राज्य में दो एम्स खोलने का था वादा, 5 साल में सरकारी अस्पताल भी 69 से घटकर 62 रह गए
प्रदेश में 5000 से अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता लेकिन सिर्फ 2100 हैं नियुक्त
हरियाणा में प्रति व्यक्ति खर्च राष्ट्रीय औसत से भी कम
19 सितंबर 2019, 1:13 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। हरियाणामें भाजपा सरकार को उनके पंचवर्षीय प्रदर्शन पर लगातार घेर रहे स्वराज इंडिया ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े आँकड़ें इस ओर इशारा करते हैं कि खट्टर सरकार हरियाणा के स्वास्थ्य को लेकर सजग नहीं है और पिछली कांग्रेस सरकार की तरह जनता की आँखों में केवल धूल झोंकने का काम कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि खट्टर सरकार ने हरियाणा में दो एम्स खोलने का वादा किया था लेकिन सरकार के अपने आँकड़े बताते हैं कि इनके कार्यकाल में कुल सरकारी अस्पतालों की संख्या 69 से घटकर 62 रह गई। स्वराज इंडिया हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गोदारा ने याद दिलाया कि 2014 में भाजपा ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक वादे किए थे लेकिन उनमें से एक भी वादे को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। और तो और कई क्षेत्रों में, विशेषत: गरीबों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ और प्रदेश में शराब के सेवन के मामलों में स्थिति और खराब हुई है। योगेंद्र यादव ने बताया कि देश का अपेक्षाकृत संपन्न राज्य होने के बावजूद हरियाणा सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च देश की औसत से कम है। स्वास्थ्य कर्मियों के राष्ट्रीय प्रतिमान की तुलना में हरियाणा में डॉक्टर एएमसी और नर्स सभी आवश्यकता से आधे भी नहीं है। प्रदेश में 5000 से अधिक डॉक्टर की आवश्यकता है जबकि केवल 2100 डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। इतनी चिंताजनक स्थिति के बावजूद भी खट्टर सरकार तनिक भी गंभीर नहीं दिखती। सरकार का पूरा ध्यान जनता के पैसे से ही मँहगे विज्ञापन देकर जनता को गुमराह करने में लगा हुआ है। जाहिर है पिछली सरकारों की तरह इस सरकार को भी गांव और गरीब के स्वास्थ्य की तनिक भी चिंता नहीं है। स्वराज इंडिया इस दुखद स्थिति में सुधार के लिए अपना वैकल्पिक प्रस्ताव जल्द ही हरियाणा की जनता के सामने पेश करेगी।
पिछले चुनाव में भाजपा ने किए थे ये वादे
प्रत्येक बालक, बालिका, महिला एवं वृद्धों को अनिवार्य स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाएगा और उन्हें कुपोषण से मुक्त रखने के संदर्भ में बजट में विशेष तौर पर धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।
स्टेट लिकर पॉलिसी का पुनरावलोकन कर इसमें जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सुधार किया जाएगा।
प्राइवेट अस्पताल जिन्होंने सरकार से भूमि सस्ते दर पर ली है, उन द्वारा 25% मरीजों का निशुल्क इलाज स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की नीति लागू की जाएगी
2 लाख तक वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए चिकित्सा मुफ्त दवाई योजना लागू की जाएगी।
प्रदेश में 5000 से अधिक डॉक्टरों की आवश्यकता लेकिन सिर्फ 2100 हैं नियुक्त
हरियाणा में प्रति व्यक्ति खर्च राष्ट्रीय औसत से भी कम
19 सितंबर 2019, 1:13 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन। संदीप कम्बोज
चंडीगढ़। हरियाणामें भाजपा सरकार को उनके पंचवर्षीय प्रदर्शन पर लगातार घेर रहे स्वराज इंडिया ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े आँकड़ें इस ओर इशारा करते हैं कि खट्टर सरकार हरियाणा के स्वास्थ्य को लेकर सजग नहीं है और पिछली कांग्रेस सरकार की तरह जनता की आँखों में केवल धूल झोंकने का काम कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा कि खट्टर सरकार ने हरियाणा में दो एम्स खोलने का वादा किया था लेकिन सरकार के अपने आँकड़े बताते हैं कि इनके कार्यकाल में कुल सरकारी अस्पतालों की संख्या 69 से घटकर 62 रह गई। स्वराज इंडिया हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गोदारा ने याद दिलाया कि 2014 में भाजपा ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक वादे किए थे लेकिन उनमें से एक भी वादे को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। और तो और कई क्षेत्रों में, विशेषत: गरीबों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ और प्रदेश में शराब के सेवन के मामलों में स्थिति और खराब हुई है। योगेंद्र यादव ने बताया कि देश का अपेक्षाकृत संपन्न राज्य होने के बावजूद हरियाणा सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च देश की औसत से कम है। स्वास्थ्य कर्मियों के राष्ट्रीय प्रतिमान की तुलना में हरियाणा में डॉक्टर एएमसी और नर्स सभी आवश्यकता से आधे भी नहीं है। प्रदेश में 5000 से अधिक डॉक्टर की आवश्यकता है जबकि केवल 2100 डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। इतनी चिंताजनक स्थिति के बावजूद भी खट्टर सरकार तनिक भी गंभीर नहीं दिखती। सरकार का पूरा ध्यान जनता के पैसे से ही मँहगे विज्ञापन देकर जनता को गुमराह करने में लगा हुआ है। जाहिर है पिछली सरकारों की तरह इस सरकार को भी गांव और गरीब के स्वास्थ्य की तनिक भी चिंता नहीं है। स्वराज इंडिया इस दुखद स्थिति में सुधार के लिए अपना वैकल्पिक प्रस्ताव जल्द ही हरियाणा की जनता के सामने पेश करेगी।
पिछले चुनाव में भाजपा ने किए थे ये वादे
प्रत्येक बालक, बालिका, महिला एवं वृद्धों को अनिवार्य स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाएगा और उन्हें कुपोषण से मुक्त रखने के संदर्भ में बजट में विशेष तौर पर धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।
स्टेट लिकर पॉलिसी का पुनरावलोकन कर इसमें जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सुधार किया जाएगा।
प्राइवेट अस्पताल जिन्होंने सरकार से भूमि सस्ते दर पर ली है, उन द्वारा 25% मरीजों का निशुल्क इलाज स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की नीति लागू की जाएगी
2 लाख तक वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए चिकित्सा मुफ्त दवाई योजना लागू की जाएगी।


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