माँ को एड्स है तो घबराएं नहीं, गर्भ में पल रहे बच्चे को नहीं होगा

माँ को एड्स है तो घबराएं नहीं, गर्भ में पल रहे बच्चे को नहीं होगा 

एक माह में खुल जाएगा एआरटी सेंटर, हिसार के मरीजों को रोहतक जाने की जरूरत नहीं 
4 अगस्त 2019, 9:59AM
मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
हिसार। यदि किसी महिला को एड्स है और उसे डर है कि उसके गर्भ में पल रहे शीशु को भी कहीं यह बीमारी न लग जाए तो अब उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। अब ऐसी दवाएं भी आ चुकी हैं जिनसे ऐसा खतरा टाला जा सकता है और गर्भस्थ शीशु को एड्स नहीं होगा। जी हां! जिला हिसार के नागरिक अस्पताल में इस तरह की दो डिलीवरी हो भी चुकी हैं। जिला उपायुक्त ने नई जानकारी देते हुए बताया कि अब पीपीटीसीटी (प्रीवेंशन आॅफ पेरेंट्स टू चाइल्ड ट्रांसमिशन) कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसी दवाएं भी आ चुकी हैं जिनकी मदद से एड्स पीड़ित गर्भवती महिला के बच्चे को एचआईवी मुक्त स्थिति में जन्म दिया जा सकता है। जिला में अब तक ऐसी दो डिलीवरी हो चुकी हैं जिनमें पैदा होने वाले बच्चे एचआईवी से मुक्त हैं। उन्होंने बताया कि प्रसव के पश्चात गर्भनाल काटने से पूर्व बच्चे को यह दवा पिलाने से ऐसा संभव होता है। उपायुक्त ने बताया कि एचआईवी पीड़ित व्यक्तियों को योजनाओं की जानकारी नहीं होती जिस कारण उन्हें दोहरे नुकसान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी एचआईवी पीड़ित मजदूर का श्रम विभाग में पंजीकरण करवा दिया जाए तो श्रम विभाग की अनेक योजनाओं का लाभ उसे व उसके परिवार को मिल सकता है जो पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ा संबल साबित होता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एचआईवी पीड़ितों का डाटा बेस तैयार करके उसे सभी विभागों से साझा करे ताकि विभाग पीड़ितों को अपनी योजनाओं में शामिल कर सकें। स्वास्थ्य विभाग से डॉ. सुशील गर्ग ने बताया कि जिला में एचआईवी पीड़ित चिह्नित व्यक्तियों की संख्या 601 है। इन्हें सरकार के माध्यम से दी जाने वाली सभी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आजकल स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसी दवाएं व सुविधाएं हैं जिनकी मदद से एचआईवी पीड़ित व्यक्ति एड्स की स्टेज तक पहुंचने में 15-20 साल का समय निकाल सकते हैं। इस दौरान वे किसी दिक्कत के बिना सामाजिक रूप से सक्रिय जीवन जी सकते हैं। इसके लिए रोग की शुरूआती दौर में ही पहचान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिनके संपर्क में एचआईवी पीड़ितों की जानकारी है वे उनका पंजीकरण स्वास्थ्य विभाग में जरूर करवाएं। एचआईवी की जांच के लिए जिला में छोटे-बड़े कुल 45 केंद्रों संचालित हैं।

एक माह में खुल जाएगा एआरटी सेंटर, हिसार के मरीजों को रोहतक जाने की जरूरत नहीं 
जिला उपायुक्त ने बताया कि अब हिसार जिला में एआरटी सेंटर भी मंजूर हो गया है जिससे अब मरीजों को रोहतक भेजने की जरूरत नहीं रहेगी। अगले एक माह में यह केंद्र जिला में शुरू करवा दिया जाएगा।


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