सराहनीय : बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे को सार्थक करने में जुटी है जिला यमुनानगर की यह ब्रांड एम्बेसडर



28 दिसंबर 2019, 7:31 PM
हरियाणा मीडिया जंक्शन न्यूज
यमुनानगर। जिला बाल कल्याण समिति की सदस्या व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की यमुनानगर जिला ब्रांड एम्बेसडर अलका गर्ग की शख्सिहत से पूरे यमुनानगर जिले के लोग अच्छी तरह से वाकिफ हैं। अल्का गर्ग के सामाजिक कार्यों की गूंज पूरे जिला यमुनानगर सहित हरियाणा भर में हो रही है। बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को धरातल पर मूर्त रूप देने में जुटी अलका गर्ग के प्रयास रंग लाने लगे हैं और जिले में लिंग अनुपात में तेजी से सुधार आया है। आज हम आपको अलका गर्ग के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। जिला यमुनानगर के कस्बा छछरौली में जन्मी अलका गर्ग एम ए इंग्लिश की शिक्षा पूरी कर चुकी हंै तथा वे अभी भी अध्ययनरत हैं। अलका गर्ग बताती हैं कि उनके परिवार में जब वे छोटी थी, तब उनके परिजनों ने उन्हें कहा कि दसवीं के बाद इसकी आगे की पढ़ाई रोक दो क्योंकि हमारे परिवार से आज तक कोई भी लड़की दसवीं कक्षा में प्रथम श्रेणी में पास नहीं हुई थी। तब मैने मन में ठान लिया कि अबकी बार दसवीं की कक्षा प्रथम श्रेणी में पास करके दिखाऊंगी और मैने पूर जोर मेहनत की और दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की जिससे प्रभावित होकर उनके परिवार वालों को अपना फैसला बदलना पड़ा ओर मेरी उच्च शिक्षा की पढ़ाई की शुरूआत हुई। इसी प्रकार अपने जीवन संघर्ष की गाथा बारे उन्होंने बताया कि इसी प्रकार 12 वीं क्लास के समय में क्योंकि घर से कालेज काफी दूर था तो अलका गर्ग को कॉलेज जाने में परेशानी होती थी तब  अपनी परेशानी अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा कि अगर इस बार वह अच्छे नंबरों से पास होगी तब उसे वह मोटरसाइकिल देंगे तब इसको चैलेंज के तौर पर लेते हुए उन्होंने पुरजोर मेहनत की और अच्छे नंबरों से पास हुई तब उनके पापा ने उन्हें उपहार स्वरूप मोटरसाइकिल भेंट की। उस समय में लड़कियों का मोटरसाइकिल चलाना आश्चर्य माना जाता था,मोटरसाइकिल मिलने की वजह से उनके कालेज आने-जाने में काफी सुविधा हुई जिस की वजह से उन्होंने अपने कॉलेज की शिक्षा अच्छे नंबरों से पूर्ण की।

सरकारी स्क्ूलों में लड़कियों का दाखिला करवाने में झोंकी ताकत
अलका गर्ग का कहना है कि अपने स्तर पर सामाजिक कार्यों में बहुत अच्छे तरीके से शुरू से ही योगदान देती रही हैं ,और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में हरियाणा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की तब भाजयुमो के पंच क्रांति अभियान के तहत उन्हें कन्या शक्ति क्रांति का यमुनानगर का जिला संयोजक नियुक्त किया गया। साल 2015 में जिला यमुनानगर लिंगानुपात में बहुत पिछड़ रहा था। उन्होंने सरकारी विद्यालयों और निजी विद्यालयों एवं धार्मिक संस्थाओं में जाकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की अलख जगानी शुरू कर दी। उन्होंने जिला यमुनानगर के चारों विधानसभा क्षेत्रों में जाकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम करने शुरू किए जिसका नतीजा यह रहा कि यमुनानगर जिला जो कि लिंगानुपात में बहुत पिछड़ गया था वह धीरे-धीरे लिंगानुपात में सही स्थिति पर आने लग गया ,फिर वह सरकारी स्कूलों में रोल मॉडल के तहत जाने लगी और उनका उद्देशय था कि ग्रामीण इलाकों में जाकर जो लड़कियां पढ़ाई बीच में छोड़ देती थी या उनके अभिभावक लड़कियों की पढ़ाई बीच में छुड़वा देते थे,उनको जाकर वह हौंसला देती थी। उन्हें सम्मानित करती थी और उन्हें कहती थी कि उच्च शिक्षा के लिए आप आगे आएं ,हरियाणा की मनोहर सरकार एवं केंद्र की मोदी सरकार की बहुत सी योजनाएं आपके लिए चल रही हैं उन योजनाओं से जोड़कर अलका गर्ग ने लड़कियों को प्रोत्साहित किया कि वह अपने बच्चों का एडमिशन विद्यालयों में करवाएं। इस का नतीजा यह निकला कि जहाँ सरकारी स्कूलों में लडकियों की एडमिशन की स्थिति कम होती जा रही थी उन सरकारी विद्यालयों में लड़कियों का प्रवेश धीरे-धीरे बढ़ने लग गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने इस अभियान में दिन-रात की कोई परवाह नहीं की ।

अभियान से जुड़ी तो लोगों ने उड़ाया था मजाक
अलका गर्ग ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत वह अब तक लगभग 300 से ज्यादा कार्यक्रम कर चुकी है जिसमें लगभग 30 हजार से ज्यादा छात्राएं ,उनके अभिभावक, ए एन एम वर्कर,आंगनबाड़ी वर्कर,अध्यापक ,गांव के सरपंच व पंच ,मिड डे मील वर्कर आदि मौजूद रहे। 30 हजार से ज्यादा विधार्थियों व समाज के अन्य लोगों ने उनके कार्यक्रमों में भाग लेकर कार्यक्रमों को सफल बनाया है। अलका गर्ग ने बताया कि छात्राओं व उनके अभिभावकों को जागरूक करने के अभियान पर जितना खर्चा आया हैं वह स्वयं अपने निजी कोष से किया है, उन्होंने किसी से आर्थिक मदद नहीं ली है। उन्होंने बताया कि शुरू में जब उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़कर अपना कार्य शुरू किया था तो लोगों ने उनका पूरा मजाक बनाया था उन पर कटाक्ष भी किए थे व उनके घर की चारदीवारी सें बाहर निकल कर कार्य न करने के लिए कई प्रकार के ओछे हथकंडे भी अपनाए परंतु यह पवित्र कार्यक्रम करने के लिए उनके कदम कभी भी अभियान में जरा से भी नहीं डगमगाए और उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपने काम पर केंद्रित रखा। उन्होंने बताया कि आज भी कई छात्राओं के उनके पास फोन आते हैं जो उनसे प्रभावित होकर आगे कि अपनी उच्च शिक्षा की पढ़ाई अपने घरवालों से पढाई छोड़ने का विरोध करके अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी और आज वह छात्राएं बहुत खुश हंै और उनसे कहती हैं कि आप व आपकी सकारात्मक विचारों से प्रभावित होकर हममें, अपने घर वालों से बात करने की शक्ति आ गई और हमने अपने घर वालों से कहा कि हमें आगे पढ़ना व आगे बढ़या है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ सभी विद्यार्थियों को कौशल निर्माण ,खेलकूद ,योग आदि में भी निपुण बनना होगा ताकि सभी योग्य अपने पैरों पर खड़े हो कर आत्मनिर्भर बन सके।

मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय पुरस्कार से किया सम्मानित 
अलका गर्ग को उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान संस्थान ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में कार्य करने के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा है। यमुनानगर जिला प्रशासन एवं उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित कर चुका है ,बिलासपुर उपमंडल स्तर पर प्रशासन उन्हें सम्मानित कर चुका है ,इसके साथ साथ बहुत सी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के द्वारा भी  सम्मानित किया जा चुका है,अलका गर्ग वर्तमान में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की यमुनानगर जिले की ब्रांड एम्बेसडर है और बाल कल्याण समिति की जिले की सदस्या हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से बच्चों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है और वह बच्चों के कल्याण के लिए कृतसंकल्प है, छात्र-छात्राओं से सम्बंधित कोई भी समस्या जब उनके संज्ञान में आती है तो वह उसको कोशिश करके तुरंत हल करवाने का प्रयास करती हैं ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।

अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को कर चुकी जागरूक
अलका गर्ग ने बताया कि 30 हजार से ज्यादा छात्र छात्राएं व अभिभावक उनके कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं जो कि एक बड़ी उपलब्धि है अगर हमारे कार्य करने से उन लोगों की जिंदगी में कुछ भी सकारात्मक बदलाव आता है तो यह बहुत बड़ी सफलता है और मेरा मानना है कि हम अपने कार्य में आगे भी ऐसे ही जरूर सफलता हासिल करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि सामाजिक बुराई दहेज कुप्रथा है उसे जड़ से मिटाना है वह जब जब से तभी जड़ से निकलेगी जब हमारे बच्चे लड़का हो या लड़की हो वह आत्मनिर्भर बनकर जब अपने पैरों पर खड़े होकर रोजगार प्राप्त कर रहे होंगे तब ना कोई लेने वाला होगा ना कोई दहेज देने वाला होगा, दहेज प्रथा समाप्त हो जाएगी ,यह बदलाव  समाज में क्रांतिकारी बदलाव आएगा जो एक अच्छे समाज के महान देश की सूचक होता है।

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