ये लोग उन बेटियों के जख्म भी भुला देंगे जो नदीम जैसे शैतानों से उन्हें मिले हैं। मीडिया जंक्शन की समाज से एक विनम्र जरुरी अपील, "बेटियों को इंसाफ दिलाने की ऐतिहासिक शुरूआत करने वाले इस साहसी अफसर के विरोध में उठने वाले एक-एक चेहरे को अब अच्छे से पहचान लीजिएगा क्योंकि असल तस्वीर अब साफ होने वाली है कि कौन एसे हवसी दरिंदों का हिमायती है और कौन हमारी यानि हिन्दुस्तान की बेटियों के पक्ष में ।"
अजय जी को एक बार फिर सैल्यूट, दिल से।


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