शुकर है ! इस साल 34.50 फीसद कम जली पराली

शुकर है ! इस साल 34.50 फीसद कम जली पराली


7 दिसंबर 2019, 8:04 AM
संदीप कम्बोज। हरियाणा मीडिया जंक्शन
चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार परालीजलाने की घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले काफी गिरावट आई है। सरकार द्वारा राज्य में पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए सब्सिडी दर पर विशेष उपकरण भी उपलब्ध करवाएं हैं, जिसके परिणामस्वरूप 6 नवंबर से अब तक पराली जलने की घटनाओं में 65.94 प्रतिशत की कमी और पिछले वर्ष के मुकाबले इस पूरे सीजन में 34.50 प्रतिशत की कमी आई है। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि वर्ष 2018 में 6 नवंबर से 24 नवंबर तक 4135 पराली जलाने की घटनाएं हुई थी जबकि इस वर्ष इसी अवधि में केवल 1408 घटनाएं हुई हैं। इसी प्रकार, गत वर्ष पूरे सीजन में पराली जलाने की 10050 घटनाएं हुई थी जबकि इस वर्ष पूरे सीजन में 6581 घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पराली जलाने से रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए और इसी कड़ी में 6 नवंबर, 2019 से गैर-बासमती धान की पराली न जलाने के लिए लघु एवं सीमांत किसानों को 100 रुपये प्रति किवंटल की दर से विशेष प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई थी और इसके तहत अब तक 3438 किसानों को एक करोड़ 45 लाख 758 रुपये वितरित किए जा चुके हैं।

जानें पराली प्रबंधन के लिए सरकार ने क्या उठाए कदम
प्रवक्ता ने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से पराली के एक्स सीटू तथा इन सीटू प्रबंधन के लिए 150 बैलर्स सब्सिडी दरों पर उपलब्ध करवाए गए। इसके अलावा, पराली के एक्स सीटू तथा इन सीटू प्रबंधन के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों को परिचालन लागत के रूप में 1 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ स्तर के आईएएस अधिकारियों को हर जिले में निगरानी के लिए नियुक्त किया गया । उन्होंने बताया कि पी.के. दास को जिला कैथल, देवेंद्र सिंह को जिला फतेहाबाद, टीसी गुप्ता को जिला सिरसा, डॉ महावीर सिंह को जिला जींद और अनुराग रस्तोगी को हिसार जिला सौंपा गया है और गांवों में भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।

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