मानेसर जमीन घोटाला : 5 घंटे तक चली आरोपों पर बहस, हुड्डा समेत सभी आरोपी पहुंचे कोर्ट
19 सितंबर 2019, 2:11 AM
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
पंचकूला। मानेसर जमीन घोटाले व एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड केस मामले की बुधवार को पंचकूला की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत लगभग सभी आरोपी कोर्ट पहुंचे। करीब 5 घंटे तक आरोपों पर बहस हुई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इससे पहले हुड्डा ने एजेएल मामले में खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की थी। पंचकूला कोर्ट ने इस बारे में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हुड्डा व अन्य आरोपियों ने कहा था कि इस मामले में उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। बता दें कि 27 अगस्त 2004 में इनेलो सरकार ने गुड़गांव के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर की 912 एकड़ जमीन आईएमटी बनाने के लिए सेक्शन-4 का नोटिस जारी किया। इसके बाद कांग्रेस सत्ता में आई। तत्कालीन सीएम हुड्डा ने आईएमटी रद्द कर 25 अगस्त 2005 में सार्वजनिक कामों के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए सेक्शन-6 का नोटिस जारी कराया। मुआवजा 25 लाख रु. एकड़ तय हुआ। अवॉर्ड के लिए सेक्शन-9 का नोटिस भी जारी हुआ, पर इससे पहले बिल्डर्स ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखा 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। 2007 में बिल्डर्स की 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कर दी गई। इससे किसानों को करीब 1500 करोड़ का नुकसान हुआ।
भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
19 सितंबर 2019, 2:11 AM
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पंचकूला। मानेसर जमीन घोटाले व एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड केस मामले की बुधवार को पंचकूला की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत लगभग सभी आरोपी कोर्ट पहुंचे। करीब 5 घंटे तक आरोपों पर बहस हुई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इससे पहले हुड्डा ने एजेएल मामले में खुद को डिस्चार्ज करने की मांग की थी। पंचकूला कोर्ट ने इस बारे में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हुड्डा व अन्य आरोपियों ने कहा था कि इस मामले में उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। बता दें कि 27 अगस्त 2004 में इनेलो सरकार ने गुड़गांव के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर की 912 एकड़ जमीन आईएमटी बनाने के लिए सेक्शन-4 का नोटिस जारी किया। इसके बाद कांग्रेस सत्ता में आई। तत्कालीन सीएम हुड्डा ने आईएमटी रद्द कर 25 अगस्त 2005 में सार्वजनिक कामों के लिए जमीन अधिग्रहण के लिए सेक्शन-6 का नोटिस जारी कराया। मुआवजा 25 लाख रु. एकड़ तय हुआ। अवॉर्ड के लिए सेक्शन-9 का नोटिस भी जारी हुआ, पर इससे पहले बिल्डर्स ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखा 400 एकड़ जमीन औने-पौने दाम पर खरीद ली। 2007 में बिल्डर्स की 400 एकड़ जमीन अधिग्रहण से मुक्त कर दी गई। इससे किसानों को करीब 1500 करोड़ का नुकसान हुआ।
भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी थी। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।


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